
हल्का-फुल्का
अप्रेजल पर बातचीत के दौरान आपकी ईमानदार प्रतिक्रियाएं
काश! इस बातचीत में आप वो सब कुछ कह पाते जो वास्तव में आपके मन में था।एक किस्सा सफलता की कहानियों का
सामाजिक सेक्टर में काम करते हुए अक्सर सफलता की कहानियों को इकट्ठा करने पर बहुत ज़ोर दिया जाता है, इससे जुड़े कुछ किस्से आप यहां देख सकते हैं।चिराग तले अंधेरा
समाजसेवी संस्थाओं के उद्देश्य और उससे अलग राह जाती उनकी नीतियां।‘एक मैनेजर अपनी टीम को क्या-क्या नहीं दे सकता पर उसे चाहिए, बस छुट्टी!’
यह मैनेजर की डायरी पूरी तरह से काल्पनिक है और विकास सेक्टर में काम करने वाले उन तमाम मैनेजर्स को समर्पित है जो चाहे-अनचाहे अपनी टीम के सदस्यों की छुट्टियां मंज़ूर कर ही देते हैं।विकास सेक्टर के ईमानदार विचार
कुछ ऐसी बातें जो समाजसेवी संस्थाएं काम करते हुए सोचती तो हैं लेकिन किसी से कहती नहीं हैं।एक रिसर्चर को कैसे पहचानें?
तीन चित्र और तीन तरीक़े, जो बताते हैं कि ज़मीन पर रिसर्चर कैसे पहचाने जाते हैं।समझ का फेर?
सामाजिक सेक्टर में भाषा की एक पहेली जो जाने कब हल होगी?कथनी और करनी
शिक्षा व्यवस्था और उसकी ईमानदारी के किस्से।क्या आपका जामनगर से आई इन तस्वीरों से कोई वास्ता है… देखिए, शायद हो?
न तो जामनगर का मेहमान होना आसान बात है और ना ही सोशल सेक्टर में काम करना।जब कहने वाले हों हजार, तब चाहिए मन की शक्ति अपार
युवाओं को जब अपना करियर चुनना होता है तो कई बार उनसे ज़्यादा समाज की चलती है।कभी-कभी हेड ऑफिस से आने वाले फील्ड टीम की ‘मदद’ कैसे करते हैं?
कुछ स्थितियां जब हेड ऑफिस से आने वालों को ज़मीनी कार्यकर्ताओं की मदद की ज़रूरत होती है।समाजसेवी संस्थाएं और उनके दबे-छिपे कामकाजी मूल्य
हर रोज़ काम (ना) आने वाले समाजसेवी संस्थाओं के कामकाजी मूल्य।