जलवायु परिवर्तन
आपदा से जूझता नागालैंड और सवालों के घेरे में राहत का सिस्टम
जुलाई 2026 में पूर्वी नागालैंड की बाढ़ ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं—क्या राज्य का अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार था? क्या सरकारी राहत समय पर पहुंची? और क्या मीडिया प्रभावित इलाकों की पूरी तस्वीर सामने ला पाया?नेपाल आपदा: फिर उजागर हुई क्षेत्रीय तैयारी, तालमेल मजबूत करने की ज़रूरत
यह आपदा मज़बूत क्षेत्रीय सहयोग की ज़रूरत को दिखाती है, जिसमें सरकारों को सीमा-पार के खतरों से निपटने के लिए मिलकर कदम उठाने होंगे।प्रकृति को बचाने वालों का ख़याल कौन रखेगा?
संरक्षण के काम में जुटे लोग किस कीमत पर इसे अंजाम दे रहे हैं? सीमित संसाधनों के संकट से जूझते संरक्षणकर्मियों का मानसिक स्वास्थ्य भी अब संकट में है।डेटा से नहीं, लोगों से सीखना
भारत के ट्रकिंग समुदाय के साथ काम करते हुए हमने जाना कि फील्ड में समय बिताना, भरोसा बनाना और उन समुदायों को समझना कितना अहम है, जो अक्सर औपचारिक आंकड़ों से बाहर रह जाते हैं।बदलते मॉनसून के दौर में बारिश की एक-एक बूंद सहेजना जरूरी
जलवायु परिवर्तन, अल नीनो और बदलते मॉनसून के बीच भारत में चरम मौसम की घटनाएं बढ़ रही हैं। ऐसे समय में बारिश की हर बूंद का संरक्षण ही जल और खाद्य सुरक्षा का सबसे बड़ा आधार है।साझा संसाधनों के लिए क्यों ज़रूरी है सामुदायिक डेटा?
समुदायों का कॉमंस से पुराना रिश्ता है, जिसमें उनकी मौखिक परंपराएं, अनुभव और ज्ञान शामिल हैं। सवाल यह है कि क्या डेटा प्रणालियां इस रिश्ते को अहमियत देने के लिए तैयार हैं?क्योंकि पेड़ बचाने से ज़्यादा ज़रूरी है पेड़ लगाने की फोटो!
पेड़ लगाने के अभियान अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं, लेकिन पेड़ों और जंगलों को बचाने की ज़िम्मेदारी नज़रअंदाज़ कर दी जाती है।