
हल्का-फुल्का
फील्ड में एक बार (भाग-2): जब लड़कियां लाइब्रेरी जाने लगीं
लड़कियां जब पढ़ना और आगे बढ़ना चाहती हैं तो उनकी राह में तमाम बाधाएं आती हैं, उन्हीं में से एक का किस्सा।महिला किसान और उनके अलग-अलग भाव
महिला किसान दिवस पर महिला किसानों की अलग-अलग भावनायें, जो अक्सर उनके भीतर दबी रहती हैं।फंडिंग हासिल करने का आखिरी विकल्प (जो हमारे पास नहीं है!)
'फंडिंग हासिल करने के 1000 तरीके' किताब का एक पन्ना।पोषण माह में एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के अनुभव
पोषण माह के दौरान गुल्लक सीरीज़ के बहाने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की काल्पनिक प्रतिक्रियाएं।चुटकी: हमारी (और आपकी) लीडरशिप पर
मेरी मैनेजर पिछले दिनों एक लीडरशिप रिट्रीट पर थी और उस दौरान मैंने जितना भी काम किया, उसका हासिल यह लेख है।एक बार फील्ड में: जब शुद्ध हिंदी बोलने के चक्कर में गड़बड़ हो गई
जमीनी कार्यकर्ताओं को समुदाय के साथ हिंदी में ही बात करने की समझाइश दी जाती है, इसी कोशिश के चलते हुई गड़बड़ी का एक दिलचस्प किस्सा।जब एक इंजीनियर विकास सेक्टर में काम करने आता है!
इंजीनियरिंग की पढ़ाई किए हुए लोग और उनके किस्से हर जगह मिल जाएंगे। विकास सेक्टर भी उनसे अछूता नहीं है। आइए, एक नज़र डालते हैं।सपने ढोते हट्टे-कट्टे…पर नेतृत्व का कंधा न छूटे!
सामाजिक सेक्टर में काम करते हुए अक्सर जमीनी नेतृत्व को अहमियत दी जाती है, लेकिन हम इसे कितनी गंभीरता लेते हैं, यहां देखिए।क्या युवा सामाजिक मुद्दों में रुचि लेता है?
ये आंकड़े जो बता रहे हैं, ये आंकड़े क्या बता रहे हैं।कल के लिए लड़ाई: आज़ादी से अब तक
भले दौर अलग हों, मुद्दे अलग हों लेकिन युवा हर बार देश में विरोध की आवाज़ बनते रहे हैं।कहीं धूप, कहीं छांव!
बेमौसम बारिश का जहां युवा आनंद ले रहे हैं, वहीं फसलों को नुकसान हो रहा है, युवाओं के लिए यह मौसम कुछ अलग ही कहानी बयां कर रहा है।बड़े आंदोलनों की बड़ी बातें
आज सामाजिक आंदोलन चलाने के लिए सबसे जरूर उपकरण सोशल मीडिया है लेकिन उससे भी ज़रूरी क्या है?