लीक: हमारी सबसे सफल सूचना व्यवस्था
फंडिंग से लेकर सैलरी और एमओयू की शर्तों तक, कुछ सूचनाएं ऐसी होती हैं जो आधिकारिक घोषणा से पहले ही सार्वजनिक संपत्ति बन जाती हैं।सामाजिक संस्थाओं में कम्युनिकेशन को ‘जुगाड़’ नहीं, व्यवस्था की ज़रूरत है
गैर-लाभकारी संस्थाएं अक्सर कम्युनिकेशन से जुड़ी चुनौतियों का समाधान अधिक लोगों की नियुक्ति करने या एकबारगी कार्यशालाओं में निवेश करने में तलाशती हैं।वेस्ट एशिया का युद्ध और भारत की कृषि: खाद, ईंधन और खाद्य सुरक्षा की जंग
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध का असर केवल वैश्विक राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की खेती, खाद की उपलब्धता, ऊर्जा लागत और खाद्य सुरक्षा को भी यह प्रभावित कर रहा है।साझा संसाधनों के लिए क्यों ज़रूरी है सामुदायिक डेटा?
समुदायों का कॉमंस से पुराना रिश्ता है, जिसमें उनकी मौखिक परंपराएं, अनुभव और ज्ञान शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या डेटा प्रणालियां इस रिश्ते को अहमियत देने के लिए तैयार हैं?सपनापुर में आख़िरी आदमी की तलाश!
लोकतंत्र का हाल चाहे कितना बेहाल हो, आंकड़े उसे सुंदर बना ही देते हैं। एक बीमा, एक हेल्थ चेक-अप: क्या ऐसे होती है एनजीओ कर्मचारियों की देखभाल?
जब तक विकास सेक्टर कॉर्पोरेट एचआर नीतियों से हटकर ज़मीनी समुदायों के तौर-तरीके और सामाजिक न्याय के मूल्य नहीं अपनाता, तब तक सामूहिक देखभाल का विचार सिर्फ कागज़ों पर नज़र आएगा।पेंच टाइगर रिज़र्व: फसलों और जानवरों के बीच रोशनी का पहरा
पेंच टाइगर रिज़र्व से सटे छह गांवों में सोलर लाइटें कुछ किसानों के लिए एक नयी उम्मीद बनकर आयी हैं। लेकिन अभी भी कई घर ऐसे हैं, जो बदलाव की बाट जोह रहे हैं।क्योंकि पेड़ बचाने से ज़्यादा ज़रूरी है पेड़ लगाने की फोटो!
पेड़ लगाने के अभियान अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन पेड़ों और जंगलों को बचाने की ज़िम्मेदारी नज़रअंदाज़ कर दी जाती है।