फंडर
फंडर्स की कहानी, बॉलीवुड की जुबानी
डेटा, स्केल या सस्टेनेबिलिटी? बॉलीवुड गानों से समझिए फंडर्स का नया अंदाज़।फंडर से बातचीत? योगा से होगा!
फंड आए न आए, सांस आती रहेगी!क्या सोशल सेक्टर सवाल पूछने से कतराने लगा है?
जैसे-जैसे गैर-लाभकारी संस्थाओं का प्रभाव बढ़ रहा है, क्या उनकी स्वतंत्र और सवाल उठाने वाली आवाज़ कमज़ोर पड़ती जा रही है?सामाजिक संस्थाओं में कम्युनिकेशन को ‘जुगाड़’ नहीं, व्यवस्था की ज़रूरत है
गैर-लाभकारी संस्थाएं अक्सर कम्युनिकेशन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान अधिक लोगों की नियुक्ति करने या एकबारगी कार्यशालाओं में निवेश करने में तलाशती हैं।सरल कोश: आखिर क्या होता है इंडिकेटर, जिससे आप अक्सर जूझते हैं!
इंडिकेटर का इस्तेमाल मुख्य रूप से योजना बनाने, मॉनिटरिंग करने और रिपोर्टिंग में किया जाता है। यह संस्थाओं को यह समझने में मदद करता है कि उनका काम सही दिशा में जा रहा है या नहीं, और उसका वास्तविक असर क्या है।जिंगल बेल… जिंगल बेल… इज़ द फंडिंग वेल?
इस क्रिसमस एनजीओ ने भी अपनी विश लिस्ट निकाली है! इनके सैंटा कोई और नहीं, बल्कि फंडर्स ही हैं।फंडिंग के पीछे की कहानीः हैलो, हैलो, नमस्ते…
सीएसआर फंडरेजिंग केवल फाइल, रिपोर्ट्स और कॉल नहीं है, यह धैर्य, संवाद और लगातार उम्मीद बनाए रखने की कला है।दिवाली सेल में सामाजिक बदलाव पर स्पेशल डिस्काउंट!
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भाषा और प्रक्रियाओं में सूक्ष्म बदलाव से आप अपनी संस्था की बुनियादी जरूरतों के लिए फंड सुनिश्चित कर सकते हैं।12A और 80G: समय पर नवीनीकरण, सहयोग का भरोसा
हाल ही में हुए संशोधनों के अनुसार, अब हर पांच वर्ष में 12A और 80G पंजीकरणों का नवीनीकरण कराना अनिवार्य है।इम्पैक्ट स्केलिंग: काम का प्रभाव बढ़ाने की एक कुंजी
सरकार के साथ साझेदारी से लेकर मुक्त संसाधन बनाने तक, कई संस्थाओं ने प्रभाव बढ़ाने के नए रास्ते खोजे हैं। एक नई रिपोर्ट उनकी अहम सीख साझा करती है।संस्थाओं के लिए फंडरेजिंग के कुछ कारगर उपाय
वित्तीय संकट के दौर में संस्थाओं के लिए फंडरेजिंग के विविध माध्यम तलाशना जरूरी है।