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दिवाली सेल में सामाजिक बदलाव पर स्पेशल डिस्काउंट!
अब सामाजिक बदलाव पर भी मिल रहा है स्पेशल डिस्काउंट! जल्दी करें, ऑफर सीमित समय के लिए लागू।फंडर को क्या चाहिए? बस हमारा सुकून!
जीवन और उसकी अनंत चुनौतियों से आगे बस एक चीज है! फंडर्स की मांगें…कुछ ऐसी ही बात कहता एक जमीनी किस्सा।सोशल सेक्टर की समस्याओं के लिए, स्टार्टअप के समाधान
क्या कभी ऐसा हुआ है कि सोशल सेक्टर की चुनौतियां और मुद्दे बताते ही किसी ने आपके सामने उनका हल ऐप, वाईफाई, एआई वगैरह से चुटकियों में निकालने का दावा रख दिया हो।सपनापुर से हिंदी दिवस का हालचाल
आम जनता के लिए हिंदी के मायने जितने समान हैं, उतने ही अलग भी हैं।फील्ड में एक बार: जब डेटा हर जगह था, प्राइवेसी कहीं नहीं!
क्लासरूम से वॉशरूम तक, टाइम यूज स्टडी में रिसर्चर की डायरी में हर गतिविधि की एंट्री होती है, उसमें खर्च हुए वक्त के साथ।स्वतंत्रता दिवस सेलः नो ऑफर ऑन रोटी!
स्वतंत्रता के आठ दशक बाद भी करोड़ों लोग भोजन जैसे मौलिक अधिकार से वंचित हैं। क्या आजादी का मतलब यही है?अब संस्थाओं का असर सिर्फ महसूस किया जाएगा, देखा नहीं जा सकेगा!
क्या हो अगर संस्थाएं अपना काम तो करें, पर बता न सकें? हो सकता है कि रिपोर्टिंग, मॉनिटरिंग और फंडिंग, सब कुछ भावनाओं से ही समझना पड़े। जब तक सूरज-चांद रहेगा, किसका-किसका नाम रहेगा?
बड़ी घोषणाओं की जमीनी हकीकत में अक्सर विरोधाभास नजर आता है।स्कॉलरशिप पोर्टलः एरर 404 – सोशल जस्टिस नॉट फाउंड!
स्कॉलरशिप तक पहुंचने के लिए छात्रों को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है जो तमाम योग्यताओं के बावजूद उन्हें ‘वंचित’ बना देती हैं।विकास हो रहा है, अब बताओ – दिखेगा कब?
विकास से जुड़ी आधी-अधूरी और दिखावटी कोशिशों पर कुछ उलटबांसी।ऑनलाइन मीटिंग: विकास का वर्चुअल विलाप
जब एजेंडा हो पुराना, स्लाइड हो नई और आवाज़ें हो म्यूट, तो समझ जाइए आप ऑनलाइन मीटिंग में हैं।गर्मी में फील्ड ट्रिप की चुनौतियां और चाय
एसी दफ्तरों में बैठकर आदेश देने वाले मैनेजर क्या जानें, भीषण गर्मी में फील्ड पर दिन गुजारने वाले कर्मचारियों के दिल का हाल। ये तो चाय है जो सब करवा देती है।