जलवायु परिवर्तन
मिथुन क्या है और अरुणाचल के जंगलों में इसे लेकर तनाव क्यों बढ़ रहा है?
ढोल मिथुनों का शिकार करने लगे हैं क्योंकि उनके आम शिकारों को इंसानों ने खत्म कर दिया है। इन हमलों में मिथुन खोने वाले किसान परेशान हैं क्योंकि वे आर्थिक रूप से इन्हीं पर निर्भर है।कश्मीर घाटी से क्यों गुम हो रहे हैं पारंपरिक धान के खेत और उनकी खुशबू?
परंपरागत रूप से चावल की खेती करने वाले किसान, सेब की बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। खेती की जमीनों पर बनते रिहाइशी और गैर-रिहाइशी इलाके भी धान के रकबे को घटा रहे हैं।तमिलनाडु के उदाहरण से समझिए मातृ मानसिक स्वास्थ्य पर संवाद की जरूरत क्यों है?
तमिलनाडु में बढ़ती गर्मी और प्रदूषण का नई माताओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ रहा है, लेकिन इससे जुड़े नीतिगत हस्तक्षेपों के प्रयास अभी नजर नहीं आते हैं।जलवायु परिवर्तन फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं के जीवन को कैसे प्रभावित करता है?
विकास सेक्टर के जमीनी कार्यकर्ता जलवायु परिवर्तन के असर से अछूते नहीं हैं, यह जीवन के साथ-साथ उनके काम की निरंतरता और प्रभावशीलता को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।ख़ुसरो काम क्लाइमेट का, उड़ गया संग अनार!
दिल्ली में दीवाली पर शुरू हुई पटाखों की धम-फटाक और उनका असर कई दिनों बाद भी जारी है। तो प्रस्तुत है हमारे साहित्यिक-सांस्कृतिक बुजुर्ग अमीर ख़ुसरो की शैली में कुछ मजेदार कह-मुकरियां।तीरे-तीरे नदिया: हर साल बाढ़ में डूबता भारत
प्राकृतिक असंतुलन और मानवीय हस्तक्षेप ने मिलकर भारत में बाढ़ के जोखिम को लगातार गहरा किया है। यह वार्षिक आपदा अब सामाजिक-आर्थिक क्षति का प्रमुख स्रोत बन चुकी है।कन्नौज: जलवायु संकट से घिरी इत्र नगरी
बढ़ते तापमान के चलते कन्नौज में फूलों का उत्पादन कम हो गया है जो यहां के इत्र व्यापार और उससे मिलने वाले रोजगार को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।छोटे समूह, बड़ी संभावनाएं: सीमांत किसानों की नयी दिशा
सामूहिक खेती से किसान कम जमीन मिलाकर खेती कर सकते हैं, उपज बढ़ा सकते हैं और गुजर-बसर की खेती से आगे बढ़ सकते हैं।