अबकी बार, पोषण की सरकार!
सितंबर आया नहीं कि पोषण की फाइल सबसे ऊपर आ जाती है। मीटिंग की बात हो, कैंपेन का नारा या सोशल मीडिया पर पोस्ट—हर जगह पोषण की हाज़िरी लगनी चाहिए।भारतीय महिलाओं की श्रमबल में हिस्सेदारी इतनी कम क्यों?
महिलाओं की वर्कफोर्स में भागीदारी आज भी चुनौती है। जानिए, आज के एपिसोड में।युवाओं को समझने से पहले, हमें खुद को समझना होगा
हम अक्सर सवाल करते हैं कि युवाओं में क्या बदला जाए। लेकिन अगर समाज उन्हें अपनी क्षमताओं का इस्तेमाल करने की आज़ादी ही न दे, तो क्या इतना काफ़ी है?जेल सुधार: सज़ा नहीं, सोच बदलने की ज़रूरत
भारत में जेल सुधार के प्रयास अलग-अलग खांचों में बंटे हैं। लेकिन रिहाई के बाद पुनर्वास के लिए पैरवी, भरोसेमंद फंडिंग और संवेदनशीलता की ज़रूरत है।विकास सेक्टर की डेवलपिंग भाषा
विकास सेक्टर की भाषा किसके लिए कैसी होनी चाहिए? चलिए, पता लगाते हैं!स्थानीय निकायों के लिए 16वें वित्त आयोग की सिफारिशें
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों में स्थानीय निकायों के लिए अनुदान की राशि के साथ उसके वितरण और इस्तेमाल से जुड़े नियम भी तय किए गए हैं।आईडीआर इंटरव्यूज़ | ए रेवती
ट्रांस महिला के रूप में अपनी पहचान अपनाने से लेकर जमातों तक—ए. रेवती बता रही हैं कि उन्होंने समुदाय को एकजुट करना और थिएटर व लेखन के ज़रिए अपने दिल की बात कहना कैसे सीखा।पावर मैपिंगः समाज में ताकत और प्रभाव को समझने का एक तरीका
पावर मैपिंग किसी समस्या से जुड़े साझेदारों, व्यवस्थाओं और उनके बीच मौजूद ताकत और प्रभाव के रिश्तों को समझने का एक सहभागी तरीका है।आपदा से जूझता नागालैंड और सवालों के घेरे में राहत का सिस्टम
जुलाई 2026 में पूर्वी नागालैंड की बाढ़ ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं—क्या राज्य का अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार था? क्या सरकारी राहत समय पर पहुंची? और क्या मीडिया प्रभावित इलाकों की पूरी तस्वीर सामने ला पाया?शिक्षक दिवस की बधाई मिली क्या?
शिक्षक दिवस पर, एक शिक्षक की डायरी- सम्मान और जश्न के बीच वह सब, जो अक्सर अनकहा रह जाता है। इसके सभी पात्र काल्पनिक हैं भी और नहीं भी।