सरकार और समर्थन
नए एफसीआरए संशोधनों के क्या मायने हैं
जानिए कि 2025 के एफसीआरए संशोधन गैर-लाभकारी संगठनों, विशेष रूप से प्रकाशन से जुड़े संगठनों को किस प्रकार प्रभावित करते हैं।फोटो निबंध: नीति निर्माण और स्थानीय संदर्भ-एक परस्पर संवाद की आवश्यकता
टिकाऊ और असरदार विकास योजनाएं तब बेहतर काम करती हैं जब वे ज़मीनी हकीकत, सामुदायिक भागीदारी और वास्तविक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार की जायें।स्वास्थ्य और विकलांगता पर काम कर सशक्त होती पंचायतें
स्वास्थ्य क्षेत्र और विकलांगजन हित में काम करने से ग्राम पंचायतें प्रभावी और संवेदनशील बनती है, जिससे उनका सशक्तिकरण होता है।रिवर फ्रंट: नदी, नियोजन और पर्यावरणीय सरोकार
किसी भी राज्य में रिवर फ्रंट से जुड़ी गतिविधियों की शुरुआत से पहले वहां की भौगोलिक परिस्थितियों और स्थानीय लोगों को भरोसे में लेना भी जरूरी है।सरकार के साथ जुड़ने के कुछ कारगर उपाय – भाग 1
सरकार से जुड़ने से पहले संस्थाओं को न केवल यह मालूम होना चाहिए कि उन्हें कहां और किस स्तर पर जुड़ना है, बल्कि यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इससे सरकार को क्या लाभ होगा।फोटो निबंध: अवसरों की कमी और आजीविका के संकट से जूझते डोकरा कलाकार
झारखंड के डोकरा कलाकार पीतल से सजावटी सामान और कलाकृतियां बनाते हैं, लेकिन अब उनके लिए इस कला को जारी रख पाना एक चुनौती बन गया है।सरकारी आंकड़े जंगलों के क्षेत्रफल के साथ गुणवत्ता की भी बात क्यों नहीं करते?
जंगल से जुड़े सरकारी आंकड़ों का विश्लेषण करती पर्यावरण जानकार, देबादित्यो सिन्हा और हृदयेश जोशी की एक बातचीत।भारतीय राजनीति में विकलांग प्रतिनिधित्व की कठिन राह
विकलांग जनों को व्यवस्थागत पूर्वाग्रहों और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जो उनके राजनीतिक प्रतिनिधित्व को असंभव न सही, लेकिन बहुत मुश्किल जरूर बना देता है।सरकार का बजट, संस्थाओं की कैसे मदद कर सकता है?
सरकार का बजट, संस्थाओं के लिए न केवल उसकी नीतियों को जानने का माध्यम है, बल्कि इससे उन्हें अपने कार्यक्रमों की प्लानिंग करने में भी मदद मिल सकती है।बजट 2025: सामाजिक क्षेत्र के लिए सरकार की 4 नई प्राथमिकताएं
केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में सामाजिक क्षेत्र पर खर्च कम कर दिया है, जो देश की नीतिगत प्राथमिकताओं में बदलाव को दर्शाती है।प्रवासी श्रमिकों के सुरक्षित भविष्य की राह एक सुविचारित नीति से ही निकलेगी
कोविड महामारी के दौरान ही पता चल गया था कि प्रवासी श्रमिकों के मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए नीतियां, प्रक्रियाएं और प्रणालियां तत्काल तय किए जाने की ज़रूरत है।