‘जब सड़कें सूनी हों, तो संसद आवारा हो जाती है’
आंदोलन सिर्फ विरोध नहीं, लोकतंत्र में अपने हक़ की लड़ाई लड़ने, दबाई गई आवाज़ों को बुलंद करने, सत्ता से जवाब मांगने और समाज को बदलने की ताकत हैं।9 मिनट
‘जब सड़कें सूनी हों, तो संसद आवारा हो जाती है’
आंदोलन सिर्फ विरोध नहीं, लोकतंत्र में अपने हक़ की लड़ाई लड़ने, दबाई गई आवाज़ों को बुलंद करने, सत्ता से जवाब मांगने और समाज को बदलने की ताकत हैं।
































































