सेक्टर से
क्या दिल्ली के गांवों का शहर पर हक़ नहीं है?
जून 2025 में दिल्ली के नारायणा गांव में एक जनसुनवाई हुई। इसने दशकों की सरकारी उपेक्षा के साथ-साथ स्थानीय समुदाय के उभरते प्रतिरोध को भी सामने रखा।डेटा से नहीं, लोगों से सीखना
भारत के ट्रकिंग समुदाय के साथ काम करते हुए हमने जाना कि फील्ड में समय बिताना, भरोसा बनाना और उन समुदायों को समझना कितना अहम है, जो अक्सर औपचारिक आंकड़ों से बाहर रह जाते हैं।बदलते मॉनसून के दौर में बारिश की एक-एक बूंद सहेजना जरूरी
जलवायु परिवर्तन, अल नीनो और बदलते मॉनसून के बीच भारत में चरम मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे समय में बारिश की हर बूंद का संरक्षण ही जल और खाद्य सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।क्या वीबी-जी राम जी महिलाओं को नरेगा जैसे मौके दे पायेगा?
दक्षिणी राजस्थान की महिलाओं के लिए नरेगा सिर्फ़ रोज़गार नहीं, बल्कि सशक्तिकरण का माध्यम रहा है। अब वीबी–जी राम जी को लेकर उनका सवाल है कि क्या ये उन्हें नरेगा जैसे अवसर दे पाएगा?वेस्ट एशिया का युद्ध और भारत की कृषि: खाद, ईंधन और खाद्य सुरक्षा की जंग
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर केवल वैश्विक राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की खेती, खाद की उपलब्धता, ऊर्जा लागत और खाद्य सुरक्षा को भी यह प्रभावित कर रहा है।साझा संसाधनों के लिए क्यों ज़रूरी है सामुदायिक डेटा?
समुदायों का कॉमंस से पुराना रिश्ता है, जिसमें उनकी मौखिक परंपराएं, अनुभव और ज्ञान शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या डेटा प्रणालियां इस रिश्ते को अहमियत देने के लिए तैयार हैं?पेंच टाइगर रिज़र्व: फसलों और जानवरों के बीच रोशनी का पहरा
पेंच टाइगर रिज़र्व से सटे छह गांवों में सोलर लाइटें कुछ किसानों के लिए एक नयी उम्मीद बनकर आयी हैं। लेकिन अभी भी कई घर ऐसे हैं, जो बदलाव की बाट जोह रहे हैं।