नमस्कार, आज के मुख्य समाचार!

आईडीआर हिंदी तो आप पढ़ते ही हैं। लेकिन साथ ही आप पढ़ते-देखते हैं हिंदी के अखबार, हिंदी की वेबसाइट्स, हिंदी की पत्रिकाएं और हिंदी के न्यूज़ चैनल! वैसे तो खबरों का संसार अपरंपार है, लेकिन कुछ खबरें आपके साथ रह जाती हैं। अच्छी रिपोर्टिंग वाली खबरें। अच्छी रिसर्च वाली खबरें। अच्छी कैमरा वाली खबरें। अच्छी अखबार वाली खबरें। और अक्सर इन सब खबरों को चीरकर सामने आ जाने वाली ‘हुक’ वाली खबरें! जी आप ठीक सोच रहे हैं…वही, ‘चैन से सोना है तो जाग जाओ’ और ‘करें ये तीन उपाय, तो सफल होगा जीवन’ जैसी हेडलाइन वाली खबरें। खबरें, जिन्हें पढ़कर समझ नहीं आता कि आप यूट्यूब के वीडियो पर हैं, इंस्टाग्राम की रील पर या फिर अखबार के आखिरी पन्ने पर।
तो इसलिए हमने भी सोचा, कि क्यों न इस हफ्ते यह सोचें कि अगर सोशल सेक्टर की खबरें भी ऐसे ही छपती, तो उनका कलेवर क्या होता? आप भी पढ़िए और हमें बताइए कि बदलाव की असली कहानियों की हमारी ये नकली पेशकश हिंदी की तमाम मसाला हेडलाइंस के बीच कहां खड़ी हैं?
तब तक ब्रेकिंग न्यूज़ से हमें दीजिए इजाज़त….नमस्कार।






लेखक के बारे में
- कुमार उन्नयन आईडीआर में सीनियर एडिटोरियल एसोसिएट के रूप में कार्यरत हैं। वे नियमित रूप से भाषा और समुदाय से जुड़े विषयों पर काम करते रहे हैं। इस दौरान उन्होंने मौखिक इतिहास शोध, फील्ड पत्रकारिता, लेखन और अनुवाद जैसे क्षेत्रों में सक्रिय भूमिका निभाई है। आईडीआर से पहले वह सेंटर फॉर कम्युनिटी नॉलेज, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर एशियन स्टडीज़, नेहरू मेमोरियल म्यूज़ियम एंड लाइब्रेरी, कथा और द कारवां जैसे संस्थानों से जुड़े रहे हैं। उन्होंने साहित्य में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है और मौखिक इतिहास में प्रशिक्षित हैं।
- राकेश स्वामी आईडीआर में सह-संपादकीय भूमिका मे हैं। वह राजस्थान से जुड़े लेखन सामग्री पर जोर देते हैं। राकेश के पास राजस्थान सरकार के नेतृत्व मे समुदाय के साथ कार्य करने का एवं अकाउंटेबलिटी इनिशिएटिव, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च मे लेखन एवं क्षमता निर्माण का भी अनुभव है। राकेश ने आरटीयू यूनिवर्सिटी, कोटा से सिविल अभियांत्रिकी में स्नातक किया है।