
सुनील कुमार
सुनील कुमार गाज़ियाबाद स्थित एक स्वतंत्र सांस्कृतिक पत्रकार, कला शोधकर्ता और कला फिल्म निर्माता हैं। मुख्यधारा की मीडिया व्यवस्था का हिस्सा रहते हुए उन्होंने यह अनुभव किया कि कला लेखन और कला कार्यक्रमों के निर्माण के लिए उपलब्ध स्थान लगातार सिमटता जा रहा है। इसके बावजूद उन्होंने कला और उससे जुड़े मुद्दों को सामने लाने के लिए नए विकल्प तलाशने के अपने प्रयास कभी नहीं छोड़े। करीब 14 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव के साथ वह बिहार की विभिन्न मूर्त और अमूर्त लोककलाओं के ऑडियो-विज़ुअल और फोटो डॉक्यूमेंटेशन से जुड़े हुए हैं। उनके कार्यक्षेत्र में जीवित लोककला दिग्गजों के अभिलेखीय साक्षात्कार और कला परंपराओं से जुड़ी मौखिक इतिहास सामग्री का दस्तावेजीकरण भी शामिल है। दृश्य कला पर अपने लेखन के लिए उन्हें वर्ष 2017 में दिनकर पुरस्कार (बिहार कला सम्मान) से सम्मानित किया जा चुका है।
सुनील कुमार के लेख
असमानता दलितों के स्वाभिमान का साहित्य है लोकगाथा सलहेस
राजा सलहेस सिर्फ बिहार या किसी एक जाति विशेष की लोकगाथा का नायक नहीं, बल्कि बहुजन समाज के साझा नायक हैं। सलहेस की लोकगाथा प्रेम, संवेदना, विद्रोह और सामाजिक न्याय की अनूठी अभिव्यक्ति है।
