विकास सेक्टर
बदलाव की योजना: थ्योरी ऑफ चेंज कैसे काम करती है?
थ्योरी ऑफ चेंज एक तरह का रोडमैप है। यह बताता है कि हम आज कौन सी समस्या देख रहे हैं, उसे कैसे हल किया जा सकता है, और हमारे काम का क्या दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है।सिस्टम में बदलाव: हकीकत से ज़्यादा भ्रम
‘सिस्टम्स चेंज’ के प्रति बढ़ता आकर्षण संस्थाओं की प्राथमिकताओं को असंतुलित और ज़मीनी स्तर पर सार्थक प्रयासों को कमज़ोर बना सकता है।गर्मी हर साल पड़ती है… पर इसका हल क्या है?
गर्मी तो हर साल पड़ती है, लेकिन उससे निपटने के हर किसी के अपने-अपने जुगाड़ हैं—कहीं सलाह चल रही है, कहीं स्पीड, और कहीं बस काम।वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2026: भारत के सोशल सेक्टर के लिए क्या हैं इसके मायने?
वैश्विक जोखिम दूर लगते हैं, पर उनका असर गांवों, कस्बों और शहरों में स्पष्ट दिखता है। महंगाई, बाढ़, गर्मी, गलत सूचना, बेरोज़गारी और सामाजिक तनाव अब भारतीय सामाजिक क्षेत्र की रोज़मर्रा की हकीकत हैं। यही इस रिपोर्ट की प्रमुख प्रासंगिकता है।तो इस नौकरी के लिए अप्लाई कौन कर रहा है?
जब जॉब डिस्क्रिप्शन पढ़कर लगे - यह रोल है या पूरी संस्था का ठेका?सरल कोश: आखिर क्या होता है इंडिकेटर, जिससे आप अक्सर जूझते हैं!
इंडिकेटर का इस्तेमाल मुख्य रूप से योजना बनाने, मॉनिटरिंग करने और रिपोर्टिंग में किया जाता है। यह संस्थाओं को यह समझने में मदद करता है कि उनका काम सही दिशा में जा रहा है या नहीं, और उसका वास्तविक असर क्या है।फील्ड में एक बार- ये उत्तर किधर है…कोई इसका उत्तर देगा!
क्या हो जब फील्ड में पहुंचे और दिशा तलाशने के लिए कम्पस की जरूरत पड़ जाएदलित हिस्ट्री मंथः एक महीने की क्रांति, बाकी साल शांति
जब तक फैसले लेने वालों के सरनेम नहीं बदलते, तब तक दलित हिस्ट्री मंथ कैलेंडर की एक औपचारिक तारीख भर है।आया मौसम, अप्रेज़ल का!
तेरा करूं…तेरा करूं दिन-गिन-गिन के इंतजार…हम वैसे नहीं, तो ऐसे कह देते हैं!
सीधे-सीधे बोलना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है… इसलिए हम मुहावरों में कह देते हैं।नमस्कार, आज के मुख्य समाचार!
अगर सोशल सेक्टर की खबरें भी हिंदी के समाचारों की तरह छपती, तो शायद हर न्यूज़ ब्रेकिंग न्यूज़ होती!