पर्यावरण
क्या दिल्ली के गांवों का शहर पर हक़ नहीं है?
जून 2025 में दिल्ली के नारायणा गांव में एक जनसुनवाई हुई। इसने दशकों की सरकारी उपेक्षा के साथ-साथ स्थानीय समुदाय के उभरते प्रतिरोध को भी सामने रखा।बदलते मॉनसून के दौर में बारिश की एक-एक बूंद सहेजना जरूरी
जलवायु परिवर्तन, अल नीनो और बदलते मॉनसून के बीच भारत में चरम मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे समय में बारिश की हर बूंद का संरक्षण ही जल और खाद्य सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।साझा संसाधनों के लिए क्यों ज़रूरी है सामुदायिक डेटा?
समुदायों का कॉमंस से पुराना रिश्ता है, जिसमें उनकी मौखिक परंपराएं, अनुभव और ज्ञान शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या डेटा प्रणालियां इस रिश्ते को अहमियत देने के लिए तैयार हैं?क्या शहरों की यातायात से जुड़ी समस्याओं का समाधान सिर्फ इलेक्ट्रिक वाहन हैं?
भारत में बिजली से चलने वाले परिवहन के बढ़ते उपयोग के बीच, पटना और लखनऊ का अनुभव दिखाता है कि शहरी आवाजाही का भविष्य केवल तकनीक नहीं, बल्कि सुरक्षित, सुलभ और समावेशी परिवहन पर भी निर्भर करेगा।कार्बन क्रेडिट क्या है और इसके वैश्विक स्तर पर क्या मायने हैं?
अंतर्राष्ट्रीय अनुभव दर्शाता है कि केवल “कार्बन क्रेडिट जारी करना” काफी नहीं है। उनकी गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही ज़रूरी है।ग्रामीण भारत में प्लास्टिक कचरे का हिसाब करना क्यों जरूरी है?
ग्रामीण भारत में हर साल लाखों टन प्लास्टिक कचरा पैदा होता है, जिसका आकलन नहीं होता। ऐसे में ग्रामीण स्तर के आंकड़ों को जोड़कर एक सर्कुलर इकॉनमी की नींव रखी जा सकती है।वन प्रबंधन के लिए समुदाय व शासन में बेहतर समन्वय की जरूरत
झारखंड में सामुदायिक वन अधिकार के तहत ग्रामसभाएं जंगल के संरक्षण और प्रबंधन की जिम्मेदारी निभा रही हैं। इससे जंगल बचाने के साथ ग्रामीणों की आजीविका भी मजबूत हो रही है।मिथुन क्या है और अरुणाचल के जंगलों में इसे लेकर तनाव क्यों बढ़ रहा है?
ढोल मिथुनों का शिकार करने लगे हैं क्योंकि उनके आम शिकारों को इंसानों ने खत्म कर दिया है। इन हमलों में मिथुन खोने वाले किसान परेशान हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से इन्हीं पर निर्भर है।