समाजसेवी संस्था

January 16, 2026
इम्पैक्ट, उम्मीद और एक प्लेलिस्टः नये साल में बस काम चलता रहे
कभी फील्ड की थकान, कभी अंतहीन मीटिंग्स और कभी फाइलों का बोझ; ऐसे में संगीत ही है जो साथ चलता है। नए साल में ये धुनें हमें याद दिलाती हैं कि बदलाव की राह लंबी सही, लेकिन हर छोटा कदम मायने रखता है।
January 14, 2026
फोटो निबंध: जलवायु अनुकूलन को नए आयाम देती नागालैंड की औरतें
नित बढ़ते तापमान में दीमापुर की महिला रेहड़ी-पटरी विक्रेता पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय सिविल-सोसाइटी नेटवर्कों का रूख कर रही हैं। उनकी यह कोशिश शहरी अनुकूलन की एक अलग और मानवीय समझ को उभारती है।
बोका रोचिल्ल | 8 मिनट लंबा लेख
December 25, 2025
साल 2025 में हमने जो किताबें पढ़ीं, वे आपको भी क्यों पढ़नी चाहिए?
विकास सेक्टर के अलग-अलग हिस्सों से जुड़ी कुछ किताबें जिन्हें पढ़ना और जिनसे सीखना आपके काम को थोड़ा और बेहतर बनाने में मददगार साबित हो सकता है।
December 17, 2025
क्या डेटा हमें सही तस्वीर दिखा रहा है?​
मानवीय समझ के बजाय डेटा-विज्ञान को प्राथमिकता देने में कौन से जोखिम शामिल हैं?​
नताशा जोशी | 9 मिनट लंबा लेख
November 21, 2025
सोशल सेक्टर में कैपेसिटी बिल्डिंग: किसके लिए क्या मायने?
विकास सेक्टर में सबके लिए कैपेसिटी के मायने अलग हैं - किसी के लिए यह सीख है, किसी के लिए चुनौती तो किसी के लिए महज एक और पीपीटी।
November 14, 2025
वर्कशॉप – “आप आईये तो सही!”
संस्थाओं की वर्कशॉप में “हम आएंगे” जितना आम है, उतना ही “नहीं आ पाएंगे” भी।
November 7, 2025
फील्ड विजिट तो होगी लेकिन हवा में नहीं, हिसाब में
विकास सेक्टर में काम करते हुए फील्ड विजिट्स कभी कम नहीं हो सकती हैं लेकिन उनका बजट होता रहता है, इसलिए इस बार संस्थाओं से मुलाकात से ज्यादा सफर के खर्चे की चिंता है।
जूही मिश्रा, सलमान फहीम | 4 मिनट लंबा लेख
October 30, 2025
सरल कोश: कोहोर्ट
इस सरल कोश में कोहोर्ट की शाब्दिक परिभाषा के साथ हम यह भी बताएंगे कि यह शब्द कहां से आया और विकास क्षेत्र में इसका प्रयोग किन संदर्भों में किया जाता है।
October 27, 2025
​साझा प्रयास: भारतीय नागरिक समाज के भविष्य की नींव​
​बढ़ते दबावों के बीच गैर-लाभकारी संस्थाओं की सबसे बड़ी ताकत उनकी विविधता है, जिसका प्रभावी उपयोग भारत के सामाजिक क्षेत्र के अस्तित्व और भविष्य की कुंजी साबित होगा।​
October 10, 2025
फंडर को क्या चाहिए? बस हमारा सुकून!
जीवन और उसकी अनंत चुनौतियों से आगे बस एक चीज है! फंडर्स की मांगें…कुछ ऐसी ही बात कहता एक जमीनी किस्सा।
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