समाजसेवी संस्था
आज के लाभार्थी, कल के दानदाता कैसे बन सकते हैं?
एफएफई का एल्मनाई एंगेजमेंट मॉडल बताता है कि समाजसेवी संस्थाओं से सहयोग और समर्थन पाने वाले, उनके कार्यक्रमों को लंबे समय तक चलाए रखने वाले फ़ंडिंग मॉडल का हिस्सा कैसे बन सकते हैं।समाजसेवी संगठनों में कारगर प्रतिभा प्रबंधन कैसे किया जा सकता है?
क्या एक समाजसेवी संस्था सीमित संसाधनों में एक बेहतरीन और मज़बूत टीम संस्कृति विकसित कर सकती है, इस सवाल का जवाब अर्पण की प्रतिभा प्रबंधन की रणनीतियां देती हैं।समाजसेवी संस्थाएं और उनके दबे-छिपे कामकाजी मूल्य
हर रोज़ काम (ना) आने वाले समाजसेवी संस्थाओं के कामकाजी मूल्य।समाजसेवी संस्थाओं में वॉलंटियर सहभागिता को बढ़ाने के पांच कारगर उपाय
सही और स्पष्ट तरीक़े से अपनी बात कहना और सहभागिता की शर्तें बताना अधिक से अधिक लोगों को वॉलंटियरिंग और सार्वजनिक सेवा की ओर प्रेरित कर सकती हैं।विकास सेक्टर में मजबूत फैसिलिटेटर बनने के आठ नुस्खे
फैसिलिटेशन, विकास सेक्टर में काम करने वाले साथियों के काम में शामिल एक अनिवार्य चीज है। यह वीडियो फैसिलिटेशन के दौरान आने वाली कुछ समस्याओं और उनके समाधानों पर बात करता है।क्यों सामाजिक संस्थाओं को लोकल और ग्लोबल स्तर पर साथ काम करना चाहिए
आने वाले समय में सामाजिक संस्थाओं की प्रासंगिकता इस बात से भी तय होगी कि छोटे स्तर पर किए जा रहे उनके प्रयास वैश्विक तस्वीर का हिस्सा किस तरह से बन रहे हैं।पर्यावरण बचाने के लिए आंदोलन खड़ा करने में क्या-क्या लगता है?
पर्यावरणविद स्टालिन दयानंद, पर्यावरण से जुड़े आंदोलनों में जनभागीदारी पर बात कर रहे हैं और बता रहे हैं क्यों ये विकास विरोधी नहीं कहे जा सकते हैं।जब हेडऑफिस से कोई विज़िट पर आता है…
हेडऑफिस वालों की फील्ड विज़िट के दौरान ज़मीनी कार्यकर्ता क्या करते हैं, जानिए उन्हीं की ज़ुबानी।