ग्रामीण भारत
भारत के गांवों से जुड़े मुद्दों, अनुभवों और पहलों को सामने लाना जहां आजीविका, शिक्षा, स्वास्थ्य और स्थानीय शासन जैसे विषय ग्रामीण समुदायों के जीवन को गहराई से प्रभावित करते हैं।
सरल कोश: हैमलेट क्या होता है और इसे समझना क्यों ज़रूरी है?
हैमलेट की पहचान और उसकी स्थिति को समझना संस्थाओं के लिए इसलिए उपयोगी हो सकता है क्योंकि इससे किसी इलाके में सेवाओं, सुविधाओं और संसाधनों की पहुंच का अधिक बारीकी से आकलन किया जा सकता है।ग्रामीण क्षेत्रों का शहरीकरण: कितना सही-कितना गलत
केंद्रीय वित्त आयोग ने ग्रामीण इलाकों में शहरीकरण को बढ़ावा देने की सिफारिश की है- क्या यह सही है?जंगल के बीच पुस्तकालय चलाने वाले लाइब्रेरियन की कहानी
क़रीब 2,000 कालजयी साहित्यिक रचनाओं वाली इस लाइब्रेरी से ग़रीब मुतुवन आदिवासी नियमित तौर पर किताबें ले जाते हैं, पढ़ते हैं, और वापस कर जाते हैं।आज़ादी के आठ दशक बाद भी वन विभाग के नियंत्रण में क्यों हैं मध्य प्रदेश के वन ग्राम?
वन ग्राम वे बस्तियां हैं जिन्हें वन विभाग ने अपने नियंत्रण वाले वन क्षेत्रों में बसाया या अपने प्रशासनिक ढांचे में शामिल किया। इनमें भूमि, रिकॉर्ड और प्रशासन लंबे समय तक राजस्व विभाग के बजाय वन विभाग के अधीन रहे हैं।क्या मनरेगा की खामियों को भर पाएगा वीबी-जी राम जी?
केरल और ओडिशा के आंकड़े बताते हैं कि मनरेगा एक अधिकार से अधिक प्रशासनिक योजना बन गई है। ऐसे में वीबी-जी राम जी को क्या अलग करना होगा?भारत की पंचायती राज व्यवस्था की स्थिति
पंचायती राज मंत्रालय ने “स्टेटस ऑफ डीवोल्यूशन टू पंचायत्स इन स्टेट्स-एन इंडिकेटिव एविडेंस बेस्ड रैंकिंग” नाम से एक रिपोर्ट जारी की है। यह रिपोर्ट विभिन्न संकेतकों के आधार पर यह आकलन करती है कि राज्यों ने पंचायतों को स्वशासी संस्थाओं के रूप में कार्य करने के लिए कितना सक्षम वातावरण तैयार किया है।ग्राम से गणतंत्र तक: लोकतंत्र की असली यात्रा
गणतंत्र की मौजूदा वास्तविकता से स्पष्ट है कि ग्राम संसाधनों का सरकारीकरण और ग्राम शासन के विकेंद्रीकरण के बीच असंतुलन है।ग्रामीण भारत में पोषण संकट की असल जड़ क्या है?
ग्रामीण भारत में कुपोषण का कारण केवल भोजन की कमी नहीं, बल्कि पारंपरिक भोजन से दूरी भी है।आर्थिक विकास के साथ ग्रामीण मज़दूरों की आय क्यों नहीं बढ़ रही है?
अर्थशास्त्री आश्चर्य जताने लगे हैं कि भारत के अलावा दुनिया में कोई और देश नहीं जहां आर्थिक विकास होने के बावजूद दस सालों से ग्रामीण मज़दूरी ठहरी हुई हो।फोटो निबंध: सार्वजनिक भूमि को बचाए रखने में पूरे गांव की भूमिका होती है
राजस्थान में मवेशियों के लिए चारे की कमी और सार्वजनिक ज़मीन पर अतिक्रमण की समस्या से जूझ रहे थाना गांव ने समुदाय की मदद से इसका हल ढूंढ लिया है।ग्रामीण महिला किसानों को सशक्त बनाने वाला एक मॉडल जो उन्हीं से मज़बूत बनता है
कभी आपदाओं से निपटने के लिए बनाया गया यह स्वयं सहायता समूह आज ग्रामीण महिला किसानों को खाद्य सुरक्षा, आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर सार्वजनिक नेतृत्व तक के सबक़ सिखा रहा है।