February 1, 2023

समाजसेवी संगठन वॉलंटीयरिंग का सही इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?

यदि वॉलंटीयरिंग सही ढंग से की जाए तो यह समाजसेवी संगठन और स्वयंसेवकों दोनों के लिए फ़ायदेमंद होता है, इसकी शुरूआत से जुड़े कुछ सुझाव।
5 मिनट लंबा लेख

2002 के संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रस्ताव में वॉलंटीयरिंग को कुछ इस तरह परिभाषित किया गया है “आमलोगों की भलाई के लिए की जाने वाली पारस्परिक सहायता और स्व-सहायता के परंपरागत तरीक़ों, औपचारिक सेवा वितरण और नागरिक भागीदारी के अन्य प्रकारों समेत गतिविधियों की वह श्रृंखला जिन्हें किसी आर्थिक भुगतान की प्रेरणा से नहीं किया जाता है।”

यदि वॉलंटीयरिंग सही ढंग से किया जाए तो यह स्वयंसेवकों और वे जिस समाजसेवी संस्था के लिए काम कर रहे हैं, दोनों के लिए लाभकारी होता है। दरअसल स्टेट ऑफ़ द वर्ल्ड्स वालंटियरिज़्म रिपोर्ट (एसडबल्यूवीआर) 2011 के अनुसार “इतिहास में कभी भी लोगों के पास कभी प्रमुख कर्ता-धर्ता बनने की इतनी ताकत नहीं रही कि वे कुछ न कर सकने और केवल देखते रहने की बजाय अपने भविष्य को आकार देने वाली घटनाओं को इतना प्रभावित कर सकें।”

प्रथम में लीडरशीप टीम के ज़्यादातर सदस्यों ने अपनी यात्रा एक वॉलंटीयर के रूप में ही शुरू की थी और धीरे-धीरे वे देश भर में बड़े-पैमाने पर होने वाले कार्यक्रमों का नेतृत्व करने लगे। वॉलंटीयरिंग से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने से हर नेता के लिए अलग-अलग तरह के आयाम खुले हैं। इनमें उनकी रुचियों को लेकर बेहतर समझ, करियर से जुड़े निर्णय लेते समय विस्तृत जानकारी और नेटवर्क बनाया जाना भी शामिल है।

प्रथम ने 25 से अधिक वर्षों में वॉलंटीयर इंगेजमेंट के तहत देश भर में (20,000 समुदायों से जुड़े हुए) एक लाख से अधिक वॉलंटीयरों के साथ काम किया है। इस अनुभव के आधार पर हम यहां कुछ सबसे कारगर तरीक़ों के बारे में बता रहे हैं।

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1. प्रभावी ढंग से “क्यों, कैसे और कब” के बारे में बात करें

वॉलंटीयरिज्म की पूरी मूल्य श्रृंखला में यह शायद सबसे महत्वपूर्ण काम है। कार्यक्रम की रूपरेखा को साफ तरह से बताना, समुदाय को इससे होने वाले फ़ायदे, और भाग लेने पर स्वयंसेवकों को फायदा होना आवश्यक है। स्वयंसेवक के समय और प्रतिभा का प्रभावी ढंग से उपयोग करना संगठन की जिम्मेदारी है। ऐसा करने के लिए, संगठन एक प्रस्ताव कार्यक्रम बना सकते हैं जिसमें निम्नलिखित बातों को शामिल किया जाता है:

  • संगठन की दृष्टि, आकार और प्रभाव: ऐसा करने से विश्वास पैदा होता है, वॉलंटीयरों को संगठन के नियम-क़ायदों से तालमेल बनाने में मदद मिलती है, और उनके काम को केंद्र में रखा जाता है। प्रथम में, हम ब्रोशर और वीडियो प्रशंसापत्र का उपयोग स्वयंसेवकों को उस आंदोलन की रूपरेखा समझने में मदद करने के लिए करते हैं जिसका वे हिस्सा होंगे।
  • कार्यान्वयन मॉडल और समयरेखा सहित कार्यक्रम की रूपरेखा का विवरण: इससे वॉलंटीयरों को यह समझने में मदद मिलती है कि वे अपनी भागीदारी से किस प्रकार की उम्मीदें रख सकते हैं।
  • समुदाय को लाभ: निकट भविष्य में एक बड़ा बदलाव लाने में स्वयंसेवी भागीदारी कैसे मदद करेगी, इसकी एक बड़ी-तस्वीर दृष्टि मुहैया करना अत्यावश्यक है। तत्काल प्रभाव अधिक मूर्त हो सकता है लेकिन एक व्यापक दृष्टि स्वयंसेवकों को कारण से जुड़े रहने की प्रेरणा देगी।
  • वॉलंटीयरों को लाभ: एक वॉलंटीयर के रूप में परियोजना में शामिल होने के महत्व को साझा करने से मनोबल बढ़ता है। हमारा अनुभव कहता है कि संगठनों को जिस सबसे बड़े लाभ के बारे में बताना नहीं भूलना चाहिए वह यह है कि इससे जीवन के कई कौशल सीखने को मिलते हैं। इसमें समस्याओं का निदान, संचार, आत्मविश्वास और नेतृत्व शामिल है।

