विकास सेक्टर
नमस्कार, आज के मुख्य समाचार!
अगर सोशल सेक्टर की खबरें भी हिंदी के समाचारों की तरह छपती, तो शायद हर न्यूज़ ब्रेकिंग न्यूज़ होती!क्या क्षेत्रीय भाषाएं क्राउडफंडिंग को ज़्यादा प्रभावी बनाती हैं?
स्थानीय भाषा और संस्कृति को दर्शाने वाले फंडरेजिंग कैंपेन डोनर्स का विश्वास जीतने में बेहतर साबित हो सकते हैं।देखो, देखो, वो आ गयी!
“वेबसाइट मोबाइल पर क्यों नहीं खुलती?” से शुरू होने वाली इस कहानी का कोई अंत नहीं है। कृपया अपने जोखिम पर लॉग-इन करें।शादी का कार्यक्रम: नॉनप्रॉफिट स्टाइल में
पूरे कार्यक्रम की मिनट-दर-मिनट योजना (बस अप्रूवल बाकी है!)तुम करते क्या हो…हैं?
वह देश बदल सकता है, सिस्टम जगा सकता है, आंदोलन कर सकता है। बस अपना काम समझाने के सिवा सोशल सेक्टर का योद्धा सब कर सकता है।फोर-लेन रिट्रीट की सिंगल-लेन रिएलिटी
सोशल सेक्टर रिट्रीट का हाल किसी मल्टी-लेन हाईवे जैसा नजर आता है—कागज़ पर कई रास्ते, जमीन पर एक!सोशल सेक्टर कॉन्फ्रेंस: समान मंच की असमान सच्चाई
भारत में विकास सेक्टर के सम्मेलन अक्सर भाषा, विविधता और समावेशन की कसौटी पर खरे नहीं उतरते हैं। क्या यह सच में एक समान मंच हैं?तारीख पर तारीख!
गांव और शहर के चुनाव में उतना ही फर्क है, जितना घर की दीवार और फेसबुक वॉल में।लिंक्ड-इन पर जैसा दिखता है, वैसा होता नहीं है?
लिंक्ड-इन एक ऐसा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है जो करियर के लिहाज से बहुत जरूरी है लेकिन यहां पर जो दिखाया जाता है और असल जिंदगी में जो होता है, उसमें जमीन-आसमान का अंतर होता है।सरल कोश: फाइनेंस कमीशन या वित्त आयोग
वित्त आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जो सरकार को यह सिफारिश करती है कि देश के वित्तीय संसाधनों का राज्यों और स्थानीय सरकारों के बीच किस तरह न्यायसंगत और बेहतर ढंग से वितरण किया जाए।बूझो तो जानें: विकास सेक्टर की कुछ मजेदार पहेलियां
इन पहेलियों में सिर्फ विकास सेक्टर के लोग नहीं बल्कि कुछ जाने पहचाने शब्द और अवधारणाएं भी छुपी हैं, आइए देखें आप किन-किन को पहचान पाते हैं।इम्पैक्ट, उम्मीद और एक प्लेलिस्टः नये साल में बस काम चलता रहे
कभी फील्ड की थकान, कभी अंतहीन मीटिंग्स और कभी फाइलों का बोझ; ऐसे में संगीत ही है जो साथ चलता है। नए साल में ये धुनें हमें याद दिलाती हैं कि बदलाव की राह लंबी सही, लेकिन हर छोटा कदम मायने रखता है।