साइबर अपराध और महिलाएं: अधूरे आंकड़े, अधूरे वादे
महिलाओं की साइबर सुरक्षा पर संसद की रिपोर्ट एक बड़ा सवाल उठाती है—कौन साइबर दुर्व्यवहार की शिकायत दर्ज करा पाता है और कौन आंकड़ों से बाहर रह जाता है?इस 15 अगस्त सोशल सेक्टर मांगे… आज़ादी
आज़ादी सिर्फ सत्ता से नहीं, कभी-कभी अपनी बनाई व्यवस्थाओं से भी चाहिए होती है। सोशल सेक्टर में भी कुछ ऐसे तौर-तरीके हैं, जो धीरे-धीरे टूल से तख्त बन बैठे हैं।फोटो निबंध: छबड़ा थर्मल पावर प्लांट और गांवों का संघर्ष
छबड़ा थर्मल पावर प्लांट भले ही राजस्थान को रोशन करता है, लेकिन इसके आसपास के गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं और बढ़ते प्रदूषण से जूझ रहे हैं।क्या छात्रों के अनुभव छात्रवृत्ति की नीतियां बदल सकते हैं?
देश का स्कॉलरशिप सिस्टम वंचित छात्रों की ज़रूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा है। ऐसे में समुदाय-आधारित मॉडल उनके लिए सहयोग की एक नई राह दिखा सकते हैं।क्या मेघालय के स्वास्थ्य आंकड़े पूरी सच्चाई बताते हैं?
मेघालय को ऐसे स्वास्थ्य आंकड़ों की ज़रूरत है, जो उसकी जातीय और भौगोलिक विविधता को सही तरह से दिखाएं। अच्छे डैशबोर्ड समाधान का सिर्फ़ आधा हिस्सा हैं।कुच्चू-पुच्चू! सस्ता ऑफिस स्पेस बता दो ना…
आजकल शहर में ऑफिस ढूंढना संस्था की ज़रूरत बन गया है। दुख बस इतना है कि उसका किराया भरने के लिए एक नया फंडर भी ढूंढना पड़ता है।पलायन के साये में महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य
झारखंड की ग्राम पंचायत मुखिया पिंकी बारदा बता रही हैं कि पलायन से प्रभावित गांवों में महिलाओं का जीवन किन चुनौतियों, अकेलेपन और आपसी सहारे के बीच गुज़रता है।फंडर्स की कहानी, बॉलीवुड की जुबानी
डेटा, स्केल या सस्टेनेबिलिटी? बॉलीवुड गानों से समझिए फंडर्स का नया अंदाज़।