ईकोसिस्टम डेवलपमेंट
देश के सामाजिक सेक्टर और नागरिक संगठनों पर तार्किक और गहन विश्लेषण जिसमें यह शामिल होता है कि क्या कारगर रहा है, क्या नहीं और किस तरह के बदलावों को जरूरत है।
एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 का संस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
प्रस्तावित संशोधनों के तहत गैर-लाभकारी संगठनों के ऊपर यह संकट बना रहेगा कि यदि उनका एफसीआरए पंजीकरण समाप्त हो जाता है या रद्द कर दिया जाता है, तो विदेशी फंड से तैयार संपत्तियों पर उनका नियंत्रण खत्म हो सकता हैसरल कोश: आखिर क्या होता है इंडिकेटर, जिससे आप अक्सर जूझते हैं!
इंडिकेटर का इस्तेमाल मुख्य रूप से योजना बनाने, मॉनिटरिंग करने और रिपोर्टिंग में किया जाता है। यह संस्थाओं को यह समझने में मदद करता है कि उनका काम सही दिशा में जा रहा है या नहीं, और उसका वास्तविक असर क्या है।हम आदिवासियों के स्वास्थ्य की जड़ें जंगल में हैं
कर्नाटक के आदिवासियों के लिए स्वास्थ्य और जीवनयापन के मुद्दे, जंगलों से उनके गहरे रिश्ते और विस्थापन के इतिहास में निहित हैं। इसलिए स्वास्थ्य का सवाल केवल दवाओं या अस्पतालों से नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों, परंपराओं और गरिमा से भी जुड़ा हुआ है।सोशल सेक्टर कॉन्फ्रेंस: समान मंच की असमान सच्चाई
भारत में विकास सेक्टर के सम्मेलन अक्सर भाषा, विविधता और समावेशन की कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं। क्या यह सच में एक समान मंच हैं?बेहतरी के लिए सीखना: लर्निंग और डेवलपमेंट के आयाम
विकास सेक्टर में लर्निंग और डेवलपमेंट की क्या उपयोगिता है और इसकी वर्तमान स्थिति को बेहतर बनाने के लिए कौन से कदम उठाये जा सकते हैं।फोटो निबंध: ग्रामीण कचरा प्रबंधन के मिथक
कचरे की समस्या को एक शहरी चुनौती की तरह देखा जाता है लेकिन असल में यह आंकड़ों की अनुपलब्धता है जो गांवों की सही तस्वीर को सामने आने से रोकती है।फोटो निबंध: समय के साथ बहे जलाशय, अब संवारने की बारी
बुंदेलखंड में गणतंत्र दिवस की थीम ‘स्वर्णिम भारत: विरासत और विकास’ को सदियों पुराने पारंपरिक जलाशयों के पुनरोद्धार के माध्यम से साकार किया जा रहा है।प्रवासी श्रमिकों के सुरक्षित भविष्य की राह एक सुविचारित नीति से ही निकलेगी
कोविड महामारी के दौरान ही पता चल गया था कि प्रवासी श्रमिकों के मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए नीतियां, प्रक्रियाएं और प्रणालियां तत्काल तय किए जाने की ज़रूरत है।फाइटोप्लैंक्टन क्या हैं और हमें इन पर क्यों बात करनी चाहिए?
धरती पर ऑक्सीजन-कार्बन डाइआक्साइड का संतुलन बनाए रखने के लिए ज़िम्मेदार फाइटोप्लैंक्टन की संख्या दिनों-दिन घटती जा रही है, अगर ऐसा ही रहा तो हमारा भविष्य कैसा दिखेगा?भारत में जनसंख्या वृद्धि से जुड़े मिथकों से मुक़ाबला कैसे करें?
हाल ही में भारत दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बन गया। इसने एक व्यापक और गलत धारणा को जन्म दिया है कि भारत की आबादी, संसाधनों की कमी से लेकर जलवायु परिवर्तन जैसे गंभीर वैश्विक मुद्दों की जड़ है।ज़मीनी ज्ञान क्या है और इसका संरक्षण क्यों ज़रूरी है?
ज़मीनी ज्ञान जहां समुदाय को आजीविका और विकास के स्थायी साधन देता है, वहीं अकादमिक ज्ञान से जोड़े जाने पर पर्यावरण और तकनीक से जुड़ी कई बड़ी समस्याओं के हल भी दे सकता है।चूल्हे से एलपीजी तक: एक ज़मीनी कार्यकर्ता जो इस सफ़र को आसान बनाती है
दिल्ली की एक फील्डवर्कर का एक दिन जो भलस्वा कॉलोनी में रहने वाले समुदायों को प्रदूषण से बचने और स्वच्छ ईंधन अपनाने के लिए प्रेरित करती है।