2. गतिविधि, सोच-विचार, प्रतिक्रिया (एक्टिविटी, रिफ्लेक्शन, फ़ीडबैक – एआरएफ) प्रशिक्षण पद्धति को अपनाएं

गतिविधि-केंद्रित पद्धतियों के साथ छोटी अवधि का प्रशिक्षण वॉलंटीयरों के लिए सबसे अधिक कारगर होता है। प्रथम में हम लोग अपने ज़्यादातर वॉलंटीयर प्रशिक्षण के लिए एआरएफ़ पद्धति अपनाते हैं। उदाहरण के लिए, यदि वॉलंटीयरों को ग्राम-स्तरीय सर्वे करना है तब उनकी गतिविधि में साथी वॉलंटीयरों के साथ सर्वेक्षण करना और डमी सरपंच हितधारकों के साथ बातचीत में भूमिका निभाना शामिल होता है। समीक्षा सत्रों में, हर वॉलंटीयर को जोड़ियों/समूहों के बीच शिक्षाओं, शंकाओं और प्रश्नों को साझा करने के लिए कहा जाता है। हमने पाया है कि इस तरह से प्रशिक्षण आपस में संवाद करने वाला बनाना गहरे अनुभव को हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है।

3. कार्यों, भूमिकाओं और जिम्मेदारियों में नवीनता लाएं

विभिन्न अंतरालों पर अलग-अलग कामों में वॉलंटीयरों को शामिल करने से उनके उत्साह को बनाए रखने में मदद मिलती है। इन कार्यों में एक सर्वेक्षण आयोजित करना, समुदाय के सदस्यों का एक वीडियो टेस्टीमोनियल रिकॉर्ड करना, एक प्रदर्शनी का आयोजन करना, सामुदायिक बच्चों के साथ शिक्षण शिविर आयोजित करना और अपशिष्ट प्रबंधन अभियान आयोजित करना शामिल हो सकता है।

गांव में सर्वे करते स्वयंसेवक-एनजीओ स्वयंसेवक
विभिन्न अंतरालों पर विभिन्न कार्यों में वॉलंटीयरों को शामिल करने से उनके उत्साह को बनाए रखने में मदद मिलती है। | चित्र साभार: प्रथम

4. सीख-आधारित प्रोत्साहन प्रदान करें

कभी-कभी, वॉलंटीयरों को आर्थिक प्रोत्साहन देने से बजट पर असर पड़ सकता है। ऐसे समय में, हमने पाया कि ग़ैर-मौद्रिक प्रोत्साहन से वॉलंटीयरों की रुचि को लम्बे समय तक बनाए रखने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए प्रथम अपने वॉलंटीयरों को सात अलग-अलग उद्योग ट्रेडों के मूल सिद्धांतों पर लघु शिक्षण मॉड्यूल प्रदान करता है। ये पाठ्यक्रम अलग-अलग क्षेत्रों में उपलब्ध विभिन्न करियर विकल्पों की एक झलक पेश करते हैं। हमने पाया है कि वॉलंटीयर इनमें रुचि लेते हैं। ग़ैर-मौद्रिक प्रोत्साहन के लिए संगठन अन्य विकल्पों का रुख भी कर सकते हैं। उदाहरण के लिए डिजिटल टूल्स के लिए अपस्किलिंग सेशन, बेसिक एमएस ऑफ़िस कौशल, या कुछ भी ऐसा जो वॉलंटीयर सीखना चाहते हैं। इसके अलावा, प्रमाणपात्रों का भी बहुत अधिक महत्व होता है।

5. सामूहिक विकास को साझा करें

परियोजना और वॉलंटीयर प्रगति को साझा करने के लिए नियमित बैठकें आयोजित करने से नियंत्रण की भावना पैदा करने में मदद मिलती है। हर फ़ील्ड लीडर को परियोजना के प्रभाव को वॉलंटीयरों के साथ साझा करना चाहिए, साथ ही सुधार के लिए उनके इनपुट और सुझाव भी लेने चाहिए। वॉलंटीयरों को सेवाओं में आने वाली कमियों की पहचान करने और सामुदायिक चुनौतियों को हल करने हेतु नए विचार उत्पन्न करने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

यह लेख मूल रूप से प्रथम द्वारा प्रकाशित किया गया था

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लेखक के बारे में
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तोरल परमार

तोरल परमार प्रथम की युवा प्रशिक्षण शाखा में एक वरिष्ठ सहयोगी (एमएमई टीम) के रूप में कार्यरत हैं। उनके काम में व्यावसायिक शिक्षा, उद्यमशीलता और आजीविका स्पेक्ट्रम में इम्पैक्ट मीजरमेंट प्रमुखता से शामिल है। वे आर्ट ऑफ़ लिविंग फाउंडेशन की एक सक्रिय वॉलंटीयर भी हैं। उन्होंने कोलकाता और मुंबई में वंचित बच्चों और युवाओं के लिए कई योग और ध्यान शिविर आयोजित किए हैं। तोरल ने श्री श्री यूनिवर्सिटी से एमबीए और सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से अर्थशास्त्र में बीए की पढ़ाई की है।

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