विविधता और समावेश

पावर मैपिंगः समाज में ताकत और प्रभाव को समझने का एक तरीका

पावर मैपिंग किसी समस्या से जुड़े साझेदारों, व्यवस्थाओं और उनके बीच मौजूद ताकत और प्रभाव के रिश्तों को समझने का एक सहभागी तरीका है।
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आधुनिक समाज की समस्याएं अक्सर जटिल और गहरी होती हैं, जिनका आसानी से समाधान ढूंढ पाना मुश्किल होता है। जलवायु परिवर्तन, आर्थिक असुरक्षा, शिक्षा में गैर-बराबरी जैसी मौजूदा समस्याओं को देखें, तो इसमें कई साझेदार और कई प्रणालियां शामिल हैं। ये प्रणालियां लगातार बदलती रहती हैं और एक-दूसरे को प्रभावित करती रहती हैं। इसलिए, इनसे पैदा होने वाले परिणामों का पहले से अनुमान लगा पाना काफी मुश्किल होता है।

पिछले दो वर्षों से स्वातालीम फाउंडेशन के सहयोग से हम इन उलझनों से निपटने के ऐसे तरीकों को खोज रहे हैं, जो बदलाव लाने में जुटे किसी व्यक्ति, समूह या संस्था के लिए मददगार साबित हो सकें। हमारे प्रोजेक्ट ‘गर्ल्स एजुकेशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन’ का मकसद अलग-अलग साझेदारों के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश में लैंगिक समानता को बढ़ावा देना है, ताकि हाशिए के समुदायों की किशोरियों को अच्छी शिक्षा मिल सके, वे अपनी ज़िंदगी के फैसले खुद ले सकें और उन्हें आगे बढ़ने के बेहतर अवसर मिल सकें। 

इसके तहत हमने उत्तर प्रदेश के दो ज़िलों के कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में किशोरियों, शिक्षकों, नज़दीकी समुदाय के लोगों, ग्राम प्रधानों, एनजीओ और सरकारी प्रतिनिधियों के साथ संवाद किया है। इस तरह के संवाद से हम इस नतीजे पर पहुंचे कि किसी भी मुद्दे पर काम करने से पहले यह समझना ज़रूरी है कि समाज में शक्ति और सत्ता किस तरह से बंटे हुए हैं। इससे यह साफ होता है कि किसी समस्या का असर किस पर और कैसे पड़ेगा और उसके समाधान से जुड़े फैसलों में किसकी आवाज़ सुनी जाएगी।

आमतौर पर विकास सेक्टर में संस्थाएं समाज को समझने के लिए या तो शोध की सामान्य पद्धतियां इस्तेमाल करती हैं या फिर वे ऐसे व्यक्तियों पर निर्भर होती हैं, जिन्हें ‘एक्सपर्ट’ या ‘सामाजिक प्रतिनिधि’ का दर्जा दिया जाता है। ऐसे प्रतिनिधि अक्सर खुद समाज के प्रभावशाली वर्ग से आते हैं, जिनके पास अधिक अवसर और सामाजिक अधिकार होते हैं। ऐसे में उनका नेतृत्व उन्हीं असमानताओं को बनाए रख सकता है, जिन्हें हम खत्म करना चाहते हैं। ज़ाहिर तौर पर, जब किसी समुदाय या व्यवस्था में बदलाव की रूपरेखा बाहर से तय की जाती है, तो उस समुदाय में रहने वाले और उस व्यवस्था का हिस्सा रहे लोगों की अपनी समझ, विश्लेषण और सुझाव अक्सर नज़रअंदाज़ हो जाते हैं।

हमारे प्रोजेक्ट में पावर मैपिंग इसी कमी को दूर करने में काफी मददगार साबित हुआ। इसने शोधकर्ताओं और सामुदायिक हितधारकों के दृष्टिकोणों को एक साथ लाने का अवसर दिया। इस प्रक्रिया में लोग साथ मिलकर अपने संदर्भ को समझ पाए, बदलाव की दिशा तय कर पाए और उस बदलाव में अपनी भूमिका और ज़िम्मेदारी को पहचान पाए।

क्या है पावर मैपिंग?

