अधिकार
देश का श्रमिक-वर्ग दस्तावेजों के मकड़जाल में उलझा क्यों दिखता है?
अपने देश के श्रमिक वर्ग के लिए सामाजिक कल्याण और योजनाओं के लाभ उपलब्ध करवाना तो दूर उन्हें उनके सरकारी पहचान दस्तावेज दिला पाने में भी हम बहुत पीछे हैं।देश में प्राकृतिक संसाधनों के वास्तविक हक़दार कौन लोग हैं?
प्राकृतिक संसाधनों के खनन को लेकर वर्तमान रवैया, उस इलाक़े के लोगों पर अतिरिक्त बोझ डालता है और साथ ही भावी पीढ़ियों को उनके हिस्से से वंचित करता है।क्या ‘एक देश एक चुनाव’ सचमुच अनेक समस्याओं का हल बन सकता है?
हिंदी पॉडकास्ट पुलियाबाज़ी में सुनें कि सरकार जिस ‘एक देश एक चुनाव’ नीति को लेकर इतनी गंभीरता दिखा रही है, उसका आम चुनावों और लोकतंत्र पर कैसा असर देखने को मिल सकता है।आईडीआर इंटरव्यूज | शंकर सिंह (भाग-दो)
देश में आरटीआई आंदोलन के लीडर और एमकेएसएस के स्थापकों में से एक, सामाजिक कार्यकर्ता शंकर सिंह आईडीआर से बातचीत में अपने कामकाजी और निजी जीवन के बारे में बात कर रहे हैं।आईडीआर इंटरव्यूज | शंकर सिंह (भाग-एक)
देश में आरटीआई आंदोलन के लीडर और एमकेएसएस के स्थापकों में से एक, सामाजिक कार्यकर्ता शंकर सिंह आईडीआर से बातचीत में अपने कामकाजी और निजी जीवन के बारे में बात कर रहे हैं।कोयला-निर्भर समुदायों को नौकरी से ज़्यादा ज़मीन की चिंता क्यों है?
छत्तीसगढ़ और झारखंड के कोयला-निर्भर क्षेत्रों में जस्ट ट्रांज़िशन की प्रक्रिया के मुख्य केंद्र में स्थानीय लोगों को जमीन वापस देने का विचार क्यों होना चाहिए।समुदाय अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए सत्याग्रह कैसे करें?
छत्तीसगढ़ में बीते 12 सालों से चल रहा कोयला सत्याग्रह कुछ सीखें देता है जिनकी मदद से पर्यावरण की रक्षा के लिए एक मज़बूत जन-आंदोलन खड़ा किया जा सकता है।ई-मित्र अपनी ज़िम्मेदारियां ठीक से निभाकर लोगों को सशक्त बना सकते हैं
राजस्थान के एक ई-मित्र कार्यकर्ता के जीवन का एक दिन कैसे बीतता है जब वह डिजिटल माध्यमों से सरकारी योजनाओं और ऑनलाइन सेवाओं की जानकारी देकर लोगों की मदद करता है।फोटो निबंध: अहमदाबाद की बॉयलर फैक्ट्री के श्रमिकों की स्थिति की एक झलक
अहमादाबाद की बॉयलर फैक्ट्रियों में जहां एक तरफ उद्योग मानकों का पालन नहीं हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ श्रमिकों से स्वास्थ्य और जीवन के लिए घातक परिस्थितियों में काम लिया जा रहा है।