
पूजा राठी
पूजा राठी आईडीआर हिंदी में संपादकीय विश्लेषक (एडिटोरियल एनालिस्ट) हैं। इससे पहले, उन्होंने फेमिनिज़्म इन इंडिया में सह-संपादक के रूप में काम किया है, जहां उन्होंने जेंडर, पर्यावरण और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों को कवर किया। पूजा को यूएन लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित किया गया है और वह 2024 की लाडली मीडिया फैलो भी रह चुकी हैं। इसके अलावा, वह खबर लहरिया की रूरल मीडिया फेलोशिप और एटलस फॉर बिहेवियर चेंज इन डेवलपमेंट की बिहेवियरल जर्नलिज़्म फेलोशिप की पूर्व फेलो रह चुकी हैं। पूजा ने पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त की है।
पूजा राठी के लेख
हल्का-फुल्का स्वतंत्रता दिवस सेलः नो ऑफर ऑन रोटी!
स्वतंत्रता के आठ दशक बाद भी करोड़ों लोग भोजन जैसे मौलिक अधिकार से वंचित हैं। क्या आजादी का मतलब यही है?हल्का-फुल्का आशाः एक नाम, और हजार काम
एक आशा कार्यकर्ता अपने काम के अलावा किन-किन अजीबो-गरीब जिम्मेदारियों को पूरा करती है, उन्हीं पर एक टिप्पणी।हल्का-फुल्का स्कॉलरशिप पोर्टलः एरर 404 – सोशल जस्टिस नॉट फाउंड!
स्कॉलरशिप तक पहुंचने के लिए छात्रों को अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है जो तमाम योग्यताओं के बावजूद उन्हें ‘वंचित’ बना देती हैं।हल्का-फुल्का विकास हो रहा है, अब बताओ – दिखेगा कब?
विकास से जुड़ी आधी-अधूरी और दिखावटी कोशिशों पर कुछ उलटबांसी।हल्का-फुल्का गर्मी में फील्ड ट्रिप की चुनौतियां और चाय
एसी दफ्तरों में बैठकर आदेश देने वाले मैनेजर क्या जानें, भीषण गर्मी में फील्ड पर दिन गुजारने वाले कर्मचारियों के दिल का हाल। ये तो चाय है जो सब करवा देती है।हल्का-फुल्का सोशल सेक्टर में एंट्री करने वालों के लिए सलाहनामा
पहली सलाह - जोश में आओ, पर होश में रहो! इससे आगे नीचे पढ़ें।





