कभी फील्ड की थकान, कभी अंतहीन मीटिंग्स और कभी फाइलों का बोझ; ऐसे में संगीत ही है जो साथ चलता है। नए साल में ये धुनें हमें याद दिलाती हैं कि बदलाव की राह लंबी सही, लेकिन हर छोटा कदम मायने रखता है।
नित बढ़ते तापमान में दीमापुर की महिला रेहड़ी-पटरी विक्रेता पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय सिविल-सोसाइटी नेटवर्कों का रूख कर रही हैं। उनकी यह कोशिश शहरी अनुकूलन की एक अलग और मानवीय समझ को उभारती है।
विकास सेक्टर में काम करते हुए फील्ड विजिट्स कभी कम नहीं हो सकती हैं लेकिन उनका बजट होता रहता है, इसलिए इस बार संस्थाओं से मुलाकात से ज्यादा सफर के खर्चे की चिंता है।
इस सरल कोश में कोहोर्ट की शाब्दिक परिभाषा के साथ हम यह भी बताएंगे कि यह शब्द कहां से आया और विकास क्षेत्र में इसका प्रयोग किन संदर्भों में किया जाता है।
बढ़ते दबावों के बीच गैर-लाभकारी संस्थाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी विविधता है, जिसका प्रभावी उपयोग भारत के सामाजिक क्षेत्र के अस्तित्व और भविष्य की कुंजी साबित होगा।