November 7, 2025

फील्ड विजिट तो होगी लेकिन हवा में नहीं, हिसाब में

विकास सेक्टर में काम करते हुए फील्ड विजिट्स कभी कम नहीं हो सकती हैं लेकिन उनका बजट होता रहता है, इसलिए इस बार संस्थाओं से मुलाकात से ज्यादा सफर के खर्चे की चिंता है।
4 मिनट लंबा लेख

1. जब रोड पर आ गिरे उड़ने का सपना!

बस की छत पर यात्रा करते महिला और पुरुष_फील्ड ट्रिप बजट

फ्लाइट की खिड़की से बादल देखने का प्लान था पर बस की छत पर हवा खा रहे हैं, शायद यही जमीन से असली जुड़ाव है।

2. जब होटल में दो लोग रूम शेयर करें

सोते हुए झगड़ते महिला और पुरुष_फील्ड ट्रिप बजट

दो लोग, एक बेड, एक तौलिया, और ब्रेकफास्ट इन्क्लूडेड के चक्कर में आधी रात को साथी की लात और खर्राटों ने नींद उड़ा रखी है!

3. जब रास्ते में लग जाए भूख

नदी किनारे आपस में बात करते दो पुरुष_फील्ड ट्रिप बजट

ये जय-वीरू की नहीं जरूरत की दोस्ती है। बजट नहीं है इसलिए चाय भी बांट रहे हैं और गम भी!

फेसबुक बैनर_आईडीआर हिन्दी

4. जब पैसे बचाने के लिए कैब नहीं ऑटो करना पड़े

ऑटो चलाती डरी हुई एक महिला_फील्ड ट्रिप बजट

भइया किराया कम नहीं कर रहे हो तो एक आइडिया है… अगर ऑटो मैं चलाऊं तो?

5. जब लंच के पैसे बचाकर करें डिनर का जुगाड़

शादी में खाना लेते तीन पुरुष_फील्ड ट्रिप बजट

फील्ड में संस्थाओं के साथ लंच करना वो हुनर है जहां ‘नेटवर्किंग’ और ‘बचत’ हाथ में हाथ डालकर चलते हैं।

6. जब खत्म हो जाए घर का खाना

कैंटीन में खाना खाते पुरुषों के बीच टिफिन खोलता एक पुरुष_फील्ड ट्रिप बजट

वापसी के सफर के लिए घर से पूड़ी-भाजी लेकर आए थे, लेकिन भाजी पहले ही खत्म है, अब पूड़ी कैसे खाऊं?

लेखक के बारे में
जूही मिश्रा-Image
जूही मिश्रा

जूही मिश्रा आईडीआर में एडिटोरिएल एसोसिएट हैं। उन्हें पत्रकारिता का 14 साल का अनुभव है और उन्होंने पत्रिका, टाइम्स ऑफ इंडिया, रोर मीडिया, दूता टेक्नोलॉजी और ग्राम वाणी के साथ काम किया है। जूही ने विकास संवाद संस्था से फेलोशिप पूरी की है, जहाँ उन्होंने बसोर समुदाय में खाद्य प्रणालियों और कुपोषण के कारणों पर शोध किया।

सलमान फहीम-Image
सलमान फहीम

सलमान फहीम, आईडीआर के सभी डिजिटल कैंपेन व कंटेंट प्लानिंग तथा उसके प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी संभालते हैं। इससे पहले सलमान द लॉजीकल इंडियन हिंदी के को-फाउंडर रह चुके हैं और उन्होंने न्यूज18 के लिये सोशल मीडिया कोऑर्डिनेटर के तौर पर भी काम किया है। इसके साथ ही उन्होंने चेंज डॉट ऑर्ग में हिंदी ऑपरेशन्स को लीड करते हुए प्लेटफॉर्म की यूज़र संख्या को 10 हज़ार से बढ़ाकर 10 लाख तक पहुंचाया है।

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