1. नया-नया फंडर: “हमें बस अच्छे लोग चाहिए। बाकी तो सब हो जाएगा।”
संस्था:


2. पलटू फंडर: “इस साल क्लाइमेट करते हैं, अगले साल एआई!”
संस्था:


3. डेटा प्रेमी फंडर: “कहानी तो अच्छी है… लेकिन डैशबोर्ड, बेसलाइन और ग्राफ कहां हैं?”
संस्था:


4. दरियादिल फंडर: “अगली ग्रांट से पहले आपको रिपोर्ट सबमिट करनी होगी।”
संस्था:


5. को-क्रिएशन फंडर: “आप खुलकर अपने मन की बात कहिए!”
संस्था:


6. इनोवेशन फंडर: “कुछ ऐसा कीजिए जो पहले कभी न हुआ हो…लेकिन रिस्क बिल्कुल न हो।”
संस्था:


7. स्केल वाला फंडर: “पांच गांव में अच्छा काम हुआ है? अगले साल पांच सौ गांव कर लेते हैं।”
संस्था:


8. सस्टेनेबिलिटी फंडर: “हम चाहते हैं कि प्रोजेक्ट हमारे जाने के बाद भी चलता रहे।”
संस्था:


लेखक के बारे में
- इंद्रेश शर्मा आईडीआर हिंदी में पार्टनरशिप और आउटरीच हेड हैं। वे संगठन की पहुंच बढ़ाने और असरदार साझेदारी बनाने के लिए विकास सेक्टर से जुड़े विभिन्न हितधारकों के साथ मिलकर काम करते हैं। इन्द्रेश संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के साथ-साथ जमीनी संगठनों के लिए कैपेसिटी बिल्डिंग से जुड़े लेखन में भी सक्रिय रूप से योगदान देते हैं। उनके पास विकास सेक्टर में 13 वर्षों से अधिक का पेशेवर अनुभव है। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, ग्रामीण विकास और पंचायती राज जैसे क्षेत्रों में काम किया है। इससे पहले वे प्रथम और सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च संस्थाओं से जुड़े रहे हैं, जहां उन्होंने रिसर्च, कार्यक्रम निर्माण और प्रशिक्षण जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई है।
- रवीना कुंवर, आईडीआर हिंदी में डिजिटल मार्केटिंग एनालिस्ट हैं। इससे पहले वे एक रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुकी हैं जिसमें उनका काम मुख्यरूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित था। रवीना, मीडिया और कम्युनिकेशन स्टडीज़ में स्नातकोत्तर हैं।




