समाजसेवी संस्था
जलवायु से जुड़ी खबरों पर आम लोगों का रुख कैसा होता है?
भारत समेत आठ देशों में रॉयटर्स इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ जर्नलिज्म द्वारा किया गया एक ऑनलाइन अध्ययन बताता है कि जलवायु से जुड़ी खबरें लोगों को कितना जागरुक बना पाती हैं।समाजसेवी संस्थाओं के लिए तकनीक से संबंधित कुछ जरूरी सुझाव
तकनीक संबंधी ज़रूरतों और चुनौतियों के मामले में समाजसेवी संस्थाओं की मदद करने वाली संस्था सीएक्सओ के कुछ सुझाव जो एनजीओ लीडर्स के काम आ सकते हैं।नई तकनीक या पहले से उपलब्ध तकनीक: समाजसेवी संस्थाओं के लिए क्या सही है?
तकनीक का इस्तेमाल करने वाली समाजसेवी संस्थाओं के सामने कभी न कभी यह सवाल आता ही है कि उन्हें अपने कार्यक्रम के लिए अपनी एक ऐप विकसित करनी चाहिए या नहीं।फंडरेजिंग के लिए ऑनलाइन माध्यमों का सही इस्तेमाल कैसे करें?
संगठन की वेबसाइट से फंडरेजिंग करने और क्राउडफंडिग में से एक चुनने की शर्त जरूरी नहीं है क्योंकि दोनों तरीक़ों का एक साथ इस्तेमाल करने के विकल्प भी मौजूद हैं।समाजसेवी संगठन अपने कामकाज को डिजिटल कैसे बनाएं?
तकनीक से जुड़े कुछ सबक़ जो समाजसेवी संस्थाओं के उन लीडर्स के काम आ सकते हैं जो इसका लाभ तो उठाना चाहते हैं लेकिन तरीके नहीं जानते हैं।संगठनात्मक संस्कृति प्रतिभावान कर्मचारियों को रोकने में कैसे मददगार है?
आईएसडीएम और अशोका यूनिवर्सिटी के सीएसआईपी का यह अध्ययन बताता है कि जन-केंद्रित संस्कृति और काम के लिए सहयोगी वातावरण मुहैया करवाने वाले संगठन प्रतिभाओं को हासिल करने और रोके रखने में सफल होते हैं।आर्थिक, सामाजिक या स्वास्थ्य से जुड़े प्रयासों के लिए साझेदारी कैसे करें?
पांच सुझाव जो साझेदारियों को सफल बनाने और इनसे अधिकतम लाभ उठाने के काम आ सकते हैं।बुजुर्गों के लिए बनी एक हेल्पलाइन समाजसेवी संस्थाओं को विस्तार के तरीके सिखाती है
किसी कार्यक्रम को बनाना और उसे विस्तार देना चुनौतीपूर्ण काम है, यह आलेख बुजुर्गों की सहायता के लिए बनाई गई एक हेल्पलाइन के जरिए बताता है कि इन चुनौतियों से कैसे निपटा जा सकता है।समाजसेवी संस्थाएं अपने कार्यक्रमों की साझेदारी कैसे तैयार कर सकती हैं?
साझेदारी से समाजसेवी संस्थाएं अपने विचार और नजरिए को विस्तार दे सकती हैं, ऐसा करने के लिए संगठनों को उपयुक्त साथी की जरूरत होती है जिसमें नीचे दिए गए सुझाव काम आ सकते हैं।चार जनजातियां, चार व्यंजन और परंपरागत खानपान पर ज्ञान की चार बातें
चार जनजातियों के रसोइये अपने व्यंजनों के साथ अपनी खाद्य संस्कृति पर आए खतरों पर चर्चा कर रहे हैं क्योंकि जंगलों के खत्म होने के साथ उनके समुदाय आजीविका के लिए संघर्ष करते हुए शहरों का रुख करने लगे हैं।समाजसेवी संस्थाओं में नेतृत्व परिवर्तन के दौरान क्या ग़लतियां हो सकती हैं?
आईडीआर से बातचीत में सफीना हुसैन और महर्षि वैष्णव ‘एजुकेट गर्ल्स’ में नेतृत्व परिवर्तन (लीडरशिप ट्रांज़िशन) से जुड़े अपने अनुभव साझा कर रहे हैं और कुछ कारगर सुझाव भी दे रहे हैं।एक एनजीओ के लिए ट्रू कॉस्ट फंडिंग कैसे हासिल करें?
ट्रू कॉस्ट फंडिंग क्या है, इसे कैसे हासिल करें और वह सब कुछ जो एनजीओ लीडर्स के लिए जानना जरूरी है।