सेक्टर से
आईडीआर इंटरव्यूज | अरुणा रॉय
जानीमानी सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई और मनरेगा जैसे विभिन्न अधिनियमों के लिए किए गए आंदोलनों के पीछे एक प्रेरणा शक्ति के रूप में काम करने वाली अरुणा रॉय हमें बता रही हैं कि वास्तव में सहभागी आंदोलनों को टिकाऊ बनाए रखने के लिए क्या करना पड़ता है। और असहमति के अपने लोकतान्त्रिक अधिकार के लिए हमें क्यों लड़ना चाहिए।लड़कियाँ और महिलाएँ राजनीति में अपना करियर क्यों नहीं बनाना चाहती हैं?
भारतीय राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अभी दूर की कौड़ी है। चूँकि साल 2022 में पाँच राज्यों में और 2024 में आम चुनाव होने वाले हैं इसलिए ज़रूरी है कि हम ऐसे तरीक़े ढूँढें जिससे कि लड़कियाँ और महिलाएँ राजनीतिक प्रक्रियाओं में हिस्सा ले सकें।ओडिशा की एक शिल्पकार ने गढ़ी अपनी ही कहानी
ओड़िशा की एक शिल्पकार जो अपनी कहानी बता रही है कि कैसे उसने महिला शिल्पकारों के साथ मिलकर अपनी एक विश्वसनीय पहचान बनाई और समुदाय विकसित किया।“दिन समय पर शुरू तो होता है लेकिन समय पर ख़त्म नहीं होता”
हॉस्पिटैलिटी कार्यकर्ता के जीवन का एक दिन जो कोविड-19 के दौरान एक रिसॉर्ट चलाती हैं और सहयोगियों की अपनी टीम को सम्भालने का काम करती हैं।एक फ़ार्मर प्रोड़्यूसर कम्पनी कैसे चलाते है?
एक आदिवासी महिला हाशिए पर जी रहे किसानों की आय में सुधार लाने के लिए उन्हें एकत्रित करने वाली एक किसान उत्पादक कम्पनी (फ़ार्मर प्रोड़्यूसर कम्पनी या एफ़पीसी) का प्रबंधन करती है जिनकी मालिक महिलाएँ हैं।कौशल निर्माण: उपस्थिति से आगे की भागीदारी
अपने कार्यक्रम में युवाओं की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने के पाँच तरीके।बिहार में बाल विवाह: यह अब तक क्यों चला आ रहा है?
बिहार में हर पाँच लड़कियों में से दो से अधिक की शादी कम उम्र में हो जाती है। यहाँ राज्य में होने वाले बाल विवाहों के पीछे के कारणों के बारे में बताया गया है साथ ही इस प्रथा में कमी लाने वाले कुछ तरीकों के बारे में भी बात की गई है।