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गंभीर बीमारी में किसी की देखभाल करने के क्या मायने हैं?
मुंबई में एक काउंसलर और नर्स के जीवन का एक दिन-जहां वे घर-आधारित पैलिएटिव केयर के ज़रिए मरीज़ों और उनके परिवारों को बीमारी, क्षति और अनिश्चितता का सामना गरिमा के साथ करने में सहारा देती हैं।पंचायतों से जुड़ी संस्थाएं सरकारी पोर्टल्स का बेहतर इस्तेमाल कैसे करें?
अगर कोई संस्था अपने फील्ड सर्वेक्षण, समुदाय की बातचीत या स्थानीय अनुभवों की तुलना सरकारी आंकड़ों से करती है, तो उसे क्षेत्र की स्थिति को अधिक गहराई से समझने में मदद मिलती है।दलितों के स्वाभिमान का साहित्य है लोकगाथा सलहेस
राजा सलहेस सिर्फ बिहार या किसी एक जाति विशेष की लोकगाथा का नायक नहीं, बल्कि बहुजन समाज के साझा नायक हैं। सलहेस की लोकगाथा प्रेम, संवेदना, विद्रोह और सामाजिक न्याय की अनूठी अभिव्यक्ति है।बदलाव की योजना: थ्योरी ऑफ चेंज कैसे काम करती है?
थ्योरी ऑफ चेंज एक तरह का रोडमैप है। यह बताता है कि हम आज कौन सी समस्या देख रहे हैं, उसे कैसे हल किया जा सकता है, और हमारे काम का क्या दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है।सिस्टम में बदलाव: हकीकत से ज़्यादा भ्रम
‘सिस्टम्स चेंज’ के प्रति बढ़ता आकर्षण संस्थाओं की प्राथमिकताओं को असंतुलित और ज़मीनी स्तर पर सार्थक प्रयासों को कमज़ोर बना सकता है।भारत के शहरों में डायबिटीज़, हाईपरटेंशन और बढ़ती स्वास्थ्य असमानताएं
बढ़ते गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के बीच सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच अब भी सीमित है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि शहरी अनौपचारिक बस्तियों में स्वास्थ्य समानता के लिए सामुदायिक स्तर पर कार्रवाई ज़रूरी है।वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2026: भारत के सोशल सेक्टर के लिए क्या हैं इसके मायने?
वैश्विक जोखिम दूर लगते हैं, पर उनका असर गांवों, कस्बों और शहरों में स्पष्ट दिखता है। महंगाई, बाढ़, गर्मी, गलत सूचना, बेरोज़गारी और सामाजिक तनाव अब भारतीय सामाजिक क्षेत्र की रोज़मर्रा की हकीकत हैं। यही इस रिपोर्ट की प्रमुख प्रासंगिकता है।एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 का संस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
प्रस्तावित संशोधनों के तहत गैर-लाभकारी संगठनों के ऊपर यह संकट बना रहेगा कि यदि उनका एफसीआरए पंजीकरण समाप्त हो जाता है या रद्द कर दिया जाता है, तो विदेशी फंड से तैयार संपत्तियों पर उनका नियंत्रण खत्म हो सकता हैसरल कोश: आखिर क्या होता है इंडिकेटर, जिससे आप अक्सर जूझते हैं!
इंडिकेटर का इस्तेमाल मुख्य रूप से योजना बनाने, मॉनिटरिंग करने और रिपोर्टिंग में किया जाता है। यह संस्थाओं को यह समझने में मदद करता है कि उनका काम सही दिशा में जा रहा है या नहीं, और उसका वास्तविक असर क्या है।अमर्त्य सेन के विचारों को साकार करते देश के पांच संगठन
स्वच्छता से आजीविका तक, पांच गैर-लाभकारी संगठन अमर्त्य सेन के विकास से जुड़े विचारों को दर्शाते हैं—स्वतंत्रता, आकांक्षा, मूलभूत सेवाओं तक पहुंच और लोकतांत्रिक भागीदारी।मिठास के पीछे का कड़वा सच: मराठवाड़ा के गन्ना मज़दूरों की कहानी
मराठवाड़ा एक सूखा-प्रभावित इलाका है जहां खेती भरोसेमंद नहीं है। सन 1950 के आस-पास अहमदनगर में पहली शुगर फैक्ट्री बनी थी और वहीं से एक नई मज़दूरी की कहानी शुरू हुई।हम आदिवासियों के स्वास्थ्य की जड़ें जंगल में हैं
कर्नाटक के आदिवासियों के लिए स्वास्थ्य और जीवनयापन के मुद्दे, जंगलों से उनके गहरे रिश्ते और विस्थापन के इतिहास में निहित हैं। इसलिए स्वास्थ्य का सवाल केवल दवाओं या अस्पतालों से नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों, परंपराओं और गरिमा से भी जुड़ा हुआ है।