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बदलते मौसम और सिकुड़ती ज़मीन के बीच मामित के झूम किसान
मिज़ोरम के मामित में झूम किसान अनिश्चित मौसम, चूहों के बढ़ते हमलों और बागान खेती के असफल प्रयोग के बीच एक बड़े संकट का सामना कर रहे हैं। तो इस नौकरी के लिए अप्लाई कौन कर रहा है?
जब जॉब डिस्क्रिप्शन पढ़कर लगे - यह रोल है या पूरी संस्था का ठेका?अमर्त्य सेन के विचारों को साकार करते देश के पांच संगठन
स्वच्छता से आजीविका तक, पांच गैर-लाभकारी संगठन अमर्त्य सेन के विकास से जुड़े विचारों को दर्शाते हैं—स्वतंत्रता, आकांक्षा, मूलभूत सेवाओं तक पहुंच और लोकतांत्रिक भागीदारी।कार्बन क्रेडिट क्या है और इसके वैश्विक स्तर पर क्या मायने हैं?
अंतर्राष्ट्रीय अनुभव दर्शाता है कि केवल “कार्बन क्रेडिट जारी करना” काफी नहीं है। उनकी गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही ज़रूरी है।अप्रेज़ल: सबका अप्रैल एक जैसा नहीं होता
अप्रैल आते ही हर जगह अप्रेज़ल की बहार आने लगती है। क्या सरकारी और क्या प्राइवेट, हर कोई अप्रेज़ल की बाट जोहता है। लेकिन यह महीना सबके लिए अलग-अलग गुल खिलाता है!फोटो निबंध: मुनाफे के वादे और जोखिमों के बीच फूलों के किसान
लखनऊ के मलिहाबाद और काकोरी क्षेत्र में पारंपरिक रूप से फूलों की खेती करने वाले छोटे और सीमांत किसान आज भी मौसम, बाज़ार और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। त्योहारों में फसलों के ऊंचे दाम मिलने के बावजूद सालभर अनिश्चितता बनी रहती है।मिठास के पीछे का कड़वा सच: मराठवाड़ा के गन्ना मज़दूरों की कहानी
मराठवाड़ा एक सूखा-प्रभावित इलाका है जहां खेती भरोसेमंद नहीं है। सन 1950 के आस-पास अहमदनगर में पहली शुगर फैक्ट्री बनी थी और वहीं से एक नई मज़दूरी की कहानी शुरू हुई।एक लड़की, जिसने हर हाल में शिक्षा को चुना
कर्नाटक के रायचूर की एक युवा फील्ड कोऑर्डिनेटर के जीवन का एक दिन। उसकी उस यात्रा के साथ, जहां वह कभी स्कूल छोड़ने की कगार पर थी, लेकिन आज अपने साथ-साथ अपने परिवार और समुदाय का सहारा बन चुकी है।फील्ड में एक बार- ये उत्तर किधर है…कोई इसका उत्तर देगा!
क्या हो जब फील्ड में पहुंचे और दिशा तलाशने के लिए कम्पस की जरूरत पड़ जाएशिक्षा से रोज़गार तक: युवा श्रम बल पर एपीयू रिपोर्ट के 6 मुख्य बिंदु
सामाजिक क्षेत्र की संस्थाओं के लिए यह रिपोर्ट विशेष रूप से उपयोगी है, क्योंकि यह युवाओं, शिक्षा व रोज़गार को व्यापक संदर्भ में प्रस्तुत करती है। नीतिगत समझ बेहतर बनाने के साथ-साथ यह हस्तक्षेप की दिशा तय करने में भी सहायक है।हम आदिवासियों के स्वास्थ्य की जड़ें जंगल में हैं
कर्नाटक के आदिवासियों के लिए स्वास्थ्य और जीवनयापन के मुद्दे, जंगलों से उनके गहरे रिश्ते और विस्थापन के इतिहास में निहित हैं। इसलिए स्वास्थ्य का सवाल केवल दवाओं या अस्पतालों से नहीं, बल्कि हमारे अधिकारों, परंपराओं और गरिमा से भी जुड़ा हुआ है।कॉमन्स और बाजार के बीच कहां खड़े हैं वन आश्रित समुदाय?
समुदायों की बाज़ार में समान भागीदारी सुनिश्चित करने वाली व्यवस्थाओं को मजबूत करने के साथ यह तय करना भी जरूरी है कि वन और प्रकृति, बाजार की ताकतों के अधीन न हो जाएं।