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समाजसेवी संस्थाएं अपनी विफलताओं पर बात क्यों नहीं करती हैं?
कुछ वास्तविक तो कुछ काल्पनिक जोखिम, समाजसेवी संस्थाओं को उनकी असफलता पर बात करने से रोकते हैं लेकिन अगर संस्थाएं और फंडर्स चाहें तो इस पर सहज संवाद हो सकता है।बंकर रॉय: ‘साधारण से समाधान को लागू करना सबसे अधिक कठिन होता है’
बेयरफुट कॉलेज के संस्थापक बंकर रॉय से उनकी यात्रा में आने वाली चुनौतियों और उनसे मिलने वाले अनुभवों और सीख पर, पत्रकार रजनी बख्शी से हुई बातचीत।एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का सबसे ज्यादा नुकसान किसे होगा?
समाजसेवी संस्थाओं के एफसीआरए लाइसेंस रद्द होने का असर बढ़ी हुई बेरोज़गारी, हताश समुदाय और कमजोर लोकतंत्र के रूप में दिख सकता है।कैसे समाजसेवी संगठन अपनी कहानी सकारात्मकता से कह सकते हैं?
सामाजिक संगठनों का अपने कार्यक्रमों की पिच तैयार करते हुए सकारात्मक भाषा और उदाहरण अपनाना सोच बदलने वाला साबित होगा।क्या शिक्षा से जुड़े डेटा केवल नीति निर्माताओं के ही काम आते हैं?
शिक्षा के क्षेत्र में बच्चे के सीखने से जुड़े आंकड़े नीति-निर्माताओं के लिए तो उपयोगी होते हैं पर शिक्षकों के लिये नहीं, क्यों?समाजसेवी संगठन वॉलंटीयरिंग का सही इस्तेमाल कैसे कर सकते हैं?
यदि वॉलंटीयरिंग सही ढंग से की जाए तो यह समाजसेवी संगठन और स्वयंसेवकों दोनों के लिए फ़ायदेमंद होता है, इसकी शुरूआत से जुड़े कुछ सुझाव।भारत और अफ़्रीका में कैसे समाजसेवी संगठन समुदाय संचालित परिवर्तन को बढ़ावा दे रहे हैं
वैश्विक समाजसेवी संस्था, ब्रिजस्पैन द्वारा जारी एक रिपोर्ट का सारांश जिसमें समुदाय संचालित परिवर्तन (कम्युनिटी ड्रिवेन चेंज) के कुछ सफल उदाहरणों पर बात की गई है।स्वयंसेवी संस्थाओं को क्यों लगता है कि नया एफसीआरए उनके मौलिक अधिकारों का हनन करता है
अप्रैल 2022 में आए FCRA (एफसीआरए) से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बारे में जानिए और समझिए कि यह स्वयंसेवी संस्थाओं को कैसे प्रभावित करता है।लोगों का हम पर से भरोसा उठ गया है
दक्षिणी राजस्थान में लोग स्वयंसेवी संस्थाओं के कार्यकर्ताओं से दवाइयाँ लेने के लिए तैयार रहते हैं लेकिन आशा कार्यकर्ताओं से नहीं।