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क्या दिल्ली के गांवों का शहर पर हक़ नहीं है?
जून 2025 में दिल्ली के नारायणा गांव में एक जनसुनवाई हुई। इसने दशकों की सरकारी उपेक्षा के साथ-साथ स्थानीय समुदाय के उभरते प्रतिरोध को भी सामने रखा।डेटा से नहीं, लोगों से सीखना
भारत के ट्रकिंग समुदाय के साथ काम करते हुए हमने जाना कि फील्ड में समय बिताना, भरोसा बनाना और उन समुदायों को समझना कितना अहम है, जो अक्सर औपचारिक आंकड़ों से बाहर रह जाते हैं।जून 2026 एफसीआरए संशोधन: नॉन-प्रॉफिट संस्थाओं के लिए इसके क्या मायने हैं?
गृह मंत्रालय ने एफसीआरए नियमों में संशोधन किया है। जानिए क्या सब बदला है और आपकी संस्था कैसे इन नए नियमों का पालन कर सकती है।क्या सोशल सेक्टर सवाल पूछने से कतराने लगा है?
जैसे-जैसे गैर-लाभकारी संस्थाओं का प्रभाव बढ़ रहा है, क्या उनकी स्वतंत्र और सवाल उठाने वाली आवाज़ कमज़ोर पड़ती जा रही है?साझा संसाधनों के लिए क्यों ज़रूरी है सामुदायिक डेटा?
समुदायों का कॉमंस से पुराना रिश्ता है, जिसमें उनकी मौखिक परंपराएं, अनुभव और ज्ञान शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या डेटा प्रणालियां इस रिश्ते को अहमियत देने के लिए तैयार हैं?एक बीमा, एक हेल्थ चेक-अप: क्या ऐसे होती है एनजीओ कर्मचारियों की देखभाल?
जब तक विकास सेक्टर कॉर्पोरेट एचआर नीतियों से हटकर ज़मीनी समुदायों के तौर-तरीके और सामाजिक न्याय के मूल्य नहीं अपनाता, तब तक सामूहिक देखभाल का विचार सिर्फ कागज़ों पर नज़र आएगा।आज़ादी के आठ दशक बाद भी वन विभाग के नियंत्रण में क्यों हैं मध्य प्रदेश के वन ग्राम?
वन ग्राम वे बस्तियां हैं जिन्हें वन विभाग ने अपने नियंत्रण वाले वन क्षेत्रों में बसाया या अपने प्रशासनिक ढांचे में शामिल किया। इनमें भूमि, रिकॉर्ड और प्रशासन लंबे समय तक राजस्व विभाग के बजाय वन विभाग के अधीन रहे हैं।क्या शहरों की यातायात से जुड़ी समस्याओं का समाधान सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन हैं?
भारत में बिजली से चलने वाले परिवहन के बढ़ते उपयोग के बीच, पटना और लखनऊ का अनुभव दिखाता है कि शहरी आवाजाही का भविष्य केवल तकनीक नहीं, बल्कि सुरक्षित, सुलभ और समावेशी परिवहन पर भी निर्भर करेगा।गंभीर बीमारी में किसी की देखभाल करने के क्या मायने हैं?
मुंबई में एक काउंसलर और नर्स के जीवन का एक दिन-जहां वे घर-आधारित पैलिएटिव केयर के ज़रिए मरीज़ों और उनके परिवारों को बीमारी, क्षति और अनिश्चितता का सामना गरिमा के साथ करने में सहारा देती हैं।पंचायतों से जुड़ी संस्थाएं सरकारी पोर्टल्स का बेहतर इस्तेमाल कैसे करें?
अगर कोई संस्था अपने फील्ड सर्वेक्षण, समुदाय की बातचीत या स्थानीय अनुभवों की तुलना सरकारी आंकड़ों से करती है, तो उसे क्षेत्र की स्थिति को अधिक गहराई से समझने में मदद मिलती है।दलितों के स्वाभिमान का साहित्य है लोकगाथा सलहेस
राजा सलहेस सिर्फ बिहार या किसी एक जाति विशेष की लोकगाथा का नायक नहीं, बल्कि बहुजन समाज के साझा नायक हैं। सलहेस की लोकगाथा प्रेम, संवेदना, विद्रोह और सामाजिक न्याय की अनूठी अभिव्यक्ति है।