रोजगार
भारतीय परिवारों के परम ब्रह्मास्त्र
भारतीय परिवारों की सबसे बड़ी सुपरपावर क्या है? हमारी भावनाओं से ऐसे खेलना कि सारे तीर तरकश में ही धरे रह जाएं। तो आइए, इस बार मिलते हैं कुछ ऐसे ही जज़्बाती हथियारों से।गर्मी हर साल पड़ती है… पर इसका हल क्या है?
गर्मी तो हर साल पड़ती है, लेकिन उससे निपटने के हर किसी के अपने-अपने जुगाड़ हैं—कहीं सलाह चल रही है, कहीं स्पीड, और कहीं बस काम।तो इस नौकरी के लिए अप्लाई कौन कर रहा है?
जब जॉब डिस्क्रिप्शन पढ़कर लगे - यह रोल है या पूरी संस्था का ठेका?न छांव, न सुरक्षा: दिल्ली के लेबर चौकों पर मजदूरों का संघर्ष
दिल्ली के लेबर चौकों पर काम करने वाले मजदूरों को उम्र के आधार पर भेदभाव, कम मजदूरी और बुनियादी सुविधाओं के अभाव में संघर्ष करना पड़ता है। जानें, कैसे निष्क्रिय कल्याणकारी राशि के उपयोग से इन्हें बेहतर बनाया जा सकता है।गांव का युवा आज भी स्किल ट्रेनिंग से दूर क्यों है?
डीडीयू-जीकेवाई योजना का उद्देश्य ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण और रोजगार से जोड़ना था। लेकिन वर्तमान में यह जागरूकता की कमी, सामाजिक रुकावटों और पाठ्यक्रम की कमियों से जूझती नजर आती है।रोजगार के सवाल पर 2026 का बजट क्या कहता है?
बजट 2026 के रोजगार दावे मनरेगा, मजदूरी और सरकारी योजनाओं की जमीनी सच्चाइयों से मेल खाते नहीं दिखते। असंगठित श्रमिकों के हालात दर्शाते हैं कि कौशल विकास के बावजूद स्थायी रोजगार अब भी एक दूर का लक्ष्य है।कश्मीर घाटी से क्यों गुम हो रहे हैं पारंपरिक धान के खेत और उनकी खुशबू?
परंपरागत रूप से चावल की खेती करने वाले किसान, सेब की बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। खेती की जमीनों पर बनते रिहाइशी और गैर-रिहाइशी इलाके भी धान के रकबे को घटा रहे हैं।मनरेगा के बदले लाए गए ‘वीबी-जी राम जी’ विधेयक पर ज्यां द्रेज़ ने क्या कहा?
वीबी-जी राम जी विधेयक पास हो गया, इसे मनरेगा के बदले लाया गया है। विपक्ष ने इसका विरोध किया है, वहीं सरकार ने कहा है कि इससे ग्रामीण इलाकों में रोजगार के बेहतर अवसर मुहैया होंगे।कन्नौज: जलवायु संकट से घिरी इत्र नगरी
बढ़ते तापमान के चलते कन्नौज में फूलों का उत्पादन कम हो गया है जो यहां के इत्र व्यापार और उससे मिलने वाले रोजगार को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।