अधिकार
एफआरए के तहत सामुदायिक वन संसाधन अधिकारों का दावा कैसे कर सकते हैं?
विभिन्न राज्यों में एफआरए पर काम कर रहे दो जानकारों से जानिए कि आदिवासी समुदायों तक उनके वन अधिकार पहुंचाने की प्रक्रिया और चुनौतियां क्या हैं।भूमि अधिकारों तक महिलाओं की पहुंच मजबूत कैसे हो?
महिलाओं के भूमि अधिकारों से जुड़े हस्तक्षेप कार्यक्रमों की कमी इशारा है कि समुदाय-आधारित संगठनों को सशक्त बनाया जाना चाहिए।मध्य प्रदेश में आदिवासियों को उनके वन अधिकार क्यों नहीं मिल पा रहे हैं?
वन अधिकार अधिनियम, आदिवासियों को जंगल और जमीन का अधिकार तो दे देता है लेकिन उनके कागज नहीं दिलवा पा रहा है।महिलाओं को भूमि अधिकार दिलाने का मतलब उन्हें सशक्त बनाना होना चाहिए
समाजसेवी संस्थाओं को महिलाओं को सबसे पहले समझाना होगा कि भूमि अधिकार उनके सम्मान से जीने का अधिकार भी है।पुरुषों का साथ महिलाओं के लिए भूमि अधिकार हासिल करना आसान बना सकता है
महिलाओं को भूमि अधिकार दिलाने के लिए काम कर रही समाजसेवी संस्थाओं के लिए यह स्थापित करना जरूरी है कि लड़ाई पुरुषों से नहीं, पितृसत्ता से है।विमुक्त जनजातियों पर पुलिसिया पहरे के पीछे जातिवाद है
अंग्रेज़ी राज में बनी आपराधिक न्याय प्रणाली आज भी पुलिस के लिए विमुक्त जनजातियों और पिछड़े समुदायों के उत्पीड़न का हथियार बन रही है।कश्मीरी जनजातियों के सामने रोज़गार या शिक्षा में से एक को चुनने की दुविधा क्यों है?
मौसमी प्रवासन, कम आय और जाति-आधारित भेदभावों के चलते गुज्जर बकरवाल और चोपन जैसी कश्मीरी जनजातियों तक शिक्षा नहीं पहुंच पा रही है।फ़ोटो निबंध: भारत की आदिवासी महिला नेता क्या अलग कर रही हैं?
महिलाओं को सशक्त बनाने और युवा लड़कियों के लिए शिक्षा सुनिश्चित करने से लेकर अपने लोगों के अधिकारों के लिए लड़ने तक का काम कर रही आदिवासी नेताओं के जीवन की झलक।