संस्थागत विकास
बदलाव की योजना: थ्योरी ऑफ चेंज कैसे काम करती है?
थ्योरी ऑफ चेंज एक तरह का रोडमैप है। यह बताता है कि हम आज कौन सी समस्या देख रहे हैं, उसे कैसे हल किया जा सकता है, और हमारे काम का क्या दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है।सरल कोश: आखिर क्या होता है इंडिकेटर, जिससे आप अक्सर जूझते हैं!
इंडिकेटर का इस्तेमाल मुख्य रूप से योजना बनाने, मॉनिटरिंग करने और रिपोर्टिंग में किया जाता है। यह संस्थाओं को यह समझने में मदद करता है कि उनका काम सही दिशा में जा रहा है या नहीं, और उसका वास्तविक असर क्या है।ज़मीनी संस्थाएं अपनी हायरिंग प्रक्रिया को कैसे बेहतर बना सकती हैं?
अक्सर जमीनी और गैर-लाभकारी संगठनों के लिए सही लोगों का चयन करना चुनौतीपूर्ण होता है। यह लेख विभिन्न संस्थाओं के अनुभवों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया और बेहतर टीम निर्माण से जुड़ी अहम सीख साझा करता है।संवेदनशील विषयों पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को किस तरह के सहयोग की दरकार है?
संवेदनशील विषयों पर काम करने वाली संस्थाओं से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत, पेशेवर और मानसिक स्तरों पर सहयोग और प्रशिक्षण की जरूरत होती है, इनकी पहचान और समाधान से जुड़े कुछ सुझाव।छोटी संस्थाओं की बड़ी जरूरत: क्यों अहम हैं सरल डिजिटल टूल?
जब संस्थाएं अपनी जरूरतें समझने का प्रयास करती हैं, तो उनके लिए डिजिटल टूल अपनाने की प्रक्रिया अपने आप सहज हो जाती है।जमीनी संस्थाएं सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे करें?
जमीनी संस्थाएं सोशल मीडिया के इस्तेमाल से अपने काम की पहुंच व्यापक बना सकती हैं।संस्थाओं के लिए फंडरेजिंग के कुछ कारगर उपाय
वित्तीय संकट के दौर में संस्थाओं के लिए फंडरेजिंग के विविध माध्यम तलाशना जरूरी है।सरकार के साथ जुड़ने के कुछ कारगर उपाय – भाग 2
वीडियो के इस भाग में हम बात कर रहे हैं, अगले कदम की— यानी, अधिकारियों से प्रभावी संवाद और बेहतर संबंध कैसे स्थापित करें।सरकार के साथ जुड़ने के कुछ कारगर उपाय – भाग 1
सरकार से जुड़ने से पहले संस्थाओं को न केवल यह मालूम होना चाहिए कि उन्हें कहां और किस स्तर पर जुड़ना है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इससे सरकार को क्या लाभ होगा।सरकार का बजट, संस्थाओं की कैसे मदद कर सकता है?
सरकार का बजट, संस्थाओं के लिए न केवल उसकी नीतियों को जानने का माध्यम है, बल्कि इससे उन्हें अपने कार्यक्रमों की प्लानिंग करने में भी मदद मिल सकती है।समाजसेवी संस्थाओं को सरकार के साथ जुड़कर काम क्यों करना चाहिए?
सरकार के साथ जुड़कर काम करने की चाह रखने वाली, समाजसेवी संस्थाओं के लिए पहले सरकार की विशेषता को भी अच्छे से समझना जरूरी है।जन-संगठन आर्थिक आत्मनिर्भरता कैसे हासिल कर सकते हैं?
जमीनी संगठनों के लिए समुदाय से रिश्ता बनाए रखना सबसे अधिक जरूरी है क्योंकि समुदाय, यदि संगठन की अहमियत समझेगा तो वह उसकी आर्थिक जरूरतों का भी खयाल रखेगा।