
पूजा राठी
पूजा राठी आईडीआर हिंदी में संपादकीय विश्लेषक (एडिटोरियल एनालिस्ट) हैं। इससे पहले, उन्होंने फेमिनिज़्म इन इंडिया में सह-संपादक के रूप में काम किया है, जहां उन्होंने जेंडर, पर्यावरण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को कवर किया। पूजा को यूएन लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित किया गया है और वह 2024 की लाडली मीडिया फैलो भी रह चुकी हैं। इसके अलावा, वह खबर लहरिया की रूरल मीडिया फेलोशिप और एटलस फॉर बिहेवियर चेंज इन डेवलपमेंट की बिहेवियरल जर्नलिज़्म फेलोशिप की पूर्व फेलो रह चुकी हैं। पूजा ने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है।
पूजा राठी के लेख
हल्का-फुल्का सपनापुर में आख़िरी आदमी की तलाश!
लोकतंत्र का हाल चाहे कितना बेहाल हो, आंकड़े उसे सुंदर बना ही देते हैं। हल्का-फुल्का क्योंकि पेड़ बचाने से ज़्यादा ज़रूरी है पेड़ लगाने की फोटो!
पेड़ लगाने के अभियान अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन पेड़ों और जंगलों को बचाने की ज़िम्मेदारी नज़रअंदाज़ कर दी जाती है।हल्का-फुल्का भारतीय परिवारों के परम ब्रह्मास्त्र
भारतीय परिवारों की सबसे बड़ी सुपरपावर क्या है? हमारी भावनाओं से ऐसे खेलना कि सारे तीर तरकश में ही धरे रह जाएं। तो आइए, इस बार मिलते हैं कुछ ऐसे ही जज़्बाती हथियारों से।हल्का-फुल्का दलित हिस्ट्री मंथः एक महीने की क्रांति, बाकी साल शांति
जब तक फैसले लेने वालों के सरनेम नहीं बदलते, तब तक दलित हिस्ट्री मंथ कैलेंडर की एक औपचारिक तारीख भर है।हल्का-फुल्का देखो, देखो, वो आ गयी!
“वेबसाइट मोबाइल पर क्यों नहीं खुलती?” से शुरू होने वाली इस कहानी का कोई अंत नहीं है। कृपया अपने जोखिम पर लॉग-इन करें।शिक्षा आंगनवाड़ी: शिक्षा की नींव या सिर्फ पोषण का केंद्र?
आंगनवाड़ी शुरुआती बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा की आधारशिला है। लेकिन प्रशासनिक और पोषण संबंधी जिम्मेदारियों के दबाव में कार्यकर्ता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और देखभाल पर पूरा ध्यान नहीं दे पाती हैं।हल्का-फुल्का फोर-लेन रिट्रीट की सिंगल-लेन रिएलिटी
सोशल सेक्टर रिट्रीट का हाल किसी मल्टी-लेन हाईवे जैसा नजर आता है—कागज़ पर कई रास्ते, जमीन पर एक!विकास सेक्टर में नेतृत्व परिवर्तन: कब, क्यों और कैसे?
सामाजिक संस्थाओं में नेतृत्व परिवर्तन एक सतत प्रक्रिया है। यह प्रकिया व्यक्ति और संस्था, दोनों के बीच आकार लेती है। नेतृत्व की पहचान के लिए संस्था को बहुत धैर्य और खुले विचारों के साथ आगे बढ़ना आवश्यक है।हल्का-फुल्का इम्पैक्ट, उम्मीद और एक प्लेलिस्टः नये साल में बस काम चलता रहे
कभी फील्ड की थकान, कभी अंतहीन मीटिंग्स और कभी फाइलों का बोझ; ऐसे में संगीत ही है जो साथ चलता है। नए साल में ये धुनें हमें याद दिलाती हैं कि बदलाव की राह लंबी सही, लेकिन हर छोटा कदम मायने रखता है।हल्का-फुल्का विकास सेक्टर के सालाना अवॉर्ड्स: इस बार कौन सी ट्रॉफी, किसके नाम?
ये अवॉर्ड उन कार्यकर्ताओं के नाम हैं जो समाज को बेहतर बनाते-बनाते लंच ब्रेक को अगले मिशन तक टाल देते हैं।हल्का-फुल्का सोशल सेक्टर में कैपेसिटी बिल्डिंग: किसके लिए क्या मायने?
विकास सेक्टर में सबके लिए कैपेसिटी के मायने अलग हैं - किसी के लिए यह सीख है, किसी के लिए चुनौती तो किसी के लिए महज एक और पीपीटी।हल्का-फुल्का सपनापुर से हिंदी दिवस का हालचाल
आम जनता के लिए हिंदी के मायने जितने समान हैं, उतने ही अलग भी हैं।











