सेक्टर से
अनौपचारिक श्रमिकों के लिए सुरक्षित प्रवास की स्थायी व्यवस्था कैसे की जा सकती है
कोविड-19 महामारी के दौरान हमने देखा भारत में प्रवासी मज़दूरों की संख्या कितनी बड़ी और दशा कैसी दुर्भाग्यपूर्ण है। यह आलेख स्वयंसेवी संस्थाओं को इन असंगठित मज़दूरों को मुख्यधारा में शामिल करने से जुड़े कुछ उपाय सुझाता है।बाल कुपोषण: मेलघाट से मिली सीख
एक आईएएस अधिकारी ने कुपोषण से लड़ने के लिए स्थानीय डेटा, अंत:क्षेत्रीय समाधानों और समुदायों, सरकारों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भूमिका के महत्व को दर्शाया है।आईडीआर इंटरव्यूज । सुषमा अयंगर
कच्छ में अपने अभूतपूर्व काम के लिए जानी जाने वाली सुषमा अयंगर आईडीआर से बातचीत में बता रही हैं कि उनका सारा ध्यान महिला अधिकार और ग्रामीण विकास पर क्यों हैं। साथ ही उन्हें क्यों लगता है कि आज महिला सशक्तिकरण का दायरा आर्थिक परिवर्तन तक सीमित है।युवाओं की ज़रूरतों को नहीं, उनकी इच्छाओं को समझना
एक युवा भारतीय केवल आमदनी के लिए रोज़गार नहीं चाहता है बल्कि वह स्वस्थ माहौल में ऐसा काम करना चाहता है जो उसके उज्जवल भविष्य की योजनाओं में मददगार हो।“युवाओं की आवाज़ सुनी जानी चाहिए”
जमशेदपुर के एक स्वयंसेवी संस्था के संस्थापक के बारे में पढ़िये जो ट्रांसजेंडर, क्वीर और हाशिए पर जी रहे युवाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं।फ़ोटो निबंध: एक कचरा प्रबंधन साइट से बढ़कर
गाजीपुर लैंडफिल की एक झलक जहां सैकड़ों अनौपचारिक मज़दूर कचरे को अलग करते हैं, रीसायकल करते हैं और फिर उसी कचरे को वापस अर्थव्यवस्था में संचारित कर देते हैं।