अधिकार
आईडीआर इंटरव्यूज | अरुणा रॉय
जानीमानी सामाजिक कार्यकर्ता और आरटीआई और मनरेगा जैसे विभिन्न अधिनियमों के लिए किए गए आंदोलनों के पीछे एक प्रेरणा शक्ति के रूप में काम करने वाली अरुणा रॉय हमें बता रही हैं कि वास्तव में सहभागी आंदोलनों को टिकाऊ बनाए रखने के लिए क्या करना पड़ता है। और असहमति के अपने लोकतान्त्रिक अधिकार के लिए हमें क्यों लड़ना चाहिए।बिहार में बाल विवाह: यह अब तक क्यों चला आ रहा है?
बिहार में हर पाँच लड़कियों में से दो से अधिक की शादी कम उम्र में हो जाती है। यहाँ राज्य में होने वाले बाल विवाहों के पीछे के कारणों के बारे में बताया गया है साथ ही इस प्रथा में कमी लाने वाले कुछ तरीकों के बारे में भी बात की गई है।विधवाओं को परिवार के जमीन में हक़ नहीं मिलता
गुजरात में किए गए एक अध्ययन से यह पता चला है कि कोविड-19 के दौरान विधवा हुई महिलाएं अपनी भूमि अधिकारों तक पहुँचने के लिए संघर्ष कर रही हैं।सरकारी अधिकारियों की ग़लतियों का ख़ामियाज़ा आम आदमी क्यों भुगते?
राजस्थान के एक सामाजिक कार्यकर्ता के जीवन में एक दिन जो समुदायों को उनके अधिकारों तक पहुँचने में मदद करता है और एक सार्वजनिक जवाबदेही कानून की वकालत करता है।पॉक्सो एक्ट के बारे में पाँच बातें
बाल यौन शोषण अपराधों से बचाव के लिए पॉक्सो एक्ट तैयार किया गया था। इस अधिनियम की मुख्य विशेषताएँ जानना आपके लिए आवश्यक है, ख़ासकर अगर आप बच्चों के साथ काम करते हैं।अनौपचारिक कर्मचारियों की मदद के लिए बनाई गई सरकारी योजनाओं में खामियाँ
ई-श्रम पोर्टल तक पहुँचने में आने वाली बाधाओं को दूर करना जरूरी है ताकि अनौपचारिक क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिक भी इसका लाभ उठा सकें।स्वयंसेवी संस्थाओं में मानवाधिकार से जुड़े कामों के लिए वित्तपोषण
बाल अधिकार, श्रम अधिकार और लैंगिक न्याय जैसे मुद्दों पर काम कर रहे पंद्रह लोगों ने आजमाए गए फंडरेजिंग और वित्तपोषण की रणनीतियों को लेकर अपने अनुभव और इस प्रक्रिया से मिलने वाले सबक को साझा किया।“मैं अपने आसपास के लोगों का जीवन बेहतर बनाना चाहता हूँ”
एक यूपीएससी परीक्षार्थी और सफाई कर्मचारी के जीवन का एक दिन जो मैनुअल स्कैवेंजिंग से परे जीवन चाहने वाले लोगों के लिए न्यूनतम वेतन और कौशल विकास को सुनिश्चित करना चाहता है।एक युवा क्रिकेटर जो अपने समुदाय को लैंगिक समानता पर पुनिर्विचार करने में मदद करती है
17 वर्षीय एक लड़की के जीवन का एक दिन जो समाज में लिंग समानता पर काम करने को लेकर उतनी ही जुनूनी है जितना कि क्रिकेट खेलने को लेकर।