
हल्का-फुल्का
वर्कशॉप – “आप आईये तो सही!”
संस्थाओं की वर्कशॉप में “हम आएंगे” जितना आम है, उतना ही “नहीं आ पाएंगे” भी।फील्ड विजिट तो होगी लेकिन हवा में नहीं, हिसाब में
विकास सेक्टर में काम करते हुए फील्ड विजिट्स कभी कम नहीं हो सकती हैं लेकिन उनका बजट होता रहता है, इसलिए इस बार संस्थाओं से मुलाकात से ज्यादा सफर के खर्चे की चिंता है।फंडिंग के पीछे की कहानीः हैलो, हैलो, नमस्ते…
सीएसआर फंडरेजिंग केवल फाइल, रिपोर्ट्स और कॉल नहीं है, यह धैर्य, संवाद और लगातार उम्मीद बनाए रखने की कला है।ख़ुसरो काम क्लाइमेट का, उड़ गया संग अनार!
दिल्ली में दीवाली पर शुरू हुई पटाखों की धम-फटाक और उनका असर कई दिनों बाद भी जारी है। तो प्रस्तुत है हमारे साहित्यिक-सांस्कृतिक बुजुर्ग अमीर ख़ुसरो की शैली में कुछ मजेदार कह-मुकरियां।दिवाली सेल में सामाजिक बदलाव पर स्पेशल डिस्काउंट!
अब सामाजिक बदलाव पर भी मिल रहा है स्पेशल डिस्काउंट! जल्दी करें, ऑफर सीमित समय के लिए लागू।फंडर को क्या चाहिए? बस हमारा सुकून!
जीवन और उसकी अनंत चुनौतियों से आगे बस एक चीज है! फंडर्स की मांगें…कुछ ऐसी ही बात कहता एक जमीनी किस्सा।हर दर्द का डिजिटल इलाज
अधिकार हो या रोजगार, डिजिटल में है सबका उपचार।सोशल सेक्टर की समस्याओं के लिए, स्टार्टअप के समाधान
क्या कभी ऐसा हुआ है कि सोशल सेक्टर की चुनौतियां और मुद्दे बताते ही किसी ने आपके सामने उनका हल ऐप, वाईफाई, एआई वगैरह से चुटकियों में निकालने का दावा रख दिया हो।सपनापुर से हिंदी दिवस का हालचाल
आम जनता के लिए हिंदी के मायने जितने समान हैं, उतने ही अलग भी हैं।नेताओं और अफसरशाही को आईना दिखाता अंगिका भाषा का लोकगीत
अंगिका भाषा का यह लोकगीत ग्रामीण जीवन की कठोर वास्तविकताओं को सामने लाता है और प्रभावशाली वर्ग द्वारा शोषण और एकतरफा नीतियों की तीखी आलोचना करता है।कॉन्वेंट में पढ़कर भी तुम्हें सोशल सेक्टर में काम करना है, क्यों?
ऐसे ही कुछ सवाल और प्रतिक्रियाएं जो मेरा परिवार मेरी विकास सेक्टर की नौकरी पर करता रहता है।फील्ड में एक बार: जब डेटा हर जगह था, प्राइवेसी कहीं नहीं!
क्लासरूम से वॉशरूम तक, टाइम यूज स्टडी में रिसर्चर की डायरी में हर गतिविधि की एंट्री होती है, उसमें खर्च हुए वक्त के साथ।