पावर मैपिंग किसी भी मुद्दे से जुड़े विभिन्न भागीदारों, उनके प्रभाव व उनके बीच के संबंधों को पहचानने का एक चित्रात्मक साधन है। इसके जरिए हम हर एक हितधारक की ताकत (पावर), दूसरे भागीदारों पर उसके प्रभाव और बदलाव के प्रयास के प्रति उनके समर्थन या विरोध के स्तर को समझ सकते हैं। 

पावर मैपिंग का एक सामान्य रूप पावर-इंटरेस्ट ग्रिड है। इसमें आम तौर पर, शोधकर्ता या प्रोग्राम/अभियान के प्रतिनिधि हर भागीदार को एक ग्राफ पर अंकित करते हैं। इस ग्राफ में, आड़ी रेखा (एक्सएक्सिस) पर यह मापा जाता है कि कोई भागीदार प्रोग्राम के उद्देश्य से कितना सहमत या असहमत है। वहीं, खड़ी रेखा (वाईएक्सिस) पर यह मापा जाता है कि उस भागीदार का प्रभाव कितना है। लेकिन जब पावर मैपिंग करने में अन्य हितधारक जुड़ते हैं, और उनके विचार पावर मैप में शामिल हो जाते हैं, तब यह और प्रभावी बनता है। पावर मैपिंग के ज़रिये, हर साझेदार को अपनी सोच आगे रखने का मौका मिलता है, जो समस्या या सन्दर्भ की सामूहिक समझ बनाने में और बदलाव लाने के तरीके पहचानने में योगदान देते हैं।

पावर-इंटरेस्ट ग्रिड सिद्धांत को समझाता हुआ एक ग्राफ़_पावर मैपिंग

पावर-इंटरेस्ट ग्रिड।

पावर मैपिंग: सहभागिता का साधन 

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में पावर मैपिंग के दौरान हमने जितनी उम्मीद की थी उससे कहीं ज़्यादा सीखा। हमें समझ आया कि बालिका शिक्षा के क्षेत्र में गैर-सरकारी संस्थाओं और ज़िला प्रशासन, दोनों का समर्थन और प्रभाव महत्वपूर्ण है। इन साझेदारों के साथ लिए गए छोटे-छोटे कदम भी बालिका शिक्षा पर महत्वपूर्ण असर डाल सकते हैं। इस समझ से हमें कार्यक्रम की रूपरेखा और डिज़ाइन को बेहतर बनाने में मदद मिली।

इसके अलावा, सहभागितापूर्ण पावर मैपिंग से हमें यह भी समझने में मदद मिली कि कुछ साझेदार बदलाव का समर्थन क्यों नहीं कर रहे हैं। जैसे, पैसों की कमी के कारण कई परिवार लड़कियों की पढ़ाई के बजाय शादी या रोज़गार को प्राथमिकता देते हैं। वहीं, जेंडर संवेदनशीलता की कमी और प्रशासनिक काम के अत्यधिक बोझ की वजह से स्थानीय अधिकारी शिक्षकों को पर्याप्त समर्थन नहीं दे पाते। इस तरह, सहभागितापूर्ण पावर मैपिंग किसी समस्या से जुड़े अलग-अलग पहलुओं को एक साथ देखने और समझने में मदद करती है।

इस प्रक्रिया ने हमें ताकत के अलग-अलग पहलुओं पर बात करने का मौका भी दिया। जैसे, किसी एक क्षेत्र और संदर्भ में ताकत कैसी दिखती है, वह कैसे जताई जाती है और ताकत से वंचित होने का अनुभव कैसा होता है। उदाहरण के लिए, लड़कियों का नामांकन बढ़ाने के लिए काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पड़ोसियों और धार्मिक नेताओं की भूमिका और प्रभाव को महत्वपूर्ण बताया। वे लोगों की तारीफ करके या उन्हें अपमानित करके उनके निर्णयों और व्यवहार पर असर डालते हैं। उनका यह प्रभाव समाज में उनकी प्रतिष्ठा और सांस्कृतिक/धार्मिक महत्व से आता है। यह प्रभाव सरकारी अधिकारियों की औपचारिक और संस्थागत ताकत से बिलकुल अलग होता है, जिन्हें आमतौर पर प्रभावशाली पक्ष माना जाता है।

पावर मैपिंग की प्रक्रिया के प्रमुख चरण 

किसी भी संस्था के लिए पावर मैपिंग से मिलने वाली सीख बहुत गहरी हो सकती है। संस्थाएं और शोधकर्ता नीचे दिए गए चरणों का इस्तेमाल करके इस प्रक्रिया को कर सकते हैं:

1. समस्या और उससे जुड़े हितधारकों को पहचानना 

सबसे पहले, समस्या को पहचानें। उदाहरण के लिए, हमने इस सवाल के साथ शुरुआत की कि उत्तर प्रदेश में किशोरियों की माध्यमिक शिक्षा को कौन से कारण, साझेदार और उनके आपसी रिश्ते प्रभावित करते हैं? उसके बाद, उस समस्या में शामिल प्रणालियों और साझेदारों की पहचान करें। फिर, अपनी क्षमता और संसाधनों के मुताबिक जितने साझेदारों के साथ आप पावर मैपिंग कर सकते हैं, उन्हें चुनें। साझेदार चुनते समय यह सुनिश्चित करें कि हाशिए के समुदाय से आने वाले साझेदार (लोग) भी इस प्रक्रिया का हिस्सा बन सकें।

हमारे प्रोजेक्ट में, साझेदार चुनते वक्त यह सवाल उठा कि हमें विभिन्न साझेदारों को एक साथ पावर मैपिंग में शामिल करना चाहिए या हर साझेदार के साथ एक अलग सेशन करना बेहतर होगा? हालांकि, साथ में पावर मैपिंग करने से सभी साझेदारों को आपसी संवाद का मौका मिलता है। लेकिन हमने अलग-अलग सेशन कराए, ताकि हर साझेदार अपनी बात खुलकर रख सके। ऐसा न हो कि ऊंचे पद के व्यक्ति की मौजूदगी से किसी को झिझक महसूस हो या लोग एक-दूसरे के विचारों से प्रभावित हो जाएं। आप भी अपने लक्ष्य, मुद्दे और प्राथमिकताओं के हिसाब से उपयुक्त मॉडल चुन सकते हैं।

2. सेशन और स्थान की तैयारी 

पावर-इंटरेस्ट ग्रिड से भले ही हमें यह समझने को मिलता है कि पावर मैपिंग में क्या मापा जाना चाहिए, लेकिन हो सकता है कि ग्राफ बनाना हमेशा उपयुक्त तरीका न हो। आप अपने सेशन के सहभागियों को ध्यान में रखते हुए पावर मैपिंग की गतिविधि का रूप बदल सकते हैं, ताकि सभी को समान रूप से भाग लेने का अवसर मिल सके।

उदाहरण के लिए, हमने किशोरियों के साथ पावर मैपिंग एक खेल की तरह किया। इसमें किशोरियों ने ज़मीन पर अलग-अलग घेरे बनाकर, हर घेरे को एक साझेदार का नाम दिया। फिर, किशोरियों ने उपयुक्त घेरे में खड़े होकर साझेदारों को सबसे ज़्यादा प्रभावशाली से लेकर सबसे कम प्रभावशाली तक के क्रम में रखा।

3. सेशन की शुरुआत 

पावर मैपिंग गतिविधि शुरू करने से पहले, मुख्य सवाल, समस्या या लक्ष्य को दोहराएं। उदाहरण के लिए, हम हर सेशन में लड़कियों की शिक्षा की स्थिति, मौजूदा चुनौतियों और शिक्षा व्यवस्था में विभिन्न सहभागियों की भूमिका पर चर्चा करते थे।

सुनिश्चित करें कि सभी सहभागियों को गतिविधि के मकसद की जानकारी हो और वे पावर मैपिंग में भाग लेने के लिए सहमत हों। उन्हें यह भी स्पष्ट रूप से बताएं कि आप उनके मैप या उनके द्वारा साझा किए गए विचारों का इस्तेमाल कैसे करेंगे। सभी सहभागियों को आश्वासन दें कि उनकी व्यक्तिगत जानकारी गोपनीय रखी जाएगी और आगे के काम में कहीं भी उनके द्वारा साझा किए गए विचारों को उनकी पहचान से नहीं जोड़ा जाएगा। सेशन में कुछ नियम भी तय करें, ताकि सेशन के दौरान की गई बातचीत — खासकर किसी का अनुभव या व्यक्तिगत जानकारी — उस कमरे से बाहर न जाए। सेशन ऐसी भाषा (या भाषाओं) में होना चाहिए, जिसमें सभी सहभागी सहज महसूस करते हों, ताकि वे अपनी बात आसानी से कह सकें।

सामुदायिक फ़ील्डवर्कर्स द्वारा बनाया गया पावर मैप_पावर मैपिंग
सामुदायिक फ़ील्डवर्कर्स द्वारा बनाया गया पावर मैप।

4. मैप बनाना

पावर मैपिंग की शुरुआत मुख्य मुद्दे से जुड़े सभी हितधारकों की पहचान से करें। इसके लिए ज़रूरी नहीं कि आप नक्शा ही बनाएं, एक सूची बनाना भी काफी होगा। 

इसके लिए सहभागियों के छोटे समूह बनाकर, उन्हें पूरी गतिविधि समझाएं और ज़रूरी सामग्री बांटें। उनसे अपने समूह में हितधारक की ताकत और कार्यक्रम के लक्ष्य से उसकी सहमति का अनुमान लगाने को कहें। फिर सहभागियों से हितधारकों के बीच के रिश्ते को भी दिखाने को कहें। जैसे, पावर-इंटरेस्ट ग्रिड पर हितधारकों के बीच तीर खींचकर यह दिखाया जा सकता है कि किसका प्रभाव किस पर पड़ता है। तीरों की मोटाई या रंग बदलकर उस प्रभाव की ताकत को भी दिखाया जा सकता है।

मैप बनाने के दौरान भागीदारों के बीच हो रही बातचीत, विवाद और उनकी सोच पर भी गौर फरमाएं। ये टिप्पणियां आगे की चर्चा के मुख्य बिंदु बन सकती हैं। सहभागियों के सवालों को साझा समझ बनाने के अवसर के रूप में देखें। जहां ‘ताकत किसे माना जाए’ जैसे सवालों का जवाब सहभागियों को खुद बातचीत करके ढूंढने दें। वहीं, कुछ सवालों के सीधे और स्पष्ट जवाब देना बेहतर होता है। 

यह भी ध्यान में रखना ज़रूरी है कि पावर मैपिंग में कोई एक तरीका ‘सही’ या ‘गलत’ नहीं होता है। फ़ैसिलिटेटर और सहभागी दोनों अपने हिसाब से गतिविधि में बदलाव कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, जब फ़ील्डवर्कर्स पावर मैप बना रहे थे, तो उन्होनें सभी पड़ोसियों को एक ही समूह मानने के बजाय ‘शिक्षित पड़ोसी’ और ‘अशिक्षित पड़ोसी’ में बांटा। ऐसे बदलावों से सामाजिक वास्तविकताओं को अधिक बारीकी से समझने का मौका मिलता है। 

5. चर्चा को आगे बढ़ाना

पावर मैप भागीदारों के अनुभवों और विशेषज्ञताओं को सामने लाता है। इसकी व्याख्या और विश्लेषण मिलकर करने से सामूहिक समझ बनती है। चर्चा को शुरू करने के लिए आप नीचे दिए प्रश्नों (प्रॉम्प्ट) का इस्तेमाल कर सकते हैं:

  • कौन सबसे कम/ सबसे ज़्यादा प्रभावशाली है? और क्यों?
  • आपके हिसाब से, कौन लोग हमारे प्रयासों का विरोध करना चाहेंगे? और क्यों?
  • वे तीन सबसे महत्वपूर्ण साझेदार कौन हैं, जिनके साथ हमें काम करना चाहिए?
  • हम मिलकर किस तरह के प्रयास कर सकते हैं?
  • इस मैप पर ताकत के कौन-कौन से प्रकार (जैसे कि संसाधनों पर नियंत्रण या समाज में ऊंचा दर्जा) दिखाई दे रहे हैं? साझेदार इनका इस्तेमाल कैसे करते हैं?
  • साझेदारों के बीच किस तरह के संबंध देखने को मिलते हैं? क्या इन रिश्तों में वक़्त के साथ कोई बदलाव आता है?
  • जो साझेदार इस वक्त हमारे मकसद से सहमत नहीं हैं, उनके साथ हम कैसे काम कर सकते हैं?
  • अगर हम एक आदर्श स्थिति की कल्पना करें, तो शक्ति का संतुलन कैसा दिखना चाहिए? हम समानता की तरफ कैसे बढ़ सकते हैं?

हमारे अनुभव से हमने यह पाया कि जब साझेदार पावर मैपिंग की प्रक्रिया से असहमत हों, तब भी गहराई से चर्चा हो सकती है और महत्वपूर्ण सबक भी हासिल हो सकते हैं। जैसे, हमारे साथ जुड़ी एक संस्था के प्रतिनिधियों ने पावर मैप बनाने से मना कर दिया। इसकी वजह पूछने पर उन्होंने हमें बताया कि वे अपने काम में साझेदारों को सिर्फ ‘शिक्षक’ या ‘स्कूल प्रबंधन समिति’ जैसे पदों या अस्पष्ट श्रेणियों के रूप में नहीं देखते। वे उन भूमिकाओं को निभाने वाले एक-एक व्यक्ति की विशिष्टता को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति तय करते हैं। उनका यह भी मानना था कि बदलाव लाने की क्षमता सभी में होती है, चाहे उनका पद या सामाजिक ढांचे में स्थान कुछ भी हो। अपने अलग विचार हमारे साथ साझा करके उन्होनें हमें समाज का सटीक विश्लेषण करने और अपने नज़रिए और अपनी थ्योरी ऑफ़ चेंज से मेल बिठाने के लिए प्रेरित किया।

अंत में, सेशन समाप्त करते हुए, सहभागियों को गतिविधि से मिली अपनी मुख्य सीख साझा करने का मौका दें।

6. प्रमुख सीखें पहचानें 

पावर मैपिंग चर्चा जिस प्रणाली से जुड़ी है, उसे हर भागीदार अलग नज़रिए से देखता है। भागीदारों द्वारा बनाए गए अलग-अलग नक्शों से सीख इकट्ठा करने के लिए, कई पद्धतियां अपनाई जा सकती हैं, जैसे:

  • जिन टिप्पणियों और योजनाओं पर साझेदार सहमत हैं, उन्हें पहचानना।
  • साझेदारों के विचारों में अंतर पहचानना और असहमति के कारणों को समझना।
  • मैप बनाने वाले साझेदारों के पद, स्थिति, धारणाओं और अन्य भागीदारों के साथ उनके संबंधों के संदर्भ में उनके बनाए मैप्स को पढ़ना।

मैप्स के इन पहलुओं को समझने के बाद, सहभागियों के पास वापस जाकर पावर मैपिंग से आपको मिली सीख साझा करें। साथ ही, उनसे इस प्रक्रिया पर फीडबैक लें। जैसे-जैसे काम आगे बढ़ता है, पावर की समझ और समाज में पावर का संतुलन बदल सकता है। इसलिए अगर आप समय-समय पर पावर मैपिंग दोहरा सकें, तो यह मददगार साबित होगा।

पावर मैपिंग के संचालन में चुनौतियां

कुछ संवेदनशील परिस्थितियों में पावर के बारे में खुलकर बात करना आसान नहीं होता, ख़ासकर असुरक्षित पदों पर काम करने वाले लोगों और हाशिए के समुदाय से आने वाले हितधारकों के लिए। हमारे सेशन में, शिक्षक अक्सर शिक्षा व्यवस्था में ऊंचे पदों पर काम करने वाले हितधारकों के बारे में और स्कूल के तौर-तरीकों के बारे में बात करने में झिझक महसूस करते थे। उन्हें अपने विचार लिखित रूप में साझा करने और अपनी आवाज़ रिकॉर्ड करने की अनुमति देने में चिंता और संकोच महसूस होता था। वहीं, साक्षरता की कमी, सेशन में शामिल होने के लिए आने-जाने में मुश्किलें और सेशन में भाग लेने के परिणामों को लेकर डर की वजह से लोगों को पावर मैपिंग में शामिल हो पाना मुश्किल या असहज लगता था।

ऐसे में, हमने सहभागियों की सहजता और सुविधा को सबसे ज़्यादा अहमियत दी। हमने चार्ट पेपर पर लिखने और रिकॉर्डिंग करने के बजाय खुली बातचीत अपनाई, ज़रूरत पड़ने पर एक-एक करके मुद्दों पर बात की और संवेदनशील मुद्दों को बाद में रखा। इससे यह प्रक्रिया अधिक सहज और सार्थक बन पाई।

पावर मैपिंग में कोई एक तरीका ‘सही’ या ‘गलत’ नहीं होता है। फ़ैसिलिटेटर और सहभागी दोनों अपने हिसाब से गतिविधि में बदलाव कर सकते हैं।

सहभागियों के बीच पद, अधिकार या अनुभव का अंतर भी चर्चा को प्रभावित कर सकता है। प्रभावशाली लोग चर्चा में हावी हो जाते हैं। वहीं, हाशिए के लोग चुप रह जाते हैं। ऐसे में फ़ैसिलिटेटर को बराबरी का माहौल बनाना चाहिए। इसके लिए शुरुआत में कुछ आसान-से नियम भी तय किए जा सकते हैं। जैसे, एक समय में एक व्यक्ति का बोलना और सबको बारी-बारी से बोलने का मौका देना। कम बोलने वालों को सहजता से शामिल करना और ज़्यादा मुखर सहभागियों को दूसरों के लिए जगह बनाने देना। असहमति को भी जगह देना। ज़रूरत पड़ने पर व्यक्तिगत बातचीत उन विचारों को सामने ला सकती है, जो समूह में साझा नहीं हो पाए।

मुख्य सीख

पावर मैपिंग ने शिक्षा व्यवस्था में मौजूद संबंधों और संभावनाओं को लेकर हमारी समझ को व्यापक किया। हमने देखा कि शिक्षा व्यवस्था में अलग-अलग स्तर पर होने वाली समस्याएं कैसे एक-दूसरे से जुड़कर हाशिए के समुदाय की किशोरियों के माध्यमिक शिक्षा के परिणामों को कमज़ोर करती हैं। जैसे, नीति स्तर पर बजट की कमी, अकादमिक विषयों के सीमित विकल्प और शिक्षा व्यवस्था व समाज में महिलाओं के कम प्रतिनिधित्व की वजह से लड़कियों के लिए रोल मॉडल कम होना। समुदाय की तरफ से शादी के दबाव की वजह से भी लड़कियों की आज़ादी पर गहरा असर पड़ना। वहीं, स्कूल में लड़कियों की क्षमताओं को लेकर बड़ों की धारणाएं और जाति, वर्ग एवं धर्म से जुड़े भेदभाव उनके शिक्षण के अनुभव को प्रभावित करते हैं। पावर मैपिंग में जो मुद्दे उभरकर आए और जो सीख हमें मिली उनसे हमें एक ऐसा व्यापक पाठ्यक्रम तैयार करने में मार्गदर्शन मिलेगा, जिसका उद्देश्य कक्षाओं, समुदायों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में समानता को बढ़ावा देना हो। इसके अलावा, पावर मैप्स की मदद से हम यह तय कर पाएंगे कि साझेदारों के साथ किन विषयों पर साझा समझ विकसित करने की ज़रूरत है। 

वर्तमान में विकास क्षेत्र की संस्थाएं सीमित संसाधनों, बदलते सामाजिक-राजनीतिक संदर्भों और अलग-अलग हितों के बीच असंतुलन जैसी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। ऐसे में अपने प्रयासों को मज़बूती देने के लिए पावर मैपिंग उनके लिए एक उपयोगी माध्यम बन सकता है। कुल मिलाकर, पावर मैपिंग से बहुआयामी समाधानों, सहयोग और निरंतर प्रयासों के नए रास्ते खुल सकते हैं और हमें बराबरी और न्याय पर आधारित समाज बनाने में मदद मिल सकती है। 

डॉ. अनन्या तिवारी, डॉ. पायल शाह और वैभव कुमार ने इस लेख में अपना योगदान दिया है।

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लेखक के बारे में

  • निधि किन्हाल शोधकर्ता हैं और नई दिल्ली में रहती हैं। वह गर्ल्स एजुकेशन फॉर ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट से जुड़ी हैं। इसका मकसद यह समझना है कि किस तरह लैंगिक समानता को बढ़ावा देने वाली शिक्षा सिस्टम में बदलाव लाकर लड़कियों की निर्णय लेने की क्षमता और उन्हें उपलब्ध शिक्षा के अवसरों को बेहतर बना सकती है। यह प्रोजेक्ट स्पेंसर फाउंडेशन के सहयोग से चलाया जा रहा है।
  • दिशा श्रीवास्तव की शैक्षणिक पृष्ठभूमि सामाजिक विज्ञान में है। वे वर्तमान में 'प्रोजेक्ट जीईटी’ में बतौर सीनियर रिसर्चर असिस्टेंट कार्यरत हैं। इसके पहले वे सामाजिक और विकास क्षेत्र से जुड़ी परियोजनाओं का हिस्सा रही हैं। उनकी रुचि जेंडर, विकास, शिक्षा और असमानता के अध्ययन में है। विशेष रूप से, वे यह समझने में दिलचस्पी रखती हैं कि सामाजिक संरचनाएं और नीतियां लोगों की क्षमताओं, अवसरों और अनुभवों को कैसे आकार देती हैं और विकास की प्रक्रियाएं इन असमानताओं, अवसरों और अनुभवों को कैसे प्रभावित करती हैं।
  • डॉ. अनुपम आहूजा पूर्व प्रोफेसर हैं। वह एनसीईआरटी के इंटरनेशनल रिलेशंस डिवीज़न और विशेष आवश्यकता समूह शिक्षा विभाग (डीईजीएसएन) की प्रमुख रह चुकी हैं। उन्हें शिक्षा के क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 39 वर्षों का अनुभव है। समावेशी शिक्षा पद्धतियों को विकसित करने और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा से संबंधित प्रकाशनों में उनका विशेष योगदान रहा है। उन्होंने 20 से अधिक देशों में अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ काम किया है और अफ्रीका, एशिया तथा पूर्वी यूरोप में समावेशी कार्यक्रमों के प्रशिक्षण, इनकी शुरुआत, मार्गदर्शन और मूल्यांकन से जुड़े अनेक कार्य किए हैं।
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