असमानता
साइबर अपराध और महिलाएं: अधूरे आंकड़े, अधूरे वादे
महिलाओं की साइबर सुरक्षा पर संसद की रिपोर्ट एक बड़ा सवाल उठाती है—कौन साइबर दुर्व्यवहार की शिकायत दर्ज करा पाता है और कौन आंकड़ों से बाहर रह जाता है?क्या छात्रों के अनुभव छात्रवृत्ति की नीतियां बदल सकते हैं?
देश का स्कॉलरशिप सिस्टम वंचित छात्रों की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है। ऐसे में समुदाय-आधारित मॉडल उनके लिए सहयोग की एक नई राह दिखा सकते हैं।क्या मेघालय के स्वास्थ्य आंकड़े पूरी सच्चाई बताते हैं?
मेघालय को ऐसे स्वास्थ्य आंकड़ों की ज़रूरत है, जो उसकी जातीय और भौगोलिक विविधता को सही तरह से दिखाएं। अच्छे डैशबोर्ड समाधान का सिर्फ़ आधा हिस्सा हैं।महिलाओं के काम का हिसाब आख़िर कब होगा?
वर्ल्ड इनइक्वेलिटी रिपोर्ट 2026 बताती है कि महिलाओं के साथ आर्थिक ग़ैर-बराबरी सिर्फ़ वेतन तक सीमित नहीं है। यह उनके काम, आय, संपत्ति और अवसर, हर स्तर पर नज़र आती है।विकलांगता पर काम करने वाली संस्थाओं को फंडिंग क्यों नहीं मिलती?
भारत में सीएसआर फंडिंग का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा विकलांगता क्षेत्र तक पहुंचता है। एक नयी रिपोर्ट बता रही कि है कि इस स्थिति को कैसे बदला जा सकता है।दलितों के स्वाभिमान का साहित्य है लोकगाथा सलहेस
राजा सलहेस सिर्फ बिहार या किसी एक जाति विशेष की लोकगाथा का नायक नहीं, बल्कि बहुजन समाज के साझा नायक हैं। सलहेस की लोकगाथा प्रेम, संवेदना, विद्रोह और सामाजिक न्याय की अनूठी अभिव्यक्ति है।वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2026: भारत के सोशल सेक्टर के लिए क्या हैं इसके मायने?
वैश्विक जोखिम दूर लगते हैं, पर उनका असर गांवों, कस्बों और शहरों में स्पष्ट दिखता है। महंगाई, बाढ़, गर्मी, गलत सूचना, बेरोज़गारी और सामाजिक तनाव अब भारतीय सामाजिक क्षेत्र की रोज़मर्रा की हकीकत हैं। यही इस रिपोर्ट की प्रमुख प्रासंगिकता है।अमर्त्य सेन के विचारों को साकार करते देश के पांच संगठन
स्वच्छता से आजीविका तक, पांच गैर-लाभकारी संगठन अमर्त्य सेन के विकास से जुड़े विचारों को दर्शाते हैं—स्वतंत्रता, आकांक्षा, मूलभूत सेवाओं तक पहुंच और लोकतांत्रिक भागीदारी।अंबेडकरवादी गायकों का संघर्ष और नई पहचान
अंबेडकरवादी आंदोलन से जुड़े युवा दलित गायकों का संघर्ष, उनकी आवाज़ और मुख्यधारा द्वारा की जा रही अनदेखी- एक कहानी संगीत, पहचान और समानता की लड़ाई की।ट्रांसजेंडर संशोधन विधेयक को क्यों निरस्त किया जाना चाहिए
एलजीबीटीक्यूआईए+ कलेक्टिव द्वारा जारी बयान में 2026 के ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) संशोधन विधेयक की आलोचना की गई है। इस आलोचना में साक्ष्यों की कमी, अपर्याप्त परामर्श, और हाशिए के समुदायों का बहिष्कार जैसे कई कारण शामिल हैं।