हल्का-फुल्का

गर्मी हर साल पड़ती है… पर इसका हल क्या है?

गर्मी तो हर साल पड़ती है, लेकिन उससे निपटने के हर किसी के अपने-अपने जुगाड़ हैं—कहीं सलाह चल रही है, कहीं स्पीड, और कहीं बस काम।
फिल्म लगान का चित्र_जुगाड़

दिल्ली में तापमान 40 डिग्री पार कर चुका है। ख़बरों में इसे ‘हीट वेव’ कहा जा रहा है।

ज़मीन पर एक रिपोर्टर ने इसका जायज़ा लिया और लोगों से पूछा, “गर्मी से निपटने के लिए आप क्या कर रहे हैं… और इसका आपके काम पर कितना असर पड़ रहा है?” रिपोर्टर को जो जवाब मिले, वे कुछ ऐसे थे:        

हीट वेव शब्द से अंजान किसान का जवाब

आमिर खान_जुगाड़
जिफ़ साभार: जिफ़ी

दफ़्तर में एसी की ठंडी हवा खाते कर्मचारी ज्ञान देते हुए

मेज पर बैठकर चर्चा करता महिला पुरुषों का समूह जुगाड़
जिफ़ साभार: मेक ए जिफ

तेज़ धूप में गिग वर्कर। ‘हीट वेव’ हो या न हो, ऑर्डर तो समय पर पहुंचाना ही है।

रेलवे क्रॉसिंग के फाटक से बाइक निकालता युवक _जुगाड़
जिफ़ साभार: टेनर

फील्ड वर्कर (जिनका दफ़्तर परमानेंटली बाहर है)

नसीरुद्दीन शाह_जुगाड़
जिफ़ साभार: टेनर

रिर्सचर ने अपने काफी भरकम शब्दों मे समझाया, जो शायद समझ से बाहर है  

कम्प्यूटर चलाते हुए रितिक रौशन_जुगाड़
जिफ़ साभार: टेनर

जब नेताओं से पूछा ​हीट वेव क्या है, तो जवाब मिला

फिल्म लगान का एक सीन_ जुगाड़
जिफ़ साभार: जिफ़ी

और फंडर की सलाह…जो है थोड़ा हटकर…   

पैसों वाले बाथटब में लेटी ए​क्ट्रेस_जुगाड़
जिफ़ साभार: जिफ़ी

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लेखक के बारे में

  • रजिका सेठ आईडीआर हिंदी की प्रमुख हैं, जहां वह रणनीति, संपादकीय निर्देशन और विकास का नेतृत्व सम्भालती हैं। राजिका के पास शासन, युवा विकास, शिक्षा, नागरिक-राज्य जुड़ाव और लिंग जैसे क्षेत्रों में काम करने का 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने रणनीति प्रशिक्षण और सुविधा, कार्यक्रम डिजाइन और अनुसंधान के क्षेत्रों में टीमों का प्रबंधन और नेतृत्व किया। इससे पहले, रजिका, अकाउंटेबिलिटी इनिशिएटिव, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में क्षमता निर्माण कार्य का निर्माण और नेतृत्व कर चुकी हैं। रजिका ने टीच फॉर इंडिया, नेहरू मेमोरियल म्यूजियम एंड लाइब्रेरी और सीआरईए के साथ भी काम किया है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य में बीए और आईडीएस, ससेक्स यूनिवर्सिटी से डेवलपमेंट स्टडीज़ में एमए किया है।
  • रवीना कुंवर, आईडीआर हिंदी में डिजिटल मार्केटिंग एनालिस्ट हैं। इससे पहले वे एक रिपोर्टर के तौर पर काम कर चुकी हैं जिसमें उनका काम मुख्यरूप से सार्वजनिक स्वास्थ्य और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित था। रवीना, मीडिया और कम्युनिकेशन स्टडीज़ में स्नातकोत्तर हैं।