May 11, 2022

एक फ़ार्मर प्रोड़्यूसर कम्पनी कैसे चलाते है?

एक आदिवासी महिला हाशिए पर जी रहे किसानों की आय में सुधार लाने के लिए उन्हें एकत्रित करने वाली एक किसान उत्पादक कम्पनी (फ़ार्मर प्रोड़्यूसर कम्पनी या एफ़पीसी) का प्रबंधन करती है जिनकी मालिक महिलाएँ हैं।
5 मिनट लंबा लेख

मेरा नाम ललिथा तरम है। मैं महाराष्ट्र के गोंडिया ज़िले के जब्बरखेड़ा गाँव की रहने वाली हूँ। मैं पाओनी प्रोड़्यूसर कलेक्टिव में जनरल मैनेजर के पद पर काम करती हूँ। यह एक किसान उत्पादक कम्पनी (फ़ार्मर प्रोड़्यूसर कम्पनी या एफ़पीसी) है जिसके कुल सदस्यों की संख्या 5,000 है। इसकी सभी सदस्य महिलाएँ हैं जो क्षेत्र के 125 गाँवों की निवासी हैं। गोंडिया एक आदिवासी इलाक़ा है और यहाँ के ज़्यादातर लोग खेती और इससे जुड़े काम करते हैं। हम धान, चना, दाल, मिर्च और महुआ उगाते हैं। जब महिलाएँ एफ़पीसी की सदस्य बन जाती हैं तो इससे उन्हें अपनी आय बढ़ाने और बचत का मौक़ा मिलता है। हमारी एफ़पीसी अपने सदस्यों को कई तरह की सुविधाएँ देती है। उदाहरण के लिए इन सुविधाओं में कम ब्याज दर पर मिलने वाला ऋण, फसलों को बेचने के लिए बाज़ार के सम्पर्क सूत्र मुहैया करवाना और खेती संबंधी चीजें जैसे कि कम क़ीमत पर मिलने वाले बीज और खाद आदि शामिल हैं।

मैंने 2014 में पाओनी प्रोड़्यूसर कलेक्टिव की सदस्यता ली थी। कुछ सालों बाद मैंने आसपास के 5-6 गाँवों के लिए क्षेत्रीय समन्वयक (एरिया कोर्डिनेटर) के रूप में काम करना शुरू कर दिया। यहाँ मेरी ज़िम्मेदारी क्षेत्र की महिलाओं को सदस्य बनाना था। इस दौरान कम्पनी कुछ नए व्यापार भी शुरू कर रही थी। मैंने इस मौक़े का फ़ायदा उठाकर उन गाँवों में मुर्गी पालन और खाद के व्यापार का प्रबंधन अपने हाथों में ले लिया जहां मैं पहले से काम कर रही थी। मई 2020 में मुझे जनरल मैनेजर बना दिया गया। इस पद पर रहकर मुझे पाओनी प्रोड्यूसर कलेक्टिव में टीम प्रबंधन, नियुक्ति, प्रशासन, बोर्ड प्रबंधन और ऐसे कई कामों की ज़िम्मेदारी उठानी पड़ती है।

सुबह 4.00 बजे: मैं सुबह जागने के बाद योग से अपना दिन शुरू करती हूँ। मुझे योग करने में सचमुच बहुत मज़ा आता है! इससे मुझे दिन भर खड़े होकर काम करने में मदद मिलती है। मेरा दिन बहुत ही भागदौड़ वाला होता है और मुझे अक्सर एक जगह से दूसरी जगह जाना पड़ता है। योग ख़त्म करने के बाद मैं कुछ घंटे घर के कामों में लगाती हूँ।

सुबह 9.30 बजे: मैं अपने दफ़्तर के लिए निकलती हूँ। मेरा दफ़्तर मेरे घर से दो किलोमीटर की दूरी पर है। आमतौर पर मैं दफ़्तर जाने के लिए स्कूटी (दोपहिया वाहन) का इस्तेमाल करती हूँ लेकिन आजकल यह ख़राब है। इसलिए आज मुझे पैदल ही जाना पड़ता है। दफ़्तर पहुँचने के बाद सबसे पहले मैं उस दिन के कामों का ब्योरा लेती हूँ।

सुबह 10.30 बजे: कम्पनी हर महिने अपने बोर्ड की बैठक बुलाती है। इन बैठकों में बोर्ड के सदस्यों द्वारा कम्पनी से जुड़े कई तरह के फ़ैसले लिए जाते हैं। अगले सप्ताह हमारी बोर्ड मीटिंग होने वाली है और मेरा काम उस बैठक से पहले सारी चीजों को व्यवस्थित करना है। इसमें एक ऐसी तारीख़ तय करने का काम होता है जिस दिन बोर्ड के अधिक से अधिक सदस्य उपस्थित हों। इसके अलावा एजेंडा तय करना (साथ ही टीम के अन्य सदस्यों और बोर्ड के सदस्यों के सुझाव लेना) और बोर्ड के सदस्यों को बैठक के दौरान लिए जाने वाले फ़ैसलों की जानकारी देना भी शामिल है।

बैठक के लिए एकत्रित हुई महिलाएं-आदिवासी महिला
जब महिलाएँ एफ़पीसी की सदस्य बन जाती हैं तो इससे उन्हें अपनी आय बढ़ाने और जमा करने का मौक़ा मिलता है। | चित्र साभार: एएलसी इंडिया

उदाहरण के लिए पिछले कुछ महीनों से हमारी सदस्यों ने तूर और मसूर दाल की खेती शुरू की है। और हम उनकी मदद करेंगे ताकि वे बाज़ार में अपनी फसल को अच्छी क़ीमत पर बेच सकें। इसके लिए हमें विभिन्न विक्रेताओं से उनकी क़ीमत पूछनी होगी और उनके साथ मोलभाव करना पड़ेगा। एक तरफ़ बोर्ड इस बात का फ़ैसला करता है कि किस विक्रेता को और कितनी क़ीमत पर फसल बेची जाएगी। वहीं दूसरी तरफ़ मैं अपना समय ज़रूरी जानकारियाँ जैसे बिक्री के लिए उपलब्ध दाल की कुल मात्रा, विभिन्न विक्रेताओं से मिलने वाली क़ीमतों की सूची आदि इकट्ठा करने में लगी रहती हूँ।

कभी-कभी मुझे बोर्ड के बैठक में लिए गए फ़ैसलों की जानकारी टीम के अन्य सदस्यों और हितधारकों तक पहुँचाने का काम भी करना पड़ता है। पिछले साल हमें कई कड़े फ़ैसले लेने पड़े थे। कोविड-19 के कारण व्यापार मंदा था इसलिए हमें कुछ कर्मचारियों को काम से निकालना पड़ा। जनरल मैनेजर की हैसियत से उन कर्मचारियों से बात करने की ज़िम्मेदारी मेरी थी जिन्हें हम निकालने वाले थे। उनमें से कुछ ने मुझ पर बहुत अधिक दबाव बनाया क्योंकि वे दुखी थे। मैंने उन्हें समझाया कि यह फ़ैसला उनके काम की समीक्षा के बाद लिया गया है। और इस आधार पर वे एफ़पीसी में अपनी भूमिका के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं।

दोपहर 12.00 बजे: बोर्ड की बैठक में कई विषय के साथ ही मुर्गी पालन व्यापार के बारे में भी बात होगी। कुछ महीने पहले हुए वार्षिक आम सभा में हमें बताया गया कि मुर्गी पालन का हमारा व्यापार घाटे में चल रहा है। इस व्यापार में हम अपने सदस्यों को चूज़े मुहैया करवाते हैं जिन्हें वे पालने के बाद बाज़ार में बेचते हैं। हालाँकि हमारे द्वारा बेची जाने वाली नस्ल कावेरी की माँग में कमी आई है। मुर्गियों को तीन महीनों के अंदर बेच देना चाहिए, लेकिन इन्हें बेचने में चार से पाँच महीने का समय लगने से सदस्यों को नुक़सान हो रहा था। इसलिए हम लोगों ने अधिक माँग वाली नई नस्लों सोनाली और असिल बेचने का फ़ैसला किया। हमारे मुर्गी पालन व्यवसाय का प्रबंधक आज दफ़्तर आया है और हम लोग साथ मिलकर बोर्ड मीटिंग की तैयारी करेंगे। हम बोर्ड के सदस्यों को इन नस्लों के बारे में निम्न जानकारियाँ देंगे: चूज़ों का ख़रीद मूल्य, पालन का खर्च और निवेश से मिलने वाला अनुमानित लाभ।  

दोपहर 2.30 बजे: मैं आमतौर पर अपना सुबह का समय दफ़्तर में बिताती हूँ। दोपहर में मुझे अक्सर बाहर निकलकर अपने फ़ील्ड के कर्मचारियों या हितधारकों से मिलकर उनकी समस्याओं के बारे में बातचीत करनी होती है।

जब सदस्य दुखी हो जाते हैं या उन्हें ग़ुस्सा आता है तब मैं शांत रहने की पूरी कोशिश करती हूँ और उनके ग़ुस्से का जवाब नहीं देती हूँ।

मुझे पास के गाँव में रहने वाली एक हितधारक से मिलने के लिए दफ़्तर से निकलना पड़ा है। वह दुखी है क्योंकि इस साल हम उसे ऋण नहीं दे सकते हैं। कोविड-19 के कारण एफ़पीसी उस मात्रा में अपने हितधारकों को ऋण नहीं दे पा रहा है क्योंकि हमें विभिन्न वित्तीय संस्थाओं से उस मात्रा में धन नहीं मिल पा रहा है। मैंने इन बाधाओं के बारे में उसे बताने की पूरी कोशिश की। लेकिन वह अब भी दुखी है और उसने मुझसे काफ़ी ग़ुस्से में बात की। जब सदस्य दुखी हो जाते हैं या उन्हें ग़ुस्सा आता है तब मैं शांत रहने की पूरी कोशिश करती हूँ और उनके ग़ुस्से का जवाब नहीं देती हूँ। वे कम्पनी के सदस्य हैं और उनका सम्मान करना मेरा कर्तव्य है। लेकिन मुझे यह स्पष्ट करना पड़ता है कि मुझे कम्पनी द्वारा तय किए गए नियमों और शर्तों का पालन करना पड़ता है।

शाम 4.00 बजे: मैं ऐसे सदस्यों से मिलती हूँ जिन्होंने अपने ऋण अभी तक नहीं चुकाए हैं। इस साल सभी लोगों के जीवन में कई तरह की चुनौतियाँ आई हैं इसलिए हम लोग अपने सदस्यों पर ऋण चुकाने के लिए बहुत अधिक दबाव नहीं डाल रहे हैं। लेकिन हम उधार चुकाने की समय सीमा को लगातार बढ़ाते नहीं रह सकते हैं इसलिए हमने उन सदस्यों को चेतावनी पत्र भेजने शुरू कर दिए हैं जिन्होंने हमसे उधार लिए हैं।

बैठक काफ़ी विवादास्पद हो गया है। कई लोगों ने अपनी आवाज़ें ऊँची कर ली है और उनमें से कई लोगों ने कम्पनी छोड़ने की धमकी भी दी है। लेकिन कभी-कभी आगे बढ़ने से पहले आपको लोगों की बेईज्जती सहनी पड़ती है। अब मुझे यह काम करते हुए कई साल हो गए हैं। इसलिए अपने अनुभव के आधार पर मैं उनके सवालों का जवाब देने में और कम्पनी की स्थिति स्पष्ट करने में सक्षम हूँ। मैं उस प्रशिक्षण का लाभ भी उठाती हूँ जो मुझे वीमेन बिज़नेस लीडर्स प्रोग्राम नाम के मिनी-एमबीए कार्यक्रम के दौरान मिला था। इस कार्यक्रम का आयोजन एएलसी इंडिया द्वारा किया गया था।

शाम 6.00 बजे: मैं अपने परिवार के लिए रात का खाना तैयार करने घर वापस लौटती हूँ। मेरे परिवार में मेरा किशोर बेटा और बेटी, मेरे पति और सास-ससुर हैं। खाना बनाते समय ही मैं अपने बच्चों से भी बातचीत करती हूँ। पिछले एक साल से वे ऑनलाइन ही पढ़ाई कर रहे हैं। यह उनके लिए बहुत बड़ा बदलाव है।

कभी-कभी मैं अपना व्यापार शुरू करने के बारे में सोचती हूँ ताकि मैं पैसा कमाकर अपने बच्चों को पढ़ा सकूँ।

इस साल हम सभी को कई तरह के बदलावों का सामना करना पड़ा है। हमारे एफ़पीसी में हमें अपने कार्यकर्ताओं को वेतन देने में भी मुश्किल हुई है क्योंकि व्यापार मंदा है। जब मैं जनरल मैनेजर बनी थी तब मेरा वेतन बढ़कर प्रति माह 5,000 रुपए हो गया था। लेकिन इतना पैसा मेरे परिवार के लिए काफ़ी नहीं है। मुझे अपना काम बहुत अच्छा लगता है। लेकिन मैं इस बात को भी नज़रअन्दाज़ नहीं कर सकती हूँ कि इतने कम पैसों में मेरी और मेरे परिवार की ज़रूरतें पूरी नहीं होती हैं। कभी-कभी मैं अपना व्यापार शुरू करने के बारे में सोचती हूँ ताकि मैं पैसा कमाकर अपने बच्चों को पढ़ा सकूँ। मैंने बकरियों के इलाज के लिए पारा-वेट (अर्धन्यायिक-पशु चिकित्सक) का प्रशिक्षण लिया है। और चूँकि मेरे पास व्यापार योजना के विषय में भी प्रशिक्षण है इसलिए मैं उद्यम की दुनिया में ऐसे अवसर तलाशती रहती हूँ जिससे मैं बिना किसी मुश्किल के अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकूँ।

जैसा कि आईडीआर को बताया गया।

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अधिक जानें

  • भारत में एफ़पीसी पारिस्थितिकी की जानकारी के लिए यह रिपोर्ट पढ़ें।
  • भारत में छोटी जोत वाले किसानों पर कोविड-19 के प्रभाव के बारे में पढ़ें।
  • पश्चिम बंगाल में महिला किसानों के जीवन के बारे में बताने वाले इस फ़ोटो निबंध को देखें।
लेखक के बारे में
ललिथा तरम-Image
ललिथा तरम

ललिथा तरम महाराष्ट्र के गोंडिया ज़िले में पाओनी प्रोडयूसर कलेक्टिव नाम की एक किसान उत्पादक कम्पनी में जनरल मैनेजर हैं। वह यहाँ प्रशासन, नियुक्ति, टीम एवं बोर्ड प्रबंधन के साथ साथ अन्य कामों की प्रभारी हैं। ललिथा ने एएलसी इंडिया द्वारा लघु-एमबीए के तहत आयोजित वीमेन बिज़नेस लीडर्स प्रोग्राम का प्रशिक्षण हासिल किया है।

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