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क्या मेघालय के स्वास्थ्य आंकड़े पूरी सच्चाई बताते हैं?
मेघालय को ऐसे स्वास्थ्य आंकड़ों की ज़रूरत है, जो उसकी जातीय और भौगोलिक विविधता को सही तरह से दिखाएं। अच्छे डैशबोर्ड समाधान का सिर्फ़ आधा हिस्सा हैं।कुच्चू-पुच्चू! सस्ता ऑफिस स्पेस बता दो ना…
आजकल शहर में ऑफिस ढूंढना संस्था की ज़रूरत बन गया है। दुख बस इतना है कि उसका किराया भरने के लिए एक नया फंडर भी ढूंढना पड़ता है।पलायन के साये में महिलाओं का मानसिक स्वास्थ्य
झारखंड की ग्राम पंचायत मुखिया पिंकी बारदा बता रही हैं कि पलायन से प्रभावित गांवों में महिलाओं का जीवन किन चुनौतियों, अकेलेपन और आपसी सहारे के बीच गुज़रता है।फंडर्स की कहानी, बॉलीवुड की जुबानी
डेटा, स्केल या सस्टेनेबिलिटी? बॉलीवुड गानों से समझिए फंडर्स का नया अंदाज़।ज़ुल्मतों के दौर में सोशल सेक्टर की चुप्पी
सिविल सोसाइटी की पहचान सिर्फ़ उसके काम से नहीं, बल्कि इस बात से बनती है कि वह मुश्किल समय में किसके साथ खड़ी होती है।मेघालय में फुटबॉल से ज़िंदगी के मैदान पर उतरते युवा
शिलांग का यह फुटबॉल क्लब बच्चों को सिर्फ खेल नहीं, ज़िंदगी जीना भी सिखा रहा है। देखिए मेघालय से हमारी यह कहानी।ज़मीनी संस्थाएं फंडर से कैपेसिटी बिल्डिंग और संस्थागत विकास पर बातचीत कैसे करें?
क्षमता निर्माण और संगठनात्मक विकास को अक्सर परियोजनाओं से अलग ज़रूरत माना जाता है, जबकि यही किसी संस्था के दीर्घकालिक सामाजिक प्रभाव की बुनियाद हैं। दानदाताओं के साथ संवाद और नेगोशिएशन की रणनीति इस सोच को बदलने में अहम भूमिका निभा सकती है।झूम खेती के संकट से निकलने का रास्ता कैसे खोज रहे हैं मणिपुर के किसान?
बढ़ती आबादी, भूमि पर बढ़ते दबाव और बदलते पर्यावरण के बीच मणिपुर के किसानों के लिए झूम खेती अब पहले जितनी प्रभावी नहीं रही है। ऐसे में मिट्टी की सेहत सुधारने के साथ-साथ किसानों की आजीविका बेहतर बनाने के लिए खेती के नए तौर-तरीके अपनाए जा रहे हैं।प्यारे आंदोलन, …..
वह कभी किसान बनकर लौटता है, कभी छात्र, कभी जंगल, कभी पहाड़। उसका आना सड़क और संसद, दोनों के लिए ज़रूरी है। इसलिए आज एक खुला ख़त, आंदोलन के नाम।महिलाओं के काम का हिसाब आख़िर कब होगा?
वर्ल्ड इनइक्वेलिटी रिपोर्ट 2026 बताती है कि महिलाओं के साथ आर्थिक ग़ैर-बराबरी सिर्फ़ वेतन तक सीमित नहीं है। यह उनके काम, आय, संपत्ति और अवसर, हर स्तर पर नज़र आती है।जंगल के बीच पुस्तकालय चलाने वाले लाइब्रेरियन की कहानी
क़रीब 2,000 कालजयी साहित्यिक रचनाओं वाली इस लाइब्रेरी से ग़रीब मुतुवन आदिवासी नियमित तौर पर किताबें ले जाते हैं, पढ़ते हैं, और वापस कर जाते हैं।