विकास सेक्टर
समाजसेवी संगठन, सरकार के साथ सहजता से काम करने के लिए इन पांच रणनीतियों को अपना सकते हैं
सरकार के साथ काम करने की अपनी चुनौतियां और फ़ायदे हैं। समाजसेवी संगठन कुछ सावधानियां बरतकर, व्यवस्था के साथ अधिक टिकाऊ और प्रभावी भागीदारी तैयार कर सकते हैं।एक खिलाड़ी जो लैंगिक भेदभाव के ख़िलाफ़ अपनी लड़ाई फुटबॉल के मैदान पर लड़ती है
मुंबई की 19 वर्षीय फुटबॉल कोच, नेत्रावती अपने समुदाय में लैंगिक मानदंडों पर जागरूकता फैलाने के लिए खेल का इस्तेमाल करती है और लड़कियों को खेलने के लिए प्रोत्साहित करती है।चार तरीके जो फंडरेज़िंग को आसान बनाते हैं
दानकर्ताओं से आर्थिक मदद मिलना मुश्क़िल है लेकिन कुछ बातों को ध्यान में रखकर इसमें आसानी से सफलता हासिल की जा सकती है।कोविड-19 ने साफ़ किया है कि ग्रामीण रोज़गार को बनाए रखने में मनरेगा की क्या भूमिका है
एक अध्ययन के मुताबिक़ मनरेगा ने कोविड-19 के दौरान गांवों में रोज़गार की स्थिति को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है लेकिन इसका बजट और जवाबदेही बढ़ाने की ज़रूरत है।“जो आपके रास्ते में है वही आपका रास्ता है”
गोरखपुर के एक गैर-बाइनरी कार्यकर्ता के जीवन का दिन जो छोटे बच्चों को लिंग संवेदनशीलता के बारे में सिखाता है और शहर में पर्यावरण जागरूकता और शिक्षा पर काम करता है।लेह का एक इन्वायरमेंटलिस्ट अपने गांव के लोगों को कचरा प्रबंधन के तरीक़े सिखाता है
अर्थशास्त्र में बीए करने वाले इन्वायरमेंटलिस्ट के जीवन का एक दिन जो अपने गांव में कचरा प्रबंधन और इकोटूरिज़्म के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए यूट्यूब, इंस्टाग्रैम और एनिमेटेड फ़िल्मों का इस्तेमाल करता है।घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ लड़ रही एक आदिवासी महिला के जीवन का दिन
खुद घरेलू हिंसा की पीड़िता, ग्रामीण राजस्थान की एक आदिवासी महिला हिंसा का सामना करने वाली अन्य महिलाओं को न्याय और हक़ दिलाने में उनकी मदद कर रही है।“युवाओं की आवाज़ सुनी जानी चाहिए”
जमशेदपुर के एक स्वयंसेवी संस्था के संस्थापक के बारे में पढ़िये जो ट्रांसजेंडर, क्वीर और हाशिए पर जी रहे युवाओं को सशक्त बनाना चाहते हैं।स्थाई उत्पाद एवं आजीविका निर्माण
एक स्वयं सहायता समूह सदस्य और लीफ़ क्रशिंग मशीन ऑपरेटर बताती है कि कैसे उसकी पहली औपचारिक नौकरी से वह आत्मनिर्भर हुई और उसने अपने परिवार की आर्थिक मदद की।क्या भूमि अधिकार महिलाओं के भविष्य को सुरक्षित कर सकता है?
गुजरात में पैरालीगल कर्मचारी के जीवन का एक दिन जो महिलाओं के सम्पत्ति के अधिकार के महत्व को लेकर जागरूकता फैलाती है। वह विधवाओं को ज़मीन का मालिकाना हक़ दिलवाने और ज़मीन के रिकॉर्ड पर उनका नाम दर्ज करवाने में उनकी मदद करती है।स्वयंसेवी संस्थाओं को क्यों लगता है कि नया एफसीआरए उनके मौलिक अधिकारों का हनन करता है
अप्रैल 2022 में आए FCRA (एफसीआरए) से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बारे में जानिए और समझिए कि यह स्वयंसेवी संस्थाओं को कैसे प्रभावित करता है।ठीक होने की राह पर
नशे की लत और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर लोगों की सहायता करने वाले एक सलाहकार के जीवन का दिन। इस लत को छोड़ने में वह युवाओं की मदद के लिए अपने अनुभवों का इस्तेमाल करते हैं।