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जून 2026 एफसीआरए संशोधन: नॉन-प्रॉफिट संस्थाओं के लिए इसके क्या मायने हैं?

गृह मंत्रालय ने एफसीआरए नियमों में संशोधन किया है। जानिए क्या सब बदला है और आपकी संस्था कैसे इन नए नियमों का पालन कर सकती है।
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यह लेख मूल रूप से सेंटर फॉर एडवांसमेंट ऑफ फिलैंथ्रॉपी द्वारा अंग्रेज़ी में प्रकाशित किया गया था, जहां आप इसका अगला भाग भी पढ़ सकते हैं।

गृह मंत्रालय ने विदेशी अंशदान (विनियमन) नियम, 2011, यानी एफसीआरए में 22 जून 2026 से प्रभावी संशोधन किया है। एफसीआरए के तहत पंजीकृत संस्थाओं, पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाली संस्थाओं, या विदेशी अंशदान प्राप्त करने के लिए पूर्व अनुमति रखने वाली संस्थाओं को अब कई नई जानकारियां और विवरण प्रस्तुत करने होंगे। इसके साथ ही उन्हें कुछ नए और अधिक कड़े नियमों एवं विनियमों का पालन करना होगा।

इस अधिसूचना को इस लिंक पर जाकर पढ़ा या डाउनलोड किया जा सकता है। यह पृष्ठ 17 तक हिंदी में उपलब्ध है। पृष्ठ 17 के अंत से लेकर पृष्ठ 27 तक इसका अंग्रेज़ी संस्करण दिया गया है।

प्रमुख बदलाव

‘प्रमुख पदाधिकारियों’ की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है।

नियम 2(1) के तहत एक नया उपखंड जोड़ा गया है, जिसके माध्यम से ‘प्रमुख पदाधिकारी’ की परिभाषा का विस्तार किया गया है। अब इसमें निम्नलिखित शामिल होंगे:

  • किसी कंपनी के निदेशक;
  • किसी फर्म के साझेदार;
  • किसी ट्रस्ट के न्यासी;
  • हिंदू अविभाजित परिवार का कर्ता;
  • किसी सोसायटी, ट्रस्ट, ट्रेड यूनियन या व्यक्तियों के संघ के पदाधिकारी, शासी निकाय, प्रबंधन समिति या अन्य नियंत्रणकारी प्राधिकरण के सदस्य; तथा
  • ऐसा कोई अन्य अधिकारी या व्यक्ति, चाहे उसे किसी भी नाम से जाना जाता हो, जिसके पास उस संस्था के प्रबंधन, कार्यकलापों या मामलों पर नियंत्रण हो या जो उनके संचालन के लिए ज़िम्मेदार हो।

किसी सोसायटी के संदर्भ में “अन्य नियंत्रणकारी प्राधिकरण” को शामिल किए जाने के व्यापक प्रभाव हो सकते हैं। सोसायटी के मामले में इसकी व्याख्या सामान्य निकाय (जनरल बॉडी) के उन सभी सदस्यों तक विस्तारित हो सकती है, जिन्हें मतदान का अधिकार प्राप्त है। इसी प्रकार, कंपनी अधिनियम की धारा 8 के तहत लाइसेंस प्राप्त गैर-लाभकारी कंपनियों के मामले में, इसमें मतदान अधिकार रखने वाले ‘शेयरधारक’ या सदस्य भी शामिल माने जा सकते हैं। साथ ही, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ), मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) और मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) जैसे ‘प्रमुख प्रबंधकीय कार्मिक’ (केएमपी) भी इसके दायरे में आ सकते हैं।

विदेशी नागरिक नहीं बन सकते ‘प्रमुख पदाधिकारी’

ऐसी कोई संस्था, जिसके प्रमुख पदाधिकारियों में भारतीय मूल के व्यक्तियों या प्रवासी भारतीय नागरिकों को छोड़कर अन्य विदेशी नागरिक शामिल हों, सामान्यतः अधिनियम के तहत पंजीकरण या विदेशी अंशदान प्राप्त करने की पूर्व अनुमति पाने के लिए पात्र नहीं मानी जाएगी।

हालांकि, केंद्र सरकार आदेश जारी कर ऐसे मामलों या परिस्थितियों को निर्दिष्ट कर सकती है, जिनमें विदेशी नागरिकों को किसी संस्था का प्रमुख पदाधिकारी बनने की अनुमति दी जा सके। साथ ही, सरकार यह भी निर्धारित कर सकती है कि पंजीकरण या पूर्व अनुमति पर विचार किए जाने के लिए ऐसी संस्थाओं को किन शर्तों का पालन करना होगा।

उद्देश्य और भौगोलिक कार्यक्षेत्र का खुलासा अनिवार्य

एफसीआरए के तहत पंजीकरण के लिए किए जाने वाले प्रत्येक आवेदन में निम्नलिखित जानकारियां देना अनिवार्य होगा:

  • वह एक उद्देश्य या कई उद्देश्य, जिनके लिए पंजीकरण मांगा जा रहा है। इनका चयन केवल नियमों के साथ संलग्न अनुसूची में निर्दिष्ट उद्देश्यों की सूची में से ही किया जा सकेगा; तथा
  • वे राज्य या केंद्रशासित प्रदेश, जहां संस्था अपनी गतिविधियां संचालित करने का प्रस्ताव रखती है।

इसके अलावा, विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन नियम, 2026 के लागू होने से पहले पंजीकृत प्रत्येक संस्था को नियमों के लागू होने की तिथि से एक वर्ष के भीतर, केंद्र सरकार को फॉर्म FC-6F में सूचना प्रस्तुत करनी होगी। इस सूचना में उन उद्देश्यों तथा राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों का उल्लेख करना होगा, जिनके लिए वह अपना पंजीकरण जारी रखना चाहती है।

पंजीकरण के लिए उद्देश्यों को पांच व्यापक श्रेणियों में विभाजित किया गया है: धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, शैक्षिक और सामाजिक। इन प्रत्येक श्रेणियों के अंतर्गत अनुसूची में विशिष्ट गतिविधियों की सूची दी गई है, जिनमें से संस्थाओं को अपने कार्यक्षेत्र के अनुरूप चयन करना होगा। धार्मिक श्रेणी के अंतर्गत 16 गतिविधियां, सांस्कृतिक के अंतर्गत 18, आर्थिक के अंतर्गत 19, शैक्षिक के अंतर्गत 22 और सामाजिक श्रेणी के अंतर्गत 30 गतिविधियां सूचीबद्ध की गई हैं।

उद्देश्य या भौगोलिक कार्यक्षेत्र में बदलाव

एफसीआरए के तहत पंजीकृत कोई संस्था यदि अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र में उल्लिखित उद्देश्यों या राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में किसी नए उद्देश्य या क्षेत्र को शामिल करना, अथवा किसी मौजूदा उद्देश्य या क्षेत्र को हटाना चाहती है, तो उसे इसके लिए फॉर्म FC-6F में आवेदन करना होगा। आवेदन के साथ निम्नलिखित दस्तावेज और शुल्क जमा करना अनिवार्य होगा:

(क) आवेदन को अनुमोदित करने वाला शासी निकाय का प्रस्ताव; तथा

(ख) निर्धारित शुल्क

केंद्र सरकार आवश्यक समझी जाने वाली जांच या पड़ताल के बाद ऐसे आवेदन को स्वीकृत या अस्वीकृत कर सकती है।

संचालन के लिए शुल्क

एक राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में काम करने तथा केवल एक उद्देश्य के लिए पंजीकरण प्राप्त करने पर निर्धारित शुल्क देय होगा। यदि आवेदन एक से अधिक राज्यों या केंद्रशासित प्रदेशों से संबंधित है, तो प्रत्येक अतिरिक्त राज्य या केंद्रशासित प्रदेश के लिए 300 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इसी प्रकार, यदि आवेदन एक से अधिक उद्देश्यों से संबंधित है, तो प्रत्येक अतिरिक्त उद्देश्य के लिए 300 रुपये का अतिरिक्त शुल्क देय होगा।

विदेशी अंशदान का उपयोग केवल भारत में और निर्धारित उद्देश्यों के लिए

विदेशी अंशदान का उपयोग केवल भारत में संचालित गतिविधियों के लिए किया जा सकेगा। साथ ही, इसका उपयोग संस्था के घोषित उद्देश्यों तथा उन प्रयोजनों के अनुरूप ही किया जाना होगा, जिनके लिए यह अंशदान प्राप्त किया गया है।

एक ट्रैफिक लाइट_एफसीआरए
एफसीआरए के तहत पंजीकृत संस्थाओं या पंजीकरण के नवीनीकरण के लिए आवेदन करने वाली संस्थाओं को अब कई नई जानकारियां और ब्योरे प्रस्तुत करने होंगे। | चित्र साभार: पेक्सल्स

अगली किश्तें प्राप्त करने के लिए नया फॉर्म

जिन संस्थाओं को पूर्व अनुमति के तहत किसी विशिष्ट डोनर से विदेशी अंशदान की एक निर्धारित राशि प्राप्त करने की अनुमति दी गई है, उन्हें दूसरी या उसके बाद की किसी भी किश्त को प्राप्त करने के लिए नए फॉर्म FC-3BB में आवेदन करना होगा।

ऐसी अगली किश्त तभी जारी की जाएगी, जब संस्था पिछली किश्त में प्राप्त विदेशी अंशदान का कम-से-कम 75 प्रतिशत उपयोग कर चुकी हो। इसके अतिरिक्त, इस उपयोग की पुष्टि के लिए क्षेत्रीय जांच भी की जाएगी।

