सरकार और समर्थन
जून 2026 एफसीआरए संशोधन: नॉन-प्रॉफिट संस्थाओं के लिए इसके क्या मायने हैं?
गृह मंत्रालय ने एफसीआरए नियमों में संशोधन किया है। जानिए क्या सब बदला है और आपकी संस्था कैसे इन नए नियमों का पालन कर सकती है।एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 का संस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
प्रस्तावित संशोधनों के तहत गैर-लाभकारी संगठनों के ऊपर यह संकट बना रहेगा कि यदि उनका एफसीआरए पंजीकरण समाप्त हो जाता है या रद्द कर दिया जाता है, तो विदेशी फंड से तैयार संपत्तियों पर उनका नियंत्रण खत्म हो सकता हैआंगनवाड़ी: शिक्षा की नींव या सिर्फ पोषण का केंद्र?
आंगनवाड़ी शुरुआती बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा की आधारशिला है। लेकिन प्रशासनिक और पोषण संबंधी जिम्मेदारियों के दबाव में कार्यकर्ता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और देखभाल पर पूरा ध्यान नहीं दे पाती हैं।रोजगार के सवाल पर 2026 का बजट क्या कहता है?
बजट 2026 के रोजगार दावे मनरेगा, मजदूरी और सरकारी योजनाओं की जमीनी सच्चाइयों से मेल खाते नहीं दिखते। असंगठित श्रमिकों के हालात दर्शाते हैं कि कौशल विकास के बावजूद स्थायी रोजगार अब भी एक दूर का लक्ष्य है।भारत की पंचायती राज व्यवस्था की स्थिति
पंचायती राज मंत्रालय ने “स्टेटस ऑफ डीवोल्यूशन टू पंचायत्स इन स्टेट्स-एन इंडिकेटिव एविडेंस बेस्ड रैंकिंग” नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट विभिन्न संकेतकों के आधार पर यह आकलन करती है कि राज्यों ने पंचायतों को स्वशासी संस्थाओं के रूप में कार्य करने के लिए कितना सक्षम वातावरण तैयार किया है।सतत एफपीओ का निर्माण: भारत की सहकारी समितियों से सीख
2025 की शुरुआत तक, केंद्र सरकार की योजना के तहत 10,000 किसान उत्पादक संगठनों की स्थापना की जा चुकी थी। लेकिन केवल लक्ष्य पूरा करने की जल्दबाजी एफपीओ की संरचना को कमजोर कर सकती है।तमिलनाडु के उदाहरण से समझिए मातृ मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद की जरूरत क्यों है?
तमिलनाडु में बढ़ती गर्मी और प्रदूषण का नई माताओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, लेकिन इससे जुड़े नीतिगत हस्तक्षेपों के प्रयास अभी नजर नहीं आते हैं।तीरे-तीरे नदिया: हर साल बाढ़ में डूबता भारत
प्राकृतिक असंतुलन और मानवीय हस्तक्षेप ने मिलकर भारत में बाढ़ के जोखिम को लगातार गहरा किया है। यह वार्षिक आपदा अब सामाजिक-आर्थिक क्षति का प्रमुख स्रोत बन चुकी है।पंचायत से परामर्श तक: मानसिक स्वास्थ्य की अहम कड़ी
केरल में एक गैर-लाभकारी संस्था की स्थानीय शासन तंत्र के साथ साझेदारी दिखाती है कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को जनस्वास्थ्य प्रणाली में कैसे शामिल किया जा सकता है।शिक्षक से, शिक्षक के लिए: पीयर लर्निंग से सशक्त होती कक्षाएं
पीयर लर्निंग, एलुमनी नेटवर्क और संस्थागत समर्थन शिक्षकों के प्रशिक्षण को महज एक औपचारिकता से आगे ले जाकर परिवर्तनकारी अनुभव में बदल रहा है।सरकार के साथ जुड़ने के कुछ कारगर उपाय – भाग 2
वीडियो के इस भाग में हम बात कर रहे हैं, अगले कदम की— यानी, अधिकारियों से प्रभावी संवाद और बेहतर संबंध कैसे स्थापित करें।