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फील्ड में एक बार- कोई तो बताओ कि सोना कहां है?
जब फील्ड के सरप्राइज़ दिन के साथ-साथ रात में भी आपका पीछा न छोड़ें।पंचायतों से जुड़ी संस्थाएं सरकारी पोर्टल्स का बेहतर इस्तेमाल कैसे करें?
अगर कोई संस्था अपने फील्ड सर्वेक्षण, समुदाय की बातचीत या स्थानीय अनुभवों की तुलना सरकारी आंकड़ों से करती है, तो उसे क्षेत्र की स्थिति को अधिक गहराई से समझने में मदद मिलती है।दलितों के स्वाभिमान का साहित्य है लोकगाथा सलहेस
राजा सलहेस सिर्फ बिहार या किसी एक जाति विशेष की लोकगाथा का नायक नहीं, बल्कि बहुजन समाज के साझा नायक हैं। सलहेस की लोकगाथा प्रेम, संवेदना, विद्रोह और सामाजिक न्याय की अनूठी अभिव्यक्ति है।प्रारंभिक शिक्षा की नींव पर पुनर्विचार
2025 के टीचिंग लर्निंग प्रैक्टिसेज़ सर्वे के अनुसार भागीदारी, लेखन और कक्षा में संवाद का अभाव मूलभूत लर्निंग परिणामों को प्रभावित कर रहा है।भारतीय परिवारों के परम ब्रह्मास्त्र
भारतीय परिवारों की सबसे बड़ी सुपरपावर क्या है? हमारी भावनाओं से ऐसे खेलना कि सारे तीर तरकश में ही धरे रह जाएं। तो आइए, इस बार मिलते हैं कुछ ऐसे ही जज़्बाती हथियारों से।बदलाव की योजना: थ्योरी ऑफ चेंज कैसे काम करती है?
थ्योरी ऑफ चेंज एक तरह का रोडमैप है। यह बताता है कि हम आज कौन सी समस्या देख रहे हैं, उसे कैसे हल किया जा सकता है, और हमारे काम का क्या दीर्घकालिक प्रभाव हो सकता है।सिस्टम में बदलाव: हकीकत से ज़्यादा भ्रम
‘सिस्टम्स चेंज’ के प्रति बढ़ता आकर्षण संस्थाओं की प्राथमिकताओं को असंतुलित और ज़मीनी स्तर पर सार्थक प्रयासों को कमज़ोर बना सकता है।भारत के शहरों में डायबिटीज़, हाईपरटेंशन और बढ़ती स्वास्थ्य असमानताएं
बढ़ते गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) के बीच सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच अब भी सीमित है। यह स्थिति स्पष्ट करती है कि शहरी अनौपचारिक बस्तियों में स्वास्थ्य समानता के लिए सामुदायिक स्तर पर कार्रवाई ज़रूरी है।गर्मी हर साल पड़ती है… पर इसका हल क्या है?
गर्मी तो हर साल पड़ती है, लेकिन उससे निपटने के हर किसी के अपने-अपने जुगाड़ हैं—कहीं सलाह चल रही है, कहीं स्पीड, और कहीं बस काम।वैश्विक जोखिम रिपोर्ट 2026: भारत के सोशल सेक्टर के लिए क्या हैं इसके मायने?
वैश्विक जोखिम दूर लगते हैं, पर उनका असर गांवों, कस्बों और शहरों में स्पष्ट दिखता है। महंगाई, बाढ़, गर्मी, गलत सूचना, बेरोज़गारी और सामाजिक तनाव अब भारतीय सामाजिक क्षेत्र की रोज़मर्रा की हकीकत हैं। यही इस रिपोर्ट की प्रमुख प्रासंगिकता है।खंडवा की रीठी बाई ने कोदो उगाना क्यों बंद कर दिया?
2016 में रीठी बाई के घर के लोग और मवेशी कोदो खाने से बीमार हो गए। जिसके बाद उन्होंने कोदो उगाना बंद कर दिया। उनके गांव के लोग चाहते हैं कि सरकार उन्हें कोदो के ‘सुरक्षित बीज’ दे ताकि वह इसे फिर से उगा सकें।एफसीआरए संशोधन विधेयक, 2026 का संस्थाओं पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
प्रस्तावित संशोधनों के तहत गैर-लाभकारी संगठनों के ऊपर यह संकट बना रहेगा कि यदि उनका एफसीआरए पंजीकरण समाप्त हो जाता है या रद्द कर दिया जाता है, तो विदेशी फंड से तैयार संपत्तियों पर उनका नियंत्रण खत्म हो सकता है