
जूही मिश्रा
जूही मिश्रा आईडीआर में एडिटोरिएल एसोसिएट हैं। उन्हें पत्रकारिता का 14 साल का अनुभव है और उन्होंने पत्रिका, टाइम्स ऑफ इंडिया, रोर मीडिया, दूता टेक्नोलॉजी और ग्राम वाणी के साथ काम किया है। जूही ने विकास संवाद संस्था से फेलोशिप पूरी की है, जहाँ उन्होंने बसोर समुदाय में खाद्य प्रणालियों और कुपोषण के कारणों पर शोध किया।
जूही मिश्रा के लेख
शिक्षा शिक्षा से रोज़गार तक: युवा श्रम बल पर एपीयू रिपोर्ट के 6 मुख्य बिंदु
सामाजिक क्षेत्र की संस्थाओं के लिए यह रिपोर्ट विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि यह युवाओं, शिक्षा व रोज़गार को व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत करती है। नीतिगत समझ बेहतर बनाने के साथ-साथ यह हस्तक्षेप की दिशा तय करने में भी सहायक है।हल्का-फुल्का हम वैसे नहीं, तो ऐसे कह देते हैं!
सीधे-सीधे बोलना कभी-कभी मुश्किल हो जाता है… इसलिए हम मुहावरों में कह देते हैं।शिक्षा आंगनवाड़ी: शिक्षा की नींव या सिर्फ पोषण का केंद्र?
आंगनवाड़ी शुरुआती बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा की आधारशिला है। लेकिन प्रशासनिक और पोषण संबंधी जिम्मेदारियों के दबाव में कार्यकर्ता गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और देखभाल पर पूरा ध्यान नहीं दे पाती हैं।हल्का-फुल्का फोर-लेन रिट्रीट की सिंगल-लेन रिएलिटी
सोशल सेक्टर रिट्रीट का हाल किसी मल्टी-लेन हाईवे जैसा नजर आता है—कागज़ पर कई रास्ते, जमीन पर एक!पर्यावरण कॉमन्स और स्वशासन: समुदायों की भागीदारी क्यों जरूरी है
सामुदायिक संसाधनों पर चर्चा और जागरुकता बनाए रखने के लिए ग्राम-सभाओं को सशक्त बनाना और उनके एजेंडे को कॉमन्स और समुदाय की जरूरतों पर केंद्रित करना जरूरी हो गया है।हल्का-फुल्का जिंगल बेल… जिंगल बेल… इज़ द फंडिंग वेल?
इस क्रिसमस एनजीओ ने भी अपनी विश लिस्ट निकाली है! इनके सैंटा कोई और नहीं, बल्कि फंडर्स ही हैं।सामाजिक न्याय आईडीआर इंटरव्यूज | राजिम केतवास
पिछले चार दशकों से श्रमिक एवं महिला अधिकारों के मुद्दों पर सक्रिय रही राजिम केतवास मध्य प्रदेश के श्रमिक आंदोलन में भागीदारी से लेकर अपने संगठन दलित आदिवासी मंच की स्थापना तक की यात्रा और अनुभवों को साझा कर रही हैं।हल्का-फुल्का फील्ड विजिट तो होगी लेकिन हवा में नहीं, हिसाब में
विकास सेक्टर में काम करते हुए फील्ड विजिट्स कभी कम नहीं हो सकती हैं लेकिन उनका बजट होता रहता है, इसलिए इस बार संस्थाओं से मुलाकात से ज्यादा सफर के खर्चे की चिंता है।हल्का-फुल्का दिवाली सेल में सामाजिक बदलाव पर स्पेशल डिस्काउंट!
अब सामाजिक बदलाव पर भी मिल रहा है स्पेशल डिस्काउंट! जल्दी करें, ऑफर सीमित समय के लिए लागू।हल्का-फुल्का आशाः एक नाम, और हजार काम
एक आशा कार्यकर्ता अपने काम के अलावा किन-किन अजीबो-गरीब जिम्मेदारियों को पूरा करती है, उन्हीं पर एक टिप्पणी।हल्का-फुल्का गर्मी में फील्ड ट्रिप की चुनौतियां और चाय
एसी दफ्तरों में बैठकर आदेश देने वाले मैनेजर क्या जानें, भीषण गर्मी में फील्ड पर दिन गुजारने वाले कर्मचारियों के दिल का हाल। ये तो चाय है जो सब करवा देती है।हल्का-फुल्का आईपीएल के बहाने फील्ड ट्रिप का किस्सा
जब कोई कर्मचारी फील्ड विजिट पर निकलता है, तो उसके हालात अक्सर एक आईपीएल मैच की तरह ही अनिश्चित, उतार-चढ़ाव से भरे और कभी-कभी रोमांचक भी होते हैं। कभी कोई मीटिंग सुपर ओवर जैसी होती है, तो कभी गांव की गली किसी स्लो पिच की तरह मुश्किल लगती है।











