
सत्यम श्रीवास्तव
सत्यम श्रीवास्तव हिंदी लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता और वन अधिकार विषय के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी
विश्वविद्यालय, वर्धा से एमफिल की शिक्षा प्राप्त की है। पिछले दो दशकों से वे जन आंदोलनों, आदिवासी समुदायों और मानवाधिकार के मुद्दों के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहे हैं।सत्यम श्रुति संस्था के निदेशक रह चुके हैं और अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन के साथ भी काम कर चुके हैं। वर्तमान में वे स्वतंत्र रूप से काम कर रहे हैं। वनाधिकार के मुद्दों पर एट्री संस्था के साथ जुड़े हैं। वन अधिकार, आदिवासी प्रश्न, आजीविका और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर उनका गहरा अनुभव और समझ है।
उनके लेख और स्तंभ द वायर, न्यूज़लॉन्ड्री, डाउन टू अर्थ, न्यूज़क्लिक, कारवां और जनपथ सहित अनेक प्रतिष्ठित प्रकाशनों में प्रकाशित हो चुके हैं। कोरोना महामारी पर उनकी एक पुस्तक ‘स्मृतियाँ जब हिसाब मांगेंगी’ प्रकाशित हो चुकी है। लेखन, प्रशिक्षण और जनसरोकारों के मुद्दों पर संवाद के माध्यम से उन्होंने नागरिक समाज में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
सत्यम श्रीवास्तव के लेख
अधिकार आज़ादी के आठ दशक बाद भी वन विभाग के नियंत्रण में क्यों हैं मध्य प्रदेश के वन ग्राम?
वन ग्राम वे बस्तियां हैं जिन्हें वन विभाग ने अपने नियंत्रण वाले वन क्षेत्रों में बसाया या अपने प्रशासनिक ढांचे में शामिल किया। इनमें भूमि, रिकॉर्ड और प्रशासन लंबे समय तक राजस्व विभाग के बजाय वन विभाग के अधीन रहे हैं।