‘उचित गतिविधि’ की परिभाषा निर्धारित

किसी संस्था को उसके चुने हुए कार्यक्षेत्र में समाज के हित के लिए ‘उचित गतिविधि’ करने वाला तभी माना जाएगा, जब उसने पिछले दो वित्तीय वर्षों के दौरान इस उद्देश्य के लिए कम-से-कम 10 लाख रुपये की विदेशी अंशदान राशि का उपयोग किया हो।

‘उचित गतिविधि’ से आशय केवल उन गतिविधियों से होगा, जो एफसीआरए के तहत प्राप्त विदेशी अंशदान से संचालित की गई हों या जिनके लिए विदेशी अंशदान का उपयोग किया गया हो। दूसरे शब्दों में, भले ही कोई संस्था स्थानीय स्रोतों से प्राप्त धन के माध्यम से सक्रिय रूप से काम कर रही हो, लेकिन गृह मंत्रालय का ध्यान केवल इस बात पर होगा कि संस्था ने पिछले दो वित्तीय वर्षों में प्राप्त विदेशी अंशदान में से कम-से-कम 10 लाख रुपये अपनी गतिविधियों पर खर्च किए हैं या नहीं। ऐसा न करने की स्थिति में संस्था का एफसीआरए पंजीकरण रद्द किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त, संस्था को एक “विस्तृत गतिविधि रिपोर्ट” भी जमा करनी होगी।

अतिरिक्त खुलासे (सोशल मीडिया खातों सहित)

एफसीआरए के तहत पंजीकरण के लिए किए जाने वाले ऑनलाइन आवेदन में अब संस्था के सोशल मीडिया खातों का विवरण देना अनिवार्य होगा।

इसी प्रकार, फॉर्म FC-4 में दाखिल की जाने वाली वार्षिक रिटर्न में भी पहले की तुलना में अधिक विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसमें संस्था की वेबसाइट और सोशल मीडिया हैंडल, विस्तृत गतिविधि रिपोर्ट, चार्टर्ड अकाउंटेंट के प्रमाणपत्र पर यूडीआईएन (UDIN), तथा साल के दौरान संस्था और उसके सभी प्रमुख पदाधिकारियों द्वारा प्रकाशित पुस्तकों, लेखों, ब्लॉगों और सोशल मीडिया पोस्टों का विवरण शामिल होगा।

यदि विदेशी अंशदान किसी मध्यस्थ या एग्रीगेटर संस्था (उदाहरण: अमेरिका में पंजीकृत कोई 501(c) संगठन) के माध्यम से प्राप्त होता है, तो ऐसे मध्यस्थ के जरिए योगदान देने वाले प्रत्येक डोनर का नाम और अन्य आवश्यक विवरण भी अनिवार्य रूप से उजागर करना होगा।

क्या प्रकाशित किया जा सकता है?

एफसीआरए के तहत पंजीकृत कोई संस्था अपनी कार्यक्रम संबंधी या प्रभाव आकलन रिपोर्टें, शोध अध्ययन, जन-जागरूकता सामग्री तथा फंडरेज़िंग से संबंधित सामग्री प्रकाशित कर सकती है। हालांकि, राजनीतिक टिप्पणियां, समसामयिक घटनाओं की रिपोर्टिंग, या ऐसी कोई भी सामग्री जो ‘समाचार’ की श्रेणी में आती हो, उसे प्रकाशित करने से सख्ती से बचना चाहिए।

अधिक जानें:

  • जानिए, एफसीआरए क्या है और यह समाजसेवी संस्थाओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
  • जानिए, एफसीआरए के चलते बेरोजगार हुए लोगों के सामने क्या संकट है?

लेखक के बारे में

  • नोशिर सेंटर फॉर एडवांसमेंट ऑफ फिलैंथ्रॉपी (सीएपी) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) हैं और गैर-लाभकारी संस्थाओं के लिए कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) तथा कानूनी अनुपालन के क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञों में से एक हैं। तीन दशकों के अनुभव के आधार पर, सीएपी में उनकी मुख्य भूमिका लगातार बदलते कानूनों और नियमों के जटिल ताने-बाने को सरल और समझने योग्य बनाना है। वह कई संदर्भ पुस्तकों के लेखक हैं और भारत तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर की अनेक संस्थाओं के निदेशक मंडलों में सदस्य के रूप में कार्यरत हैं। इनमें इंटरनेशनल सेंटर फॉर नॉट-फॉर-प्रॉफिट लॉ (आईसीएनएल) और बॉम्बे कम्युनिटी पब्लिक ट्रस्ट (बीसीपीटी) शामिल हैं।
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