मनोरंजन
भारतीय परिवारों के परम ब्रह्मास्त्र
भारतीय परिवारों की सबसे बड़ी सुपरपावर क्या है? हमारी भावनाओं से ऐसे खेलना कि सारे तीर तरकश में ही धरे रह जाएं। तो आइए, इस बार मिलते हैं कुछ ऐसे ही जज़्बाती हथियारों से।गर्मी हर साल पड़ती है… पर इसका हल क्या है?
गर्मी तो हर साल पड़ती है, लेकिन उससे निपटने के हर किसी के अपने-अपने जुगाड़ हैं—कहीं सलाह चल रही है, कहीं स्पीड, और कहीं बस काम।तो इस नौकरी के लिए अप्लाई कौन कर रहा है?
जब जॉब डिस्क्रिप्शन पढ़कर लगे - यह रोल है या पूरी संस्था का ठेका?अप्रेज़ल: सबका अप्रैल एक जैसा नहीं होता
अप्रैल आते ही हर जगह अप्रेज़ल की बहार आने लगती है। क्या सरकारी और क्या प्राइवेट, हर कोई अप्रेज़ल की बाट जोहता है। लेकिन यह महीना सबके लिए अलग-अलग गुल खिलाता है!फील्ड में एक बार- ये उत्तर किधर है…कोई इसका उत्तर देगा!
क्या हो जब फील्ड में पहुंचे और दिशा तलाशने के लिए कम्पस की जरूरत पड़ जाएदलित हिस्ट्री मंथः एक महीने की क्रांति, बाकी साल शांति
जब तक फैसले लेने वालों के सरनेम नहीं बदलते, तब तक दलित हिस्ट्री मंथ कैलेंडर की एक औपचारिक तारीख भर है।आया मौसम, अप्रेज़ल का!
तेरा करूं…तेरा करूं दिन-गिन-गिन के इंतजार…हम वैसे नहीं, तो ऐसे कह देते हैं!
सीधे-सीधे बोलना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है… इसलिए हम मुहावरों में कह देते हैं।नमस्कार, आज के मुख्य समाचार!
अगर सोशल सेक्टर की खबरें भी हिंदी के समाचारों की तरह छपती, तो शायद हर न्यूज़ ब्रेकिंग न्यूज़ होती!देखो, देखो, वो आ गयी!
“वेबसाइट मोबाइल पर क्यों नहीं खुलती?” से शुरू होने वाली इस कहानी का कोई अंत नहीं है। कृपया अपने जोखिम पर लॉग-इन करें।शादी का कार्यक्रम: नॉनप्रॉफिट स्टाइल में
पूरे कार्यक्रम की मिनट-दर-मिनट योजना (बस अप्रूवल बाकी है!)तुम करते क्या हो…हैं?
वह देश बदल सकता है, सिस्टम जगा सकता है, आंदोलन कर सकता है। बस अपना काम समझाने के सिवा सोशल सेक्टर का योद्धा सब कर सकता है।