जंगल के बीच मिथुन जानवर_मिथुन

मिथुन क्या है और अरुणाचल के जंगलों में इसे लेकर तनाव क्यों बढ़ रहा है?
ढोल मिथुनों का शिकार करने लगे हैं क्योंकि उनके आम शिकारों को इंसानों ने खत्म कर दिया है। इन हमलों में मिथुन खोने वाले किसान परेशान हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से इन्हीं पर निर्भर है।
कचरा बीनने का काम करता सफाई कर्मचारी_जातिवाद

जातिवाद और कच्ची नौकरियों से जूझते भारत के सफाई कर्मचारी
शहरी भारत में स्वच्छता सेवाओं के निजीकरण के साथ जातिवाद की जड़ें, मजदूरी में कटौती, और दलित कामगारों पर सामाजिक संकट गहराते जा रहे हैं।
एक फ्लाइओवर को दर्शाता हुआ प्रतिनिधि चित्र_ऑफिस रिट्रीट

फोर-लेन रिट्रीट की सिंगल-लेन रिएलिटी
सोशल सेक्टर रिट्रीट का हाल किसी मल्टी-लेन हाईवे जैसा नजर आता है—कागज़ पर कई रास्ते, जमीन पर एक!
जूही मिश्रा, पूजा राठी | 3 मिनट लंबा लेख
पांच सौ रुपए के नोट और कुछ सिक्के_बजट 2026

रोजगार के सवाल पर 2026 का बजट क्या कहता है?
बजट 2026 के रोजगार दावे मनरेगा, मजदूरी और सरकारी योजनाओं की जमीनी सच्चाइयों से मेल खाते नहीं दिखते। असंगठित श्रमिकों के हालात दर्शाते हैं कि कौशल विकास के बावजूद स्थायी रोजगार अब भी एक दूर का लक्ष्य है।
नेसार अहमद | 13 मिनट लंबा लेख

ज़मीनी कहानियां


मेरा एक दिन


घर में सीढ़ियों के पास एक व्यक्ति_इंडियन साइन लैंग्वेज
बराबरी की राह देखता बधिर समुदाय
यह​​​​ अधिकारों के लिए सक्रिय युवा कार्यकर्ता परमीत के जीवन, उनके काम और उनसे जुड़ी चुनौतियों की झलक प्रस्तुत करता है।
रिकॉर्डिंग स्टूडियो में माइक पर कागज से पढ़कर बोलती एक प्रौढ़ महिला_सामुदायिक रेडियो
स्टूडियो और गांव के बीच: एक सामुदायिक आरजे का दिन
इस वीडियो में दिखेगा कि कैसे एक सामुदायिक आरजे स्क्रिप्ट, रिकॉर्डिंग और गांव के बीच अपने दिन को बांटती हैं। यह कहानी सामुदायिक रेडियो कार्यकर्ता के काम को समझने की कोशिश है।
जंगल में लगी आग को बुझाती_महिला वन रक्षक
संवाद से संरक्षण तक: एक महिला वन रक्षक का सहभागी अनुभव
उदयपुर, राजस्थान की एक महिला फॉरेस्ट गार्ड वन संरक्षण और ग्रामीण महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम कर रही हैं, उनके संघर्ष और अनुभवों के बारे में यहां पढ़िए।