हल्का-फुल्का

देखो, देखो, वो आ गयी!

“वेबसाइट मोबाइल पर क्यों नहीं खुलती?” से शुरू होने वाली इस कहानी का कोई अंत नहीं है। कृपया अपने जोखिम पर लॉग-इन करें।
कम्प्यूटर पर वेबसाइट का पेज खोलते हुए_वेबसाइट

टीम में अफरा-तफरी मची हुई थी…सोमवार 11 बजे के लिए उल्टी-गिनती शुरू हो चुकी थी। वह खास सोमवार आ चुका था, जो पिछले तीन महीने से नेक्स्ट-नेक्स्ट होता हुआ कैलेंडर पर टहल रहा था। आज संस्था की न्यू एंड इम्प्रूव्ड वेबसाइट का लॉन्च था। यह वही वेबसाइट है, जिसे बनाने के लिए पिछले डेढ़ साल से इतनी जूम मीटिंग हुई थी कि अगर उन मीटिंग की बिजली बचाई जाती, तो कम से कम दो गांवों का अंधेरा दूर हो जाता।

लेकिन ये दिन यूं ही नहीं आया था। इसकी शुरुआत हुई थी एक ‘जी सर…जी सर’ मीटिंग से। दरअसल डेढ़ साल पहले फंडर ने पूछा था कि आपकी वेबसाइट मोबाइल पर क्यों नहीं खुलती? तब से टीम में आत्ममंथन शुरू हो गया था। इस पर किसी ने कहा, “डिजिटल प्रेजेंस इम्प्रूव करनी होगी।” किसी ने कहा, “वी शुड वर्क ऑन ब्रांड विजिबिलटी।” फिर किसी ने कहा, “हम्म…यस आई एग्री विद हिम।”

और फिर देखते-देखते ही वेबसाइट प्लान की 51 पेज की पीपीटी बनी।

एक सोमवार टीम मीटिंग में घोषणा हुई कि हमारी संस्था अब डिजिटल हो रही है। इतना सुनते ही सबने आव देखा न ताव और तालियों वाली ईमोजी पर ताबड़-तोड़ क्लिक करने लगे। इसके बाद आया एक मेल। सब्जेक्ट लाइन?- ‘स्ट्रॉंग डिजिटल प्रेजेंस।’ मतलब? फंडर ने कहा है वेबसाइट अपडेट करो भाई!

और फिर शुरू हुआ कमेटियों का अनंत काल। सोशल सेक्टर में काम तभी शुरू होता है जब पहले एक कोर कमेटी बने, और फिर एक सब-कमेटी। कमेटी का ड्राफ्ट रिव्यू ग्रुप तक पहुंचता है, जहां वेबसाइट विजन पर 101 पेजों का एक दस्तावेज मिलता है।

हर मंगलवार चार बजे, फॉलो-अप मीटिंग होने लगी। तीन महीने सिर्फ इस बात पर निकले कि बैनर में मुस्कुराती महिला की फोटो हो या गंभीर महिला की। डेवलपर पूछता, “कंटेंट फाइनल है?” टीम कहती है, “बस छोटा-सा बदलाव है…” यह छोटा-सा बदलाव कभी छोटा नहीं होता था। एक शब्द बदलने के लिए 12 लोगों की सहमति लगती थी। चेंज अप्रवूल का बाकायदा मेल जाता है। महिला सशक्तिकरण लिखना है या वुमन एम्पावरमेंट?

हर मीटिंग में उम्मीद के पहाड़ बनाए जाते। नई वेबसाइट जल्द ही लॉन्च होने वाली है…ये फीचर है, वो फीचर है फलां फलां…बस इसलिए साथियों थोड़ा सब्र और!

फिर एक दिन वे सुनहरे अक्षर स्क्रीन पर चमके: ‘सोमवार को हम फाइनली नई वेबसाइट लॉन्च कर रहे हैं।’ इतने में किसी को याद आया कि यह फाइनेंशियल ईयर खत्म होने को है। अब संस्था को फंड यूटिलाइजेशन भी दिखाना था। फिर क्या था! सारा फंड नई वेबसाइट में ऐसे झोंका गया जैसे इंजन में कोयला। रेल दौड़ पड़ी। नई वेबसाइट में 172 भाषाएं बोलने-समझने वाला चैटबॉट भी जोड़ दिया गया है।

आखिर वो शुभ घड़ी आयी, जब जूम वेबिनार में वेबसाइट का ग्रैंड लॉन्च किया गया। होस्ट के एंटर बटन दबाते ही स्क्रीन पर एक स्टॉक फोटो आयी—एक विदेशी महिला, जो किसी भारतीय गांव के बच्चे को टैबलेट चलाना सिखा रही है। फोटो इतनी ‘हाई-डेफिनिशन’ थी कि उसे लोड होने में इतना समय लगा है, जितना किसी सरकारी फाइल को मेज बदलने में।

शाम होते-होते सभी को एक नया ईमेल आ चुका था, ‘ग्रेट जॉब टीम! बट वी हैव नोटिस्ड सम एरर। लेट्स स्टार्ट वर्किंग ऑन वेबसाइट 2.0 फ्रॉम टुमॉरो। तो मिलते है कल सुबह दस बजे!’

धीरे-धीरे असल बात लीक हुई तो भूचाल आ गया। साइट की बाकी दिक्कतें तो अपनी जगह थी, लेकिन उसमें जोड़ा गया चैटबॉट किसी फंडर के डाटा पर ट्रेन कर दिया गया था।

तो अब वह सवाल का जवाब देने के बजाए यूजर से ही उल्टे सवाल करने लगा था।

कुल मिलाकर, वेबसाइट अभी भी बन ही रही है। वो कहते हैं ना- ‘मेन एट वर्क. एंटर एट योर ओन रिस्क!’

लेखक के बारे में

  • पूजा राठी आईडीआर हिंदी में संपादकीय विश्लेषक (एडिटोरियल एनालिस्ट) हैं। इससे पहले, उन्होंने फेमिनिज़्म इन इंडिया में सह-संपादक के रूप में काम किया है, जहां उन्होंने जेंडर, पर्यावरण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को कवर किया। पूजा को यूएन लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित किया गया है और वह 2024 की लाडली मीडिया फैलो भी रह चुकी हैं। इसके अलावा, वह खबर लहरिया की रूरल मीडिया फेलोशिप और एटलस फॉर बिहेवियर चेंज इन डेवलपमेंट की बिहेवियरल जर्नलिज़्म फेलोशिप की पूर्व फेलो रह चुकी हैं। पूजा ने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है।
  • सलमान फहीम, आईडीआर के सभी डिजिटल कैंपेन व कंटेंट प्लानिंग तथा उसके प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले सलमान द लॉजीकल इंडियन हिंदी के को-फाउंडर रह चुके हैं और उन्होंने न्यूज18 के लिये सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर के तौर पर भी काम किया है। इसके साथ ही उन्होंने चेंज डॉट ऑर्ग में हिंदी ऑपरेशन्स को लीड करते हुए प्लेटफॉर्म की यूज़र संख्या को 10 हज़ार से बढ़ाकर 10 लाख तक पहुंचाया है।