संस्थागत विकास
सरल कोश: हैमलेट क्या होता है और इसे समझना क्यों ज़रूरी है?
हैमलेट की पहचान और उसकी स्थिति को समझना संस्थाओं के लिए इसलिए उपयोगी हो सकता है क्योंकि इससे किसी इलाके में सेवाओं, सुविधाओं और संसाधनों की पहुंच का अधिक बारीकी से आकलन किया जा सकता है।फंडर की भाषा समझना चाहते हैं? इन 10 शब्दों से शुरुआत करें
फंडर द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली शब्दावली कई बार ऐसी होती है, जिसे समझने के लिए सिर्फ अंग्रेज़ी जानना ही काफी नहीं होता। इन शब्दों का सही अर्थ और अलग-अलग संदर्भों में इनका इस्तेमाल समझना भी ज़रूरी होता है।बिना बड़े बजट के, बड़े संवाद की शुरुआत कैसे करें?
बड़े बजट और तय एजेंडे के बिना भी ऐसा संवाद संभव है, जिसमें हर आवाज़ को बराबर जगह मिले। जानिए, ज़मीनी संगठन कैसे अनकॉन्फ़्रेंस के ज़रिए ऐसा मंच बना सकते हैं।ज़मीनी संस्थाएं फंडर से कैपेसिटी बिल्डिंग और संस्थागत विकास पर बातचीत कैसे करें?
क्षमता निर्माण और संगठनात्मक विकास को अक्सर परियोजनाओं से अलग ज़रूरत माना जाता है, जबकि यही किसी संस्था के दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव की बुनियाद हैं। दानदाताओं के साथ संवाद और नेगोशिएशन की रणनीति इस सोच को बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है।सरल कोश: बेसलाइन सर्वे क्या होता है और यह क्यों ज़रूरी है?
जब कोई संस्था किसी नए कार्यक्रम या पहल की शुरुआत करती है, तो ‘बेसलाइन सर्वे’ शब्द अक्सर उसकी शुरुआती तैयारियों में सुनने को मिलता है।सामाजिक संस्थाओं में कम्युनिकेशन को ‘जुगाड़’ नहीं, व्यवस्था की ज़रूरत है
गैर-लाभकारी संस्थाएं अक्सर कम्युनिकेशन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान अधिक लोगों की नियुक्ति करने या एकबारगी कार्यशालाओं में निवेश करने में तलाशती हैं।बदलाव की योजना: थ्योरी ऑफ चेंज कैसे काम करती है?
थ्योरी ऑफ चेंज एक तरह का रोडमैप है। यह बताता है कि हम आज कौन सी समस्या देख रहे हैं, उसे कैसे हल किया जा सकता है, और हमारे काम का क्या दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है।सरल कोश: आखिर क्या होता है इंडिकेटर, जिससे आप अक्सर जूझते हैं!
इंडिकेटर का इस्तेमाल मुख्य रूप से योजना बनाने, मॉनिटरिंग करने और रिपोर्टिंग में किया जाता है। यह संस्थाओं को यह समझने में मदद करता है कि उनका काम सही दिशा में जा रहा है या नहीं, और उसका वास्तविक असर क्या है।ज़मीनी संस्थाएं अपनी हायरिंग प्रक्रिया को कैसे बेहतर बना सकती हैं?
अक्सर जमीनी और गैर-लाभकारी संगठनों के लिए सही लोगों का चयन करना चुनौतीपूर्ण होता है। यह लेख विभिन्न संस्थाओं के अनुभवों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया और बेहतर टीम निर्माण से जुड़ी अहम सीख साझा करता है।संवेदनशील विषयों पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को किस तरह के सहयोग की दरकार है?
संवेदनशील विषयों पर काम करने वाली संस्थाओं से जुड़े जमीनी कार्यकर्ताओं को व्यक्तिगत, पेशेवर और मानसिक स्तरों पर सहयोग और प्रशिक्षण की जरूरत होती है, इनकी पहचान और समाधान से जुड़े कुछ सुझाव।छोटी संस्थाओं की बड़ी जरूरत: क्यों अहम हैं सरल डिजिटल टूल?
जब संस्थाएं अपनी जरूरतें समझने का प्रयास करती हैं, तो उनके लिए डिजिटल टूल अपनाने की प्रक्रिया अपने आप सहज हो जाती है।जमीनी संस्थाएं सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे करें?
जमीनी संस्थाएं सोशल मीडिया के इस्तेमाल से अपने काम की पहुंच व्यापक बना सकती हैं।