समाजसेवी संस्था
विकास सेक्टर में मजबूत फैसिलिटेटर बनने के आठ नुस्खे
फैसिलिटेशन, विकास सेक्टर में काम करने वाले साथियों के काम में शामिल एक अनिवार्य चीज है। यह वीडियो फैसिलिटेशन के दौरान आने वाली कुछ समस्याओं और उनके समाधानों पर बात करता है।क्यों सामाजिक संस्थाओं को लोकल और ग्लोबल स्तर पर साथ काम करना चाहिए
आने वाले समय में सामाजिक संस्थाओं की प्रासंगिकता इस बात से भी तय होगी कि छोटे स्तर पर किए जा रहे उनके प्रयास वैश्विक तस्वीर का हिस्सा किस तरह से बन रहे हैं।पर्यावरण बचाने के लिए आंदोलन खड़ा करने में क्या-क्या लगता है?
पर्यावरणविद स्टालिन दयानंद, पर्यावरण से जुड़े आंदोलनों में जनभागीदारी पर बात कर रहे हैं और बता रहे हैं क्यों ये विकास विरोधी नहीं कहे जा सकते हैं।जब हेडऑफिस से कोई विज़िट पर आता है…
हेडऑफिस वालों की फील्ड विज़िट के दौरान ज़मीनी कार्यकर्ता क्या करते हैं, जानिए उन्हीं की ज़ुबानी।समाजसेवी संगठन डिजिटल परिवर्तन के लिए तकनीकी क्षमता निर्माण कैसे करें?
तकनीकी क्षमता का निर्माण, समाजसेवी संस्थाओं को अपने डिजिटल परिवर्तन के लिए आवश्यक ज्ञान और संसाधन प्रदान कर सकता है।एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा?
समाजसेवी संस्थाओं के एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का असर बढ़ी हुई बेरोज़गारी, हताश समुदाय और कमजोर लोकतंत्र के रूप में दिख सकता है।कैसे समाजसेवी संगठन अपनी कहानी सकारात्मकता से कह सकते हैं?
सामाजिक संगठनों का अपने कार्यक्रमों की पिच तैयार करते हुए सकारात्मक भाषा और उदाहरण अपनाना सोच बदलने वाला साबित होगा।समाजसेवी संस्थाएं क़ानून निर्माण की प्रक्रिया में जन-सहभागिता को कैसे संभव बनाती हैं
जन-समुदायों को कानून बनाने की प्रक्रिया में शामिल करने के लिए समाजसेवी संस्थाओं की ज़मीनी पकड़ और समझ का फायदा उठाया जा सकता है।पुरुषों का साथ महिलाओं के लिए भूमि अधिकार हासिल करना आसान बना सकता है
महिलाओं को भूमि अधिकार दिलाने के लिए काम कर रही समाजसेवी संस्थाओं के लिए यह स्थापित करना जरूरी है कि लड़ाई पुरुषों से नहीं, पितृसत्ता से है।क्यों शिक्षकों को उनके काम का पूरा श्रेय मिलना जरूरी है
शिक्षकों के काम को न केवल कम आंका जाता है बल्कि अक्सर उनकी भावनात्मक और प्रशासनिक मेहनत को महत्व नहीं दिया जाता है, इस पर ध्यान देना उनके समग्र स्वास्थ्य की बेहतरी के लिए जरूरी